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सदी का सबसे लंबा
सूर्य ग्रहण
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कालीशंकर
सूर्य ग्रहण
तब घटित होता है जब चन्द्रमा सूर्य और पफथ्वी के बीच से गुजरता
है जिसके कारण सूर्य पूर्ण रूपेण अथवा आंशिक रूप से ढक जाता
है। एन्युलर (अर्थात् रिंगाकार) सूर्य ग्रहण तभी घटित होता है
जब चन्द्रमा का आभासी (अपरेन्ट) व्यास सूर्य के व्यास से छोटा
होता है तथा इसके कारण सूर्य एक रिंग की भाँति दिखाई देता है
और सूर्य से आने वाले अधिकांश प्रकाश को ब्लाक कर देता है। 15
जनवरी 2010 को घटित सूर्य ग्रहण इस मिलेनियम का सबसे लम्बा
रिंगाकार सूर्यग्रहण (4 जनवरी 1992 के बाद के रिंगाकार सूर्य
ग्रहण के बाद के) है जिसकी अवधि 11 मिनट 7.8 सेकन्ड की थी। 4
जनवरी 1992 को घटित रिंगाकार सूर्य ग्रहण की अवधि 11 मिनट 41
सेकन्ड की थी। अगला सबसे लम्बा रिंगाकार सूर्य ग्रहण अब से
1033 वर्ष बाद 23 दिसम्बर 3043 वर्ष में घटित होगा।
15 जनवरी 2010
का सूर्य ग्रहण अधिकांश अफ्रीका, पूर्वी यूरोप, मध्य पूर्व और
एशिया में आंशिक रूप से दृष्टिगोचर रहा। यह रिंगाकार (एन्युलर)
सूर्यग्रहण के रूप में केन्द्राrय अफ्रीका, मालदीव, दक्षिण
केरल, दक्षिण तमिलनाडु, बंगलादेश के कुछ हिस्सों, बर्मा और चीन
में 300 कि.मी. की संकरी पट्टी में देखा गया। यह सूर्य ग्रहण
केन्द्राrय अफ्रीकी गणराज्य से प्रारंभ हुआ और कैमरून, डी आर
कांगो, उगान्डा, नैरोबी, केन्या के ऊपर से गुजरता हुआ भारतीय
समुद्र के ऊपर से गुजरा तथा भारतीय समुद्र के ऊपर विशालतम
सूर्य ग्रहण का रूप लिया।
इसके पश्चात् यह
मालदीव के ऊपर से गुजरा जहाँ पर यह 10.8 मिनट की दृष्टिगोचर
अवधि के साथ सबसे लम्बा सूर्य ग्रहण था। इसके कारण लघु उपद्वीपों
से बना मालदीव पफथ्वी स्थल से इस महत्वपूर्ण सूर्य ग्रहण को
देखने के लिए सर्वोत्तम स्थल था। मालदीव की राजधानी माले में
रिंगाकार सूर्यग्रहण मालदीव के स्थानीय समयानुसार 12:20:20 बजे
प्रारंभ हुआ तथा 12:30:06 बजे (सार्वत्रिक समय +5 घन्टे)
समाप्त हुआ।
भारतीय
समयानुसार (आई एस टी) 13:20 बजे रिंगाकार सूर्यग्रहण ने भारत
के केरल प्रान्त के तिरुवन्तपुरम (त्रिवेन्द्रम) में प्रवेश
किया। तमिलनाडु के रामेश्वरम में यह सूर्यग्रहण काफी
उत्साहवर्द्धक रहा। भारत में यह सूर्य ग्रहण 10.4 मिनट के लिए
दृष्टिगोचर रहा। रामेश्वरम के बाद सूर्य ग्रहण ने श्रीलंका के
डेल्प्ट उपद्वीप में प्रवेश किया तथा जाफना (श्रीलंका) से
निकलकर बंगाल की खाड़ी को पार करता हुआ पुन भारत के मिजोरम के
ऊपर प्रकट हुआ।
तिरुवन्तपुरम, जो भारत में इस सूर्यग्रहण का प्रवेश बिन्दु था,
में इस सूर्यग्रहण को पब्लिक के द्वारा प्रेक्षित करने के लिए
अनेक दूरबीनें लगाई गई थीं। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र,
जो तिरुवन्तपुरम में स्थित है, ने सूर्यग्रहण के दौरान
वायुमंडलीय-आयनमंडलीय गणकों का विश्लेषण किया। इसके लिए अनेक
वैज्ञानिक सूर्यग्रहण के दौरान तिरुवन्तपुरम में मौजूद थे।
धनुस्कोडी जो
सूर्य ग्रहण की केन्द्राrय रेखा में था वह इस सूर्य ग्रहण का
नजारा लेने के लिए अच्छा स्थल था। दक्षिण एशिया के बाद
रिंगाकार सूर्यग्रहण पफथ्वी छोड़ने के पहले म्यांमार और चीन के
ऊपर से गुजरा।
चार प्रकार
के सूर्य ग्रहण
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पूर्ण सूर्य
ग्रहण तब घटित होता है जब सूर्य पूरी तरह से
चन्द्रमा के द्वारा ढक लिया जाता है। इसके अन्तर्गत तीव्र
चमक वाली सूर्य की डिस्क चन्द्रमा की डार्क बाह्य परिधि
लाइन से रिप्लेस हो जाती है तथा बहुत धुँधला दिखने वाला
सूर्य का कोरोना दिखाई देने लगता है। पूर्ण सूर्यग्रहण
पफथ्वी की सतह की एक पतली पट्टी से दृष्टिगोचर होता है।
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रिंगाकार (एन्युलर)
सूर्य ग्रहण तब घटित होता है जब सूर्य और
चन्द्रमा ठीक एक रेखा में होते हैं लेकिन चन्द्रमा का आभासी
आकार सूर्य से छोटा हो जाता है। इसलिए सूर्य एक बहुत चमकीली
रिंग (अर्थात् एन्युलस) की भाँति प्रतीत होता है जो
चन्द्रमा की परिधि (आउटलाइन) को घेर लेता है।
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मिश्रित
सूर्यग्रहण (हाइब्रिड इक्लिप्स) : इसे रिंगाकार/सम्पूर्ण
सूर्य ग्रहण भी कहा जाता है जो सम्पूर्ण और रिंगाकासूर्य
ग्रहण के बीच का टान्जीशन होता है। पफथ्वी के कुछ बिन्दुओं
पर यह सम्पूर्ण सूर्यग्रहण की भाँति तथा कुछ बिन्दुओं पर
रिंगाकार (एन्युलर) सूर्यग्रहण की भाँति दिखाई देता है।
मिश्रित सूर्यग्रहण प्राय बहुत कम होते हैं।
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आंशिक सूर्य
ग्रहण तब घटित होता है जब सूर्य और चन्द्रमा
पूरी तरह से एक रेखा में नहीं होते हैं तथा चन्द्रमा केवल
आंशिक रूप से ही सूर्य को ढंकता है। यह परिघटना प्राय
पफथ्वी के विशाल भाग से (सम्पूर्ण अथवा रिंगाकार सूर्य
ग्रहण पट्टी के बाहर से) देखी जा सकती है। लेकिन कुछ सूर्य
ग्रहण केवल आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में ही देखा जा सकता
है तथा इसका कारण यह है कि अम्ब्रा (अर्थात् सौर धब्बे के
गहरे भाग की परछाई) कभी भी पफथ्वी की सतह से परिच्छेदन नहीं
करती जो पफथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों से गुजरती है।
वर्ष 2010
के अन्य ग्रहण
-
26 जून का आंशिक चन्द्र ग्रहण
-
11 जुलाई का पूर्ण सूर्य ग्रहण
-
दिसम्बर
का पूर्ण चन्द्र ग्रहण
के-1058, आशियाना कॉलोनी,
कानपुर रोड,
लखनऊ-226012, उ.प्र.
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