आईसेक्ट समाचार
आईसेक्ट उपलब्धियाँ - वर्ष 2011
वर्ष 2011 आईसेक्ट ग्रुप के लिए उपलब्धियों भरा रहा है। इस वर्ष आईसेक्ट और आईसेक्ट की सहयोगी संस्थाओं के कार्यों को व्यापक रूप से सराहना व ख्याति प्राप्त हुई है। आईसेक्ट देश के 27 राज्यों व 3 केन्द शासित प्रदेशों में उच्च शिक्षा, सेवा एवं प्रशिक्षण क्षेत्र के मानकों पर उल्लेखनीय कार्य कर रहा है हम यहाँ संस्था की 2011 में प्राप्त उपलब्धियों की कुछ झलकियाँ प्रस्तुत कर रहे हैं।
सिद्धार्थ चतुर्वेदी (आईसेक्ट निदेशक)
को ई-गवर्नेंस अवार्ड 2011

सूचना एवं तकनीक की अग्रणी कंपनी आईसेक्ट को ई-गवर्नेंस अवार्ड 2011 प्रदान किया गया है। यह पुरस्कार आईसेक्ट को बैंकिंग तथा वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में सूचना एवं तकनीक की उत्कृष्ट सेवायें उपलब्ध कराने के लिए दिया गया है। आईसेक्ट द्वारा 2009 से लोन सुविधा, बचत खाते की सुविधा तथा अन्य बैंकिंग सेवायें अपने बिजनेस करेसपोंडेंट एवं बिजनेस फेसिलेटर मॉडल के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में दी जा रही है जहां पर बैंकों की पहुंच नहीं है। पुरस्कार सुश्री स्मफति ईरानी (राज्यसभा सदस्य) एवं श्री रवि सक्सेना (अपर मुख्य सचिव, साइंस एण्ड टेक्नॉलॉजी विभाग, भारत सरकार) के द्वारा प्रदान किया गया तथा आईसेक्ट की ओर से यह पुरस्कार निदेशक आईसेक्ट सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने ग्रहण किया।
आईसेक्ट को मिला राष्ट्रीय सीएसआई अवार्ड 2011
आईसेक्ट को मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में शिक्षा के माध्यम से सेवायें देने के लिए सीएसआई अवार्ड 2011 प्रदान किया गया। अहमदाबाद में सीएसआई द्वारा आयोजित 46वें वार्षिक सीएसआई सम्मेलन में इस पुरस्कार के अंतर्गत रुपये 1 लाख की राशि दी गई। समारोह में कम्प्यूटर सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा कम्प्यूटर साइंस और तकनीक के क्षेत्र में आईसेक्ट द्वारा किये गये नवोन्मेषी प्रयोगों की सराहना भी की गई। सीएसआई पुरस्कारें की घोषणा छ: श्रेणियों के अंतर्गत की गई जिसमें आईसेक्ट को पुरस्कार शिक्षा के माध्यम से मानव विकास संसाधन के क्षेत्र में किये गये गुणवत्तापूर्ण कार्यों के लिये दिया गया।
आईसेक्ट यूनिवर्सिटीकी स्थापना सपना हकीकत में बदला
आईसेक्ट पिछले 25 वर्षों से एक विश्वविद्यालय के रूप में ही काम करता रहा है। देश के 27 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 8,000 से अधिक अध्ययन केंद्र तथा 1 लाख से अधिक छात्रों का प्रतिवर्ष नामांकन, आईसेक्ट को पहले से ही किसी भी विश्वविद्यालय के समकक्ष खड़ा करता है। पर एक सपना था औपचारिक रूप से आईसेक्ट विश्वविद्यालय की स्थापना। व्यवसायिक प्रशिक्षण और रोजगार मूलक पाठ्यप्रमों को उच्च शिक्षा के औपचारिक संस्थान के साथ जोड़कर एक नई तरह की शिक्षण पद्धति की शुरुआत करना। यह सपना अब हकीकत में बदल गया है। आईसेक्ट द्वारा चिकलोद रोड भोपाल पर उच्च अध्ययन के एक उत्कफढष्ट संस्थान की स्थापना आईसेक्ट यूनिवर्सिटी के रूप में की गई है जो म.प्र. निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2010 के अंतर्गत म.प्र. शासन द्वारा मान्यता प्राप्त है। यू.जी.सी. (भारत सरकार) के एक्ट की धारा 2() के अंतर्गत बनाए गए इस विश्वविद्यालय के डिप्लोमा तथा डिग्री कार्यप्रमों की देश भर में मान्यता प्राप्त है।
आईसेक्ट विश्वविद्यालय में उच्च स्तरीय कक्षाएँ, प्रयोगशालाएँ, पुस्तकालय, केंटीन, हॉस्टल, इंटरनेट सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही घ्ह्दद एवं ध्ल्tdदद खेल, कॅरियर गाइडेंस, इंग्लिश कम्युनिकेशन कोर्स, प्लेसमेंट, सांस्कृतिक गतिविधियाँ, जी.टी. सिस्टम आदि सुविधाएँ भी हैं।
आईसेक्ट यूनिवर्सिटी में ई-ट्रंड 2011 पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
शिक्षा में तकनीकी के महत्व को देखते हुए हम कह सकते हैं कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन और नियंत्रण का शक्तिशाली यंत्र है। भोपाल का प्रथम निजी विश्वविद्यालय 'आइसेक्ट यूनिवर्सिटी` इस क्षेत्र में युवाओं को रचनात्मक दिशा देने हेतु दफढ़ संकल्पित है, ताकि विज्ञान और तकनीकी को लेकर हो रहे नवीन शोध में युवा अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें। इसी उद्देश्य को लेकर आइसेक्ट विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन ई-ट्रेंड 2011 पर होटल आमेर ग्रीन्स भोपाल में किया गया जिसमें देशभर के प्रख्यात वैज्ञानिक, विषय‚विशेषज्ञ, उद्योग जगत की जानी‚मानी हस्तियां एवं शोधार्थी छात्र शामिल हुए।
चार सत्रों में चली इस संगोष्ठी में श्री महेश शर्मा वरिष्ठ वैज्ञानिक सीरी पिलानी, श्री ए. के. दास महाप्रबंधक बीएसएनएल, डॉ. सुरेन्द रहमरकर एनआईटी नागपुर, डॉ. शहनाज अयूब, डॉ. डी.के.श्रीवास्तव अधिष्ठाता बीआईईटी, डॉ. पीतम चंदा निदेशक सीआइएई आदि वक्ताओं ने अपने प्रभावशाली वक्तव्य से शोधार्थियों की समस्याओं का समाधान किया। इस दौरान लगभग 200 शोधपत्र प्राप्त हुए जिनमें 60 शोधपत्रों का चयन वाचन हेतु किया गया। 65 शोधार्थियों ने पोस्टर पेपर प्रस्तुत किए गए। निर्णायक समिति द्वारा चुने गए विभिन्न विषयों के श्रेष्ठ शोध पत्रों को पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर शोध संग्रह का प्रकाशन भी हुआ।
आईसेक्ट महानिदेशक संतोष चौबे सम्मानित
विज्ञान प्रचारक सम्मान 2010
विगत 24 वर्षों से विज्ञान एवं तकनीकी जागरुकता तथा मासिक विज्ञान पत्रिका ''इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए`` के संपादक के रूप में सक्रिय श्री संतोष चौबे को 'विज्ञान पार्षद सम्मान 2010` से सम्मानित किया गया। आपको यह सम्मान भारतीय स्वास्थ्य, पर्यावरण, शिक्षा एवं शोध समिति, जोधपुर द्वारा प्रदान किया गया।
ज्ञातव्य हो कि श्री चौबे को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए इससे पहले विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में म.प्र. सरकार द्वारा डॉ. शंकरदयाल शर्मा सफजन अवार्ड (2005), भारत सरकार द्वारा विज्ञान संचारक के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार (1990) तथा पुस्तक 'कम्प्यूटर एक परिचय` के लिए मेघनाद साहा सम्मान (1987) प्राप्त हो चुका है। आपने कई पुस्तकों का लेखन भी किया है जिनमें विज्ञान तकनीक के प्रति लोगों की जागरुकता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान में आप आईसेक्ट विश्वविद्यालय, भोपाल एवं डॉ. सी.वी.रमनविश्वविद्यालयबिलासपुरकेकुलाधिपतिहैं।
विशिष्ट हिन्दी सेवा सम्मान
आईसेक्ट विश्वविद्यालय भोपाल एवं सीवी रमन विवि बिलासपुर के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे को विशिष्ट हिन्दी सेवा सम्मान प्रदान किया गया। उन्हें यह सम्मान रूपाम्बरा राष्ट्रीय अकादमी कोलकाता द्वारा विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं सूचना तकनीक के क्षेत्र में हिन्दी में किए गए कार्यों के लिए 24 वें हिन्दी अधिवेशन में दिया गया। इस तीन दिवसीय कार्यप्रम में आईसेक्ट के उपप्रम वनमाली सृजन पीठ द्वारा प्रकाशित पत्रिका `रंग-संवाद' को भी राजभाषा शील्ड सम्मान प्रदान किया गया है। कार्यप्रम में आईसेक्ट की ओर से विनय उपाध्याय, मोहन सगोरिया एवं रवीन्द्र जैन ने शिरकत की।
अशोका फैलोशिप
शिक्षाविद् एवं सामाजिक उद्यमी संतोष चौबे का चयन सीनियर अशोका फैलोशिप के लिए हुआ है। फैलोशिप विगत 26 वर्षों के दौरान शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में उनके द्वारा आई.टी. एजुकेशन और शिक्षा से संबंधित सेवायें देने के लिए प्राप्त हुई है।
अशोका फैलो वे सामाजिक उद्यमी हैं जिन्होंने गत वर्षों में अपने नवोन्मेषी विचारों के माध्यम से सामाजिक समस्याओं से निजात दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा विश्व पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। अभी 60 देशों में 2000 अशोका फैलोस हैं जो वैश्विक स्तर पर मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए विशिष्ट प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि निष्ठा,रचनात्मकताएवंसहयोगकेमाध्यमसेबदलावलायाजासकताहै।
डा सी वी रमन उनिवेर्सिटी के पांच वर्ष पूर्ण्
पांच वर्ष पूर्व मात्र 572 विद्यार्थियों के साथ उच्च शिक्षा का सफर प्रारंभ करते हुए सत्र 2011-12 में ढाई हजार से अधिक उच्च शिक्षा के नए विद्यार्थियों का बड़ा परिवार चलाने वाले डॉ.सी.वी.रमन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे और कुलपति प्रो.ए.एस.झाड़गांवकर ने स्थापना के पांच वर्ष पूर्ण होने पर सभी को बधाई देते हुए शहर के अलावा गांव, कस्बों, दूर‚दराज क्षेत्र में उच्च शिक्षा की अलख जगाने का संकल्प दोहराया। इस मौके पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वे नोबेल पुरस्कार विजेता देश के महान वैज्ञानिक डॉ.सी.वी.रमन के सपने को साकार करते हुए ऐसी प्रतिभाओं को सामने लाएंगे जिन पर देश ही नहीं पूरी दुनिया को नाज होगा। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में संचालित प्रदेश के पहले इस अशासकीय विश्वविद्यालय ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में जिस तरह से पढ़ने-पढ़ाने, जन-जन को आगे बढ़ाने का काम किया है, अपने आप में एक मिसाल है। यह आईएसओ सर्टिफिकेट प्राप्त करने वाला तथा कम्यूनिटी रेडियो स्थापित करने वाला देश का पहला निजी विश्वविद्यालय है।
`इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिये' के 200वें
अंक का प्रकाशन
कम्प्यूटर एवं इलेक्ट्रॉनिक विषयों पर हिन्दी में आमजन को जानकारी देने वाली देश की प्रथम पत्रिका का सफर 1988 से शुरू हुआ था। इसका पहला अंक पूरी तरह से इसके संपादक संतोष चौबे द्वारा खुद ही तैयार किया गया था। उस पहले अंक को हिन्दी पाठकों विशेषकर छात्रों द्वारा हाथों-हाथ लिया गया। इसके बाद लिखने वाले और पढ़ने वाले दोनों ही इससे जुड़ते गये और फरवरी 2011 में पत्रिका के 200 वें अंक का प्रकाशन हुआ।
पत्रिका को छात्रों व जन सामान्य का स्नेह तो मिला ही है साथ ही देश भर में ख्याति प्राप्त माधव राव सप्रे संग्रहालय द्वारा पत्रिका 'इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए` को वर्ष 2008 में ``रामेश्वर गुरू पुरस्कार'' और 2008 में ही दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय द्वारा ``भारतेन्दु पुरस्कार'' प्राप्त हो चुका है। ''इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए`` को कुशल संपादन हिन्दी भाषा में विज्ञान, तकनीक के प्रचार-प्रसार के लिये वर्ष 2009 में राष्ट्रीय राजभाषा शील्ड सम्मान से छत्तीसगढ़ के राज्यपाल महामहिम श्री नरसिम्हन तथा पांडिचेरी के ले.गवर्नर श्री इकबाल सिंह द्वारा सम्मानित किया गया।
स्कोप कालेज ऑफ इंजीनियरिंग में तकनीकी व प्रबंधन
शिक्षा की गुणवत्ता पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित

स्कोप कालेज ऑफ इंजीनियरिंग भोपाल में तकनीकी व प्रबंधन शिक्षा की गुणवत्ता पर दो दिवसीय (12 व 13 नवम्बर) राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण व अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. विजय अग्रवाल तथा स्कोप कालेज के प्राचार्य डॉ. डी. एस. राघव ने विषय की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे ने ग्लोबलाईजेशन के दौर में तकनीकी व प्रबंधन शिक्षा में सुधार के लिये फैकल्टी व स्टूडेंट्स से आवश्यकतानुसार अपनी स्किल में सुधार करने की बात कही। पहले दिन तीन सत्रों में 25 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किये गये। दूसरे दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत शोध पत्रों की प्रोसेसिंग का लोकार्पण किया गया।