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... और भी हैं राहें
रूप निखारें करियर संवारें वैज्ञानिक सिद्धांतों पर किए जाने वाले सौंदर्य संबंधी उपचार और देख-रेख को
कॉस्मेटोलॉजी कहते हैं। यही कारण है कि अब इसकी व्यवस्थित शिक्षा विभिन्न
विश्वविद्यालयों और संस्थानों में उपलब्ध कराई जा रही है। आप भी इसमें करियर बनाकर
दूसरों का सौंदर्य निखारकर अच्छा पैसा कमा सकते हैं।
आज हर क्षेत्र में वोकेशनल
ट्रैनिंग को प्राथमिकता दी जा रही है, इसलिए इस क्षेत्र
में ऐसे अधिक से अधिक कोर्स व प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के प्रयास किये जा रहे हैं।
यह एक विस्तफत क्षेत्र है और इसमें रोजगार भी खूब है। सोने पर सुहागा यह है कि इस
क्षेत्र में आने के लिए हाइली स्किल्ड होने की आवश्यकता नहीं होती है। डिग्री स्तर
की पढ़ाई पर भी अब कॉस्मेटोलॉजी
विषय उपलब्ध है। कॉस्मेटोलॉजिस्ट्स मेडिकल तकनीकों
के आधार पर आपके व्यक्तित्व की शारीरिक कमियों को दूर करते हैं। इस तरह ब्यूटी
कल्चर नए आयाम छू रहा है।आप भी जानें कॉस्मेटोलॉजी
पलक झपकते ही लोगों को ग्लैमरस लुक देने वाले सेंटरों के आकजा&ण से अब कोई नहीं बचा
है। हर एक की ख्वाहिश होती है कि वह सुंदर दिखे। जरूरी नहीं कि वह कुदरती सुंदर ही
हो। कफढत्रिम लुक देने वाले ये सेंटर अब आपके हर सपनों को साकार कर रहे हैं, तो इसके
पीछे उनका प्रशिक्षण ही है। कल तक विदेशों में ही इसकी उत्कफढष्ट शिक्षा देने की
सुविधा थी, लेकिन अब भारत में भी सौंदर्यशास्त्र में डिग्री देने की व्यवस्था की गई
है, ताकि यहां से प्रशिक्षण लेकर युवाओं को रोजगार के लिए भटकना न पड़े।
कॉस्मेटोलॉजी (सौंदर्यशास्त्र) के क्षेत्र में साइंटिस्टों और प्रोडक्शन इंजीनियरों
से लेकर हेयर स्टाइलिस्ट, मेकअप आर्टिस्ट, पेडिक्योरिस्ट और मेहंदी वाली सहित लाखों
लोगों को रोजगार मिला हुआ है। यदि सौंदर्य की समझ आपके अंदर है तो ब्यूटी केयर में
कॅरियर की अपार संभावनाएं हैं।
विस्तफत कार्यक्षेत्र
ब्यूटीशियन का कार्यक्षेत्र बेहद विस्तफत है। इसमें ब्यूटी थेरेपी, हेयर स्टाइलिंग,
मेकअप, मसाज, इलेक्ट्रालिसिस, हर्बल ब्यूटीकेयर आदि प्रमुख हैं। इन्हीं से जुड़े
जॉब्स में ब्यूटी लैब असिस्टेंट, हेल्थ क्लब इंस्टःक्टर, कॉस्मेटिक सेल्स पर्सन,
कंसल्टेंट, योग और नेचर-केयर प्रैक्टिशनर आदि ऐसे क्षेत्र हैं, जिसमें अनेक
स्पेशलाइजेशन किए जा सकते हैं। इसमें तकनीकी जानकारी के साथ-साथ रचनात्मकता और
कल्पनाशक्ति की जरूरत होती है। जहां मेकअप आर्टिस्ट का काम सहायक रंगों की सहायता
से फीचर्स उभारकर चेहरे को
आकर्षक बनाना होता है। वहीं एक स्कीन केयरमैन को त्वचा
से जुड़ी समस्याओं को देखना होता है। एक फेशियल एक्सपर्ट का काम मुहांसों, गहरे
धब्बों या समय से पहले की झुर्रियों का इलाज करना होता है। इसमें लेजर तकनीक की मदद
ली जाती है, जो सिर्फ तकनीकी
विशेषज्ञ ही कर सकता है। एक कॉस्मेटिक सेल्स पर्सन को
ग्रूमिंग, स्किन, हेयर और नेलकेयर के साथ प्रमोट किए जाने वाले प्रोडक्ट्स की पूरी
जानकारी होनी चाहिए।
कोर्स एवं योग्यता
ब्यूटीशियन के कोर्स की अवधि छह माह से लेकर तीन
वर्ष तक की होती है, जिसमें
सर्टिफिकेट, डिप्लोमा तथा डिग्री की उपाधि दी जा रही है। आज प्रत्येक बड़े-छोटे शहर
में शहनाज, हबीब, लैक्मे, लॉरियल के निजी संस्थान खुल गए हैं। इन संस्थानों में
ब्यूटीशियन से संबंधित संपूर्ण जानकारी दी जाती है, जहां आरोमा, गल्वनिक फेशियल
कोर्स एवं रिफ्रेशर कोर्स कर सकते हैं। इसके अलावा भी कई कोर्स हैं, जिन्हें पूरा
कर आप अपना ब्यूटी पार्लर खोलकर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।
भारत में जोरदार मांग
लोगों की फैशन, फिटनेस और सौंदर्य के प्रति बढ़ती जागरूकता ने ब्यूटी बाजार को और
बेहतर बनाया है। लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवा दे रहे
हैं। दुल्हन और पार्टी मेकअप के अलावा फैशन एडवरटाइजिंग, फिल्म, टेलीविजन और थिएटर
इण्डस्ट्री में मेकअप आर्टिस्टों की भारी मांग है। इस क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं
को देख आज हर गली मोहल्ले में ब्यूटी का प्रशिक्षण देने वाले संस्थान खुल गए हैं,
लेकिन संस्थान के चयन में आपको सावधानी बरतनी चाहिए।
कमाई भी अनलिमिटेड
अंतर्राष्ट्रीय हेयर स्टाइलिस्ट व कॉस्मेटोलॉजिस्ट का कहना है कि जहां कॉरपोरेट
कल्चर ने लोगों में फैशन की समझ को विकसित किया है, वहीं आज लोगों के पास पैसा भी
आया है। खुद को कैसे फिट रखें और
आकर्षक बनाएं, इसके लिए ब्यूटी सैलूनों का चक्कर
सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि उम्रदराज लोग भी लगा रहे हैं। ऐसे में इनकी जिज्ञासाओं
को तभी शांत किया जा सकता है, जब आपको उसके बारे में जानकारी हो। लड़के भी इस
क्षेत्र में आ रहे हैं। इसके पश्चात् स्वतंत्र रूप से भी अपना सैलून खोला जा सकता
है। आने वाले पांच
वर्षों में इस क्षेत्र में बहुत अधिक अवसर बनेंगे, क्योंकि इस
उद्योग का फैलाव अब छोटे शहरों में भी हो रहा है।
प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान
- शहनाज हुसैन वुमन वर्ल्ड इंटरनेशनल शाखा, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर।
- जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, दिल्ली
- वीएलसीसी, भोपाल, ग्वालियर, इंदौर।
- श्यामलाल कॉलेज, जी.टी. रोड, शाहदरा, दिल्ली।
- जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, जामिया नगर, नई दिल्ली।
- गुरुनानक देव विश्वविद्यालय, पंजाब।
- साउथ दिल्ली पोलिटेक्निक फॉर वुमन, लाजपत नगर, नई दिल्ली
- पूसा पॉलिटेक्निक पूसा रोड, पटेल नगर, नई दिल्ली।
- शहनाज हुसैन वुमन वर्ल्ड इंटरनेशनल, नई दिल्ली।
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फॉरेन लैंग्वेज
भीड़ में दिलाए अलग पहचान
किसी भाषा में दक्ष होना अच्छी जॉब में हमेशा सहायक होता है, पर किसी फॉरेन
लैंग्वेज का ज्ञान करियर की दौड़ में आपको भीड़ से बहुत आगे निकाल देता है।
वैश्वीकरण के इस दौर में, एक से अधिक
भाषाएं जानने वालों की मांग तेजी से बढ़ती जा
रही है। खासकर भारत में, जो कि पूरी दुनिया में विभिन्न कंपनियों को अपनी सेवाएं दे
रहा है।
जरा गौर कीजिए कि किसी नए अनजान देश या प्रदेश में जाने पर आपकी पहली समस्या क्या
होती है? बेशक संवाद यानी कम्यूनिकेशन की समस्या आती है। स्थानीय लोगों से बातचीत
और काम के बीच संबंध स्थापित करने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। एक
समूह या कंपनी के स्तर पर भी ये समस्या वैसे ही बनी रहती है, जिसका एक ही इलाज है,
उस स्थान विशेष की भाषा का ज्ञान। ऐसे में भौगोलिक, व्यापारिक और सांस्कफढतिक
दूरियों को कम करने के लिए विदेशी
भाषा के जानकारों की मांग उतनी ही तेजी से बढ़ती
जा रही है। एक या दो विदेशी
भाषाओं पर गहरी पकड़ बनाने के बाद आप मनोरंजन, टूरिज्म,
एविएशन, अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों, दूतावास, डिप्लोमैटिक सर्विस, पत्रकारिता एवं
जनसंपर्क, शिक्षण संस्थान, प्रकाशन संस्थान और बीपीओ वगैरह के क्षेत्र में करियर की
शुरुआत कर सकते हैं। यहां आप बतौर अनुवादक, दुभाजिाया, कंटेंट राइटर्स,
ट्रांसक्रिप्टर आदि काम कर सकते हैं। आप चाहें तो अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए इसे
पार्टटाइम जॉब के तौर पर भी अपना सकते हैं।जरूरी योग्यता/मौजूदा कोर्स
फेरेन लैंग्वेज में मुख्यत तीन प्रकार के कोर्स उपलब्ध हैं सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और
डिग्री कोर्सेज। सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और एडवांस डिप्लोमा पार्टटाइम कोर्स हैं और
कई विश्वविद्यालयों (जैसे जेएनयू, दिल्ली विश्वविद्यालय, बीएचयू, विश्वभारती आदि)
और प्राइवेट संस्थानों द्वारा करवाए जाते हैं। सर्टिफिकेट कोर्स के लिए न्यूनतम
योग्यता 12वीं होती है, जबकि डिप्लोमा के लिए उस
भाषा में सर्टिफिकेट जरूरी होता
है। इंटिग्रेटिड मास्टर कोर्स पांच
वर्षीय होता है, जिसके लिए ग्रेजुएट होना जरूरी
है। इसके अलावा आप विदेशी
भाषा में स्नातकोत्तर डिग्री, एम फिल और पीएचडी भी कर
सकते हैं।
इन भाषाओं की है मांग
विदेशी भाषाओं में चाइनीज, जैपनीज, स्पेनिश, फ्रेंच, जर्मन, रशियन, कोरियन, अरेबिक
और इटैलियन भाषा की ज्यादा मांग है।
कमाई ही कमाई
कमाई की कोई निश्चित सीमा नहीं है, क्योंकि यह काम के स्वरूप और जगह पर निर्भर है।
बतौर अनुवादक आप 100-150 रुपए प्रति पेज और बतौर दुभाजिाया 200-500 रुपए प्रति घंटे
कमा सकते हैं। एक अच्छा दुभाजिाया 2-4 हजार प्रति घंटा तक भी कमा सकता है। हालांकि
यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी
भाषा पर अपनी पकड़ बनाने के लिए कड़ी मेहनत,
अध्ययन और निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है, इसलिए यहां तक पहुंचने के लिए धैर्य और
निरंतरता बेहद जरूरी है।
रोजगार की संभावनाएं
विदेशी भाषा सीखने के बाद आप
ट्रांसलेटर या इन्टरप्रेटर के रूप में फ्रीलांस तो काम
कर ही सकते हैं साथ ही बहुराष्ट्रीय कंपनियों, सरकारी विभागों, दूतावासों आदि में
स्थायी नौकरी भी प्राप्त कर सकते हैं। यूएनओ, वर्ल्ड बैंक, यूनिसेफ जैसे
अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में भी लैंग्वेज एक्सपर्ट्स के लिए काफी जॉब्स हैं। इसके
अलावा पर्यटन और होटल
इण्डस्ट्री में भी अनगिनत अवसर हैं। अनुवादक का काम पब्लिशिंग
हाउस, रिसर्च सेंटरों, सरकारी संस्थानों, विदेश मंत्रालय और दूतावासों में होता है।
इसके अलावा भारत में अभी लैंग्वेज टीचर्स की भारी कमी है चाहे वो प्राइवेट संस्थान
हों या सरकारी कॉलेज और यूनिवर्सिटीज, जिसके लिए भारी संख्या में शिक्षकों की
आवश्यकता होगी।
2010 में खुलेगा नौकरियों का पिटारा
अगर आंकड़ों की मानें तो इस साल के अंत तक दिल्ली में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के
दौरान विदेशी
भाषा के जानकारों के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। इस दौरान अलग-अलग देशों
से करीब 20 लाख विदेशी सैलानियों के भारत आने की उम्मीद है। लिहाजा सरकार ने दिल्ली,
उत्तरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान समेत देश के उत्तरी हिस्सों के लिए दस
भाषाओं के 1400 पार्टटाइम गाइड्स की भर्ती का ऐलान कर दिया है। इसमें चाइनीज,
रशियन, कोरियन, जर्मन, फ्रेंच, जैपनीज, स्पेनिश और अरबी
भाषाएं शामिल हैं। इनमें
भी एक से ज्यादा विदेशी
भाषा जानने वालों को वरीयता दी जाएगी।
मुख्य शिक्षण संस्थान
- स्कूल ऑफ लैंग्वेजज, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
- दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली
- भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली
- एंबेसी ऑफ जापान, नई दिल्ली
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वास्तु में बनायें सुनहरा भविष्य
आजकल प्रत्येक शहर में तेजी से हो रहे विकास कार्यों व निर्माण कार्यों के चलते
वास्तुविदों् की मांग व महत्ता काफी अधिक बढ़ गई है। कुछ विभागों में वास्तुविदों्
की मांग नियमित रूप से बनी रहती है। उनके बिना इन विभागों का कार्य पूरा नहीं होता।
वास्तुशास्त्र से बनाया गया भवन सुख, शांति व वैभव प्रदान करता है। वास्तुविद का
कार्य विविधापूर्ण, रचनात्मक व रोचक होने के साथ अच्छी आय प्रदान करने वाला है। इस
कार्य की ओर स्त्राr-पुरुजा दोनों
आकर्षित हो रहे हैं। लड़कियों के लिए यह कार्य
अत्यंत शालीन एवं सफजनात्मक होने से उनका रुझान तेजी से बढ़ रहा है। आप भी इसमें
कॅरियर बनाएं, पैसा व वैभव दोनों कमाएं और दूसरों को भी खुश रखें।
आर्किटेक्ट यानी वास्तुविद् का कार्य, मतलब वास्तुकला एक कला तो है, साथ ही इसे
विज्ञान भी कहा जा सकता है। यह वास्तव में मानव जीवन के हर पहलू से संबंध रखता है।वास्तुविद् का कार्य
शहरी व क्षेत्रीय प्रदेशों की योजना बनाना, जमीन तथा आसपास के वातावरण को समझना, उस
स्थान की प्राथमिक आवश्यकताओं का अध्ययन कर उन्हें पूरा करना, अभियांत्रिकी
सिद्धांतों व प्रयोग में आने वाली सामग्री का चयन कर शहर का सुंदरीकरण, राजमार्गों
का निर्माण व सुधार आदि वास्तुविद् के कार्यों में प्रमुख हैं।
प्रवेश योग्यता
वास्तुविद की स्नातक डिग्री को बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर (बी.आर्क) कहा जाता है। सीनियर
स्कूल सर्टिफिकेट अथवा 12वीं की परीक्षा कम से कम 60 फीसदी अंकों सहित विज्ञान व
गणित और अंग्रेजी के साथ उत्तीर्ण होना चाहिए।
प्रवेश परीक्षा के लिए
विषय
प्रवेश परीक्षा में प्रथम टेस्ट सामान्य ज्ञान व आई.क्यू. (सामान्य ज्ञान) से
संबंधित होता है। परीक्षा का उद्देश्य छात्र की सामाजिक जागरुकता व स्कूली
विषयों
के ज्ञान को जानना होता है। परीक्षा में ऑबजेक्टिव टाइप के प्रश्न पूछे जाते हैं।
दूसरा प्रश्न पत्र अभिक्षमता परीक्षा का होता है। इस परीक्षा में छात्र का
सफजनात्मक ज्ञान, दृश्य एवं स्थान तथा सौन्दर्य शास्त्र का ज्ञान परखा जाता है।
परीक्षा में छात्र की कला की भी परख होती है, जिसमें छात्र को दिए गए
विषय पर स्वयं
चित्र बनाना होता है तथा सामने रखी वस्तु का चित्र भी बनाना होता है। सभी परीक्षाओं
का माध्यम अंग्रेजी होता है।
पाठ्यक्रम की अवधि
बी.आर्क का नया सत्र अगस्त के प्रथम सप्ताह में प्रारंभ होता है। स्कूल ऑफ प्लानिंग
एंड आर्किटेक्चर, इन्द्रप्रस्थ इस्टेट, नई दिल्ली में यह पाठ्यक्रम पांच
वर्ष का
है, जिसके पूरा होने पर बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर की उपाधि प्रदान की जाती है।
आर्किटेक्चर असिस्टेंटशिप के लिए डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी उपलब्ध है, जिसकी अवधि
सामान्यत तीन
वर्ष है। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता
मैट्रीकुलेशन है। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर (एम.आर्क) पीजी
डिप्लोमा व पीएचडी हैं। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की अवधि प्राय दो
वर्ष की ही होती
है। इसमें प्रवेश हेतु वास्तुशिल्प, सिविल अभियांत्रिकी में स्नातक होना अनिवार्य
है। वास्तुविद् की निजी प्रैक्टिस करने के लिए जो उम्मीदवार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ
आर्किटेक्ट्स के सदस्य हैं, काउंसिल ऑफ आर्किटेक्ट्स में अपना नाम रजिस्टर करा सकते
हैं। आर्किटेक्चर पाठ्यक्रम के पूर्णकालिक व अंशकालिक पाठ्यक्रम होते हैं।
पूर्णकालिक (फुल-टाइम) पाठ्यक्रम के डिग्री व डिप्लोमा पाठ्यक्रम की अवधि पांच
वर्ष
है। इसमें 10 सेमेस्टर होते हैं। प्राय एक सेमेस्टर 16 सप्ताह का होता है। इसमें 6
माह का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी शामिल है, जो एक सेमेस्टर के रूप में किसी प्रोफेशनल
के ऑफिस में होता है। अंशकालिक (पार्ट-टाइम) पाठ्यक्रम की अवधि सात
वर्ष है।
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम
एक वास्तुविद् स्नातकोत्तर स्तर पर निम्न
विषयों में विशेषज्ञता हासिल कर सकता
है-
1. ग्रामीण डिजाइन 2. भवन अभियांत्रिकी प्रबंधन 3. भू-दृश्य 4.
ट्रांसपोर्ट योजना 5.
गफह एवं वातावरण योजना 6. क्षेत्रीय योजना 7. वास्तुशिल्प शिक्षा 8. ग्रामीण योजना।
बैचलर ऑफ प्लानिंग पाठ्यक्रम
बी.आर्क की भांति ही बैचलर ऑफ फिजिकल प्लानिंग पाठ्यक्रम को स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड
आर्किटेक्चर, इन्द्रप्रस्थ एस्टेट, दिल्ली से किया जा सकता है। इस पाठ्यक्रम में
शहरों व गांवों की आधुनिक प्लानिंग से संबंधित पाठ्यक्रम होता है। पाठ्यक्रम के पूरा
होने पर वास्तुविद् अथवा इंजीनियर की भांति छात्र प्रोफेशनल प्लानर्स बन सकते हैं।
यह पाठ्यक्रम मानव संसाधन विकास मंत्रालय के शिक्षा विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त
है। फिजिकल प्लानिंग की बैचलर डिग्री के पश्चात् मास्टर्स डिग्री पाठ्यक्रम होता
है, जिसकी अवधि डेढ़
वर्ष होती है। इस डेढ़
वर्ष में तीन सेमेस्टर होते हैं। इस
पाठ्यक्रम में शहरी योजना, क्षेत्रीय योजना, वातावरण संबंधी योजना हासिल की जाती
है। इनमें से कुछ
विषय ऐसे हैं, जिनका पाठ्यक्रम पूरे
भारतवर्ष में स्कूल ऑफ
प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली-02 के अतिरिक्त कहीं नहीं है। मुख्य संस्थान
वास्तुविद् व योजनाकार के लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, 4, ब्लाक बी,
इन्द्रप्रस्थ इस्टेट, नई दिल्ली-11002 है। यह संस्थान
केन्द्रीय सरकार के अधीन है।
इस संस्थान की प्रवेश परीक्षा के केन्द्र सामान्यत संघ लोक सेवा आयोग, बाल भारती
स्कूल, मॉडर्न स्कूल आदि होते हैं। मई के दूसरे या तीसरे सप्ताह में इस परीक्षा का
विज्ञापन समाचार पत्रों में आता है। प्रवेश प्रार्थना पत्र व सूचना संस्थान के यूको
बैंक एक्सटेंशन काउंटर से राशि देकर प्राप्त किए जा सकते हैं। इस संस्थान में
अनुसूचित जाति के लिए 15 प्रतिशत, जनजाति के लिए 7.5 प्रतिशत, युद्ध में शहीद सैनिक
की विधवा व बच्चों व शारीरिक रूप से अक्षम छात्रों के लिए 5.5 फीसदी सीटें आरक्षित
हैं।
स्कॉलरशिप
यहां पर योग्य छात्रों को प्रतिमाह स्कॉलरशिप प्रदान की जाती है। अनुसूचित जाति के
छात्रों के लिए यह रकम अधिक होती है।
हॉस्टल सुविधा
दिल्ली से बाहर के छात्रों के लिए यहां हॉस्टल की सुविधा है। हॉस्टल के लिए मेस,
कमरे का किराया, बिजली, पानी आदि मिलाकर कुल खर्च शुरू में ही जमा करना होता है।
कुछ धन फर्नीचर के लिए जमा करना होता है, जो पाठ्यक्रम की समाप्ति पर वापस मिल जाता
है।
फीस व प्रवेश परीक्षा
यहां की फीस अन्य संस्थानों की तुलना में काफी कम है, लेकिन यहां की प्रवेश परीक्षा
काफी कठिन होती है। इसमें 50 प्रतिशत अंक आने पर प्रवेश योग्य समझा जाता है। प्रवेश
के वक्त छात्रों की शारीरिक फिटनेस की भी परीक्षा होती है। लिखित परीक्षा में आई
क्यू व एप्टीट्यूट टेस्ट होता है।
संस्थान
- चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर (बी.आर्क, एमआर्क), चंडीगढ़।
- सर जेजे कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर (बीआर्क, एमआर्क), मुम्बई।
- रुड़की यूनिवर्सिटी (बीआर्क, एमआर्क), रुड़की।
- गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर, टैगोर रोड, लखनऊ (उ.प्र.)।
- स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग (बीआर्क, एमआर्क), अन्ना यूनिवर्सिटी, सरदार
पटेल रोड, चैन्नई।
- माधव इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी एंड साइंस, जीवाजी यूनिवर्सिटी, ग्वालियर (म.प्र.)।
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