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              इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए अंक 194,वर्ष 23,जुलाई 2010
 
 
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करियर : जरा हट के

विडियो एडिटर

खुद गढ़ें अपने भविष्य की कहानी

वर्तमान समय में टेलीविजन हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया है, जिसमें धारावाहिक, फिल्म और न्यूज के द्वारा घर बैठे ही मनोरंजन के अलावा देश दुनिया के बारे में जानकारी भी मिलती रहती है। क्या आप जानते हैं इन धारावाहिक, फिल्म और न्यूज आदि अन्य टीवी कार्यक्रम के निर्माण में जितनी महत्वपूरर्ण भूमिका निर्देशक अथवा फोटोग्राफर निभाता है उतनाही महत्वपूर्ण योगदान वीडियो एडिटर का होता है। आप भी वीडियो एडिटर बनकर अच्छा नाम कमा सकते हैं।

वीडियो एडिटर का कार्य

वीडियो एडिटर का मुख्य कार्य मोशन पिक्चर, केबल तथा ब्रॉडकास्ट विजुअल मीडिया उद्योग के लिए साउंड ट्रैक, फिल्म तथा वीडियो का संपादन करना है। वीडियो एडिटर फिल्माए गए टेप में से विजुअल सीक्वेंस को सिलसिलेवार तरीके से जमाने के साथ-साथ दर्शकों को आकर्षित करने के लिए जो भी आवश्यक हो, ध्वनि संगीत तथा प्रभाव को जोड़ता है। यह वीडियो एडिटर के कौशल का कमाल होता है कि वह अंतिम उत्पाद की गुणवत्ता और प्रभाव का निर्धारण करता है। वीडियो एडिटर्स दृश्यों के विश्लेजाण, मूल्यांकन, उसे काटने-छांटने, जमाने या जोड़ने के लिए आधुनिकतम उपकरणों का उपयोग कर उत्पादन कर्मियों के साथ मिलकर काम करते हैं। सामान्यत वीडियो एडिटिंग उपकरणों तथा मशीनों की मदद से एडिटिंग अथवा संपादन का काम किया जाता है। डिजिटल या नॉन लिनियर एडिटिंग में सभी वीडियो और ऑडियो डाटा को हार्ड डिस्क पर ट्रांसफर कर लिया जाता है या किसी अन्य डिजिटल स्टोरेज डिवाइस पर स्टोर करने के बाद एडिटिंग के लिए उपलब्ध कई तरह के सॉप्टवेयर की मदद से एडिटिंग कर ली जाती है।

वीडियो एडिटर की विशेषताएं

वीडियो एडिटर की सफजनशीलता, तकनीकी कौशल तथा अनुभव एनिमेशन, ग्राफिक्स तथा स्पेशल इफेक्ट्स की मदद से कार्यक्रम को फाइनल टच देने में मदद करती है। इस तरह वीडियो एडिटर को तकनीकी रूप से प्रवीण होना चाहिए। साथ ही उसे विभिन्न किस्मों के एडिटिंग सॉप्टवेयर के साथ-साथ सौंदर्यात्मक दृश्य बोध का अच्छा ज्ञान तथा यथोचित फिल्मांकित वीडियो डाटा का चयन कर विचारों और संदेशों को कलात्मक ढंग से प्रस्तुत करने का अनुभव होना चाहिए।

वीडियो एडिटर के रूप में कॅरियर

वीडियो एडिटिंग में कॅरियर बनाने के लिए किसी तरह के विशिष्ट शैक्षणिक ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि वीडियो एडिटिंग का कोर्स अथवा टेलीविजन तथा फिल्म में डिप्लोमा/डिग्री करने से इच्छुक युवा संपादन की बुनियादी अवधारणाओं को समझने लायक बन जाता है तथा उसे इस कार्य में लगने वाले अलग-अलग तरह के सॉप्टवेयर का तकनीकी ज्ञान भी हो जाता है। किसी भी विषय के छात्र इस क्षेत्र को अपना सकते हैं। सबसे जरूरी यह है कि इसके लिए सफजनशीलता मुख्य आवश्यकता है। विषय को समझने का ज्ञान, कल्पनाशीलता तथा टीम भावना के साथ टीम के हिस्से के रूप में कार्य करने की योग्यता अच्छा वीडियो एडिटर बनने के लिए आवश्यक है। इसी तरह कम्प्यूटर की सामान्य साक्षरता तथा डिजिटल उपकरणों के साथ काम करने का एप्टीट्यूट भी महत्वपूर्ण है।

पारिश्रमिक

वीडियो एडिटिंग में कॅरियर आरंभ करने पर शुरुआत में 10 से 15 हजार पारिश्रमिक आसानी से मिल जाता है। जो इस क्षेत्र में लगातार काम करते हुए पर्याप्त अनुभव प्राप्त कर लेते हैं तो उनका पारिश्रमिक बढ़कर 25 से 50 हजार प्रतिमाह तक पहुंच जाता है। कुछ स्वतंत्र वीडियो एडिटर ऐसे भी हैं जो प्रति एपिसोड लाखों रुपए तक कमा रहे हैं। कुछ अच्छे एडिटर आगे चलकर अच्छे निर्देशक भी साबित हुए हैं इसलिए यदि आपको इस क्षेत्र में दिलचस्पी है तथा आप स्टुडियो में फिल्म निर्माण में महीनों और वर्षों का समय गुजारने की इच्छा रखते हैं तो वीडियो एडिटर के रूप में आप निश्चित ही एक ग्लैमरस कॅरियर का चयन कर सकते हैं। इस क्षेत्र में सफल होने के लिए जरूरी है कि आप थोड़ा धैर्य रखें।

छोटी कोशिश, बड़ी सफलता
डेमो स्थनीय बचपन में अटक-अटक कर बोलते थे और बोलते समय उनका चेहरा विकफढत हो जाता था। अपने शारीरिक दोषों को दूर करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। उन्होंने शीशे में देखकर बोलने और हकलाहट दूर करने के लिए मुंह में पत्थर रखकर बोलने का अभ्यास किया। कोशिश काम आई और वे महानतम वक्ता बने।

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आव़ाज को बनायें कमाई का जरिया

पेरेंट्स की बढ़ती जागरूकता के कारण स्पीच थेरेपिस्ट की मांग भी बढ़ने लगी है। इस क्षेत्र के इच्छुक स्पीच पैथोलॉजी एंड ऑडियोलॉजी में बीएससी और एमएससी पाठ्यप्रम कर सकते हैं। दक्ष लोगों की कमी के कारण देशभर के विभिन्न अस्पतालों में स्पीच थेरेपिस्ट के पद खाली पड़े हुये हैं। स्पीच थेरेपी उनके लिए बेहतर करियर विकल्प के तौर पर उभरा है, जो पैरामेडिकल साइंसेज में रुचि रखते हैं।

पहले जहां लोग हकलाने, आवाज बदलने जैसी समस्याओं को नजरअंदाज कर देते थे, वहीं अब इस मानसिकता में आ रहे बदलावों के कारण बड़े पैमाने पर स्पीच थेरेपिस्ट और स्पीच पैथालॉजिस्ट की मांग की जा रही है।

जरूरी योग्यता

ऑडियोलॉजी और स्पीच पैथोलॉजिस्ट के तौर पर काम करने के इच्छुकों के लिए इस विषय में बैचलर और मास्टर डिग्री रखने के अलावा इंडियन स्पीच एंड हीयरिंग एसोसिएशन या रिहैबिलेशन काउंसिल ऑफ इंडिया से सदस्यता हासिल करना जरूरी है। अंडर ग्रेजुएट कोर्स में दाखिले के लिए बारहवीं में साइंस विषयों की पढ़ाई जरूरी है। डिप्लोमा कोर्सेज का संचालन भी किया जाता है। बीएससी इन स्पीच एंड हियरिंग कोर्स की अवधि तीन साल है। पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में दाखिले के लिए स्पीच लैंग्वेज पैथॉलॉजी में ग्रेजुएशन होना जरूरी है। शैक्षिक योग्यता के अतिरिक्त इस क्षेत्र के जानकारों के लिए लक्षणों को पहचानने, रिकॉर्ड संभालने और फोकस करने की विशेष योग्यता होनी चाहिए। चूंकि इलाज में लंबा समय लग जाता है, ऐसे में प्रभावी तकनीक विकसित करते हुए धैर्य के साथ बच्चे व अभिभावकों के साथ मिलकर काम करने का कौशल होना जरूरी है।

कार्यक्षेत्र

स्पीच थेरेपिस्ट बोलने संबंधित गड़बड़ियां, प्लूंसी डिसऑर्डर, लैंग्वेज और वॉयस डिसऑर्डर जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए प्रभावी तकनीकों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हैं। ऑडियो मीटर, कम्प्यूटर और अन्य तकनीकी विधियों की मदद से ये अपना काम करते हैं। स्पीच थेरेपिस्ट का काम उच्चारण में गड़बड़ी, शब्दों का दुहराव, बोलते-बोलते अटक जाना, लड़के की जगह लड़की की तरह आवाज निकलना आदि विकारों को दूर करने का होता है। इन दिनों स्कूल भी अभिभावकों को बच्चे में स्पीच संबंधी डिसऑर्डर को दूर करने के लिए स्पीच थेरेपिस्ट को कंसल्ट करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। भले ही देश की सरकार का ध्यान स्पीच थेरेपी की ओर नहीं है, लेकिन यह क्षेत्र देश और विदेश में रोजगार की दृष्टि से युवाओं के लिए उभरता हुआ करियर है। स्पीच पैथोलॉजिस्ट और ऑडियोलॉजिस्ट हालांकि अलग-अलग होते हैं, लेकिन इनका काम एक-दूसरे से काफी हद तक जुड़ा होता है। इसलिए इस क्षेत्र में जाने के इच्छुकों के लिए स्पीच पैथोलॉजी और ऑडियोलॉजी में बीएससी और एमएससी स्तर पर कोर्सेज का संचालन किया जाता है।

रोजगार के अवसर

इस क्षेत्र में पढ़ाई करने के बाद आप किसी अस्पताल में प्रेक्टिस करने के अलावा कॉलेजों में पढ़ाने का काम भी कर सकते हैं। कई सरकारी या निजी संस्थानों में स्पीच थेरेपिस्ट के लिए अलग से नियुक्ति की जाती है। दक्ष लोगों की कमी के कारण कई बड़े अस्पतालों में स्पीच थेरेपिस्ट के पद खाली पड़े हैं। स्पीच थेरेपिस्टों के लिए विदेशों में भी काम करने के अवसर हैं। अनुभव और प्रोफेशनल क्वालीफिकेशन के आधार पर इस क्षेत्र में आप नाम और दाम दोनों कमा सकते हैं।

प्रमुख संस्थान

  • ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नई दिल्ली

  • पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़

  • ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट स्पीच एंड हीयरिंग, मैसूर यूनिवर्सिटी
     

सम स्मार्टीज
  • ब्लॉग : ब्लॉगिंग अपनी बात कहने का प्लेटफॉर्म देता है। अपनी जानकारियों को दूसरों से बांटने और चर्चा करने के साथ कभी भी अकेलापन महसूस नहीं होने देता।
  • वीओवाईफाई : वायरलेस की खासियत के साथ वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल आवाज को सर्किट-िस्वच कनेक्शन की जगह डेटा पैकेट की मदद से भेजता है ताकि इंटरनेट युक्त मोबाइल, लेपटॉप या पीसी पर काम करते हुए बात, फाइल शेयरिंग, फैक्स, मोबाइल पर मैसेज भी कर सकें।
  • वेब कोलेबोरेशन : वेब कोलेबोरेशन का पैकेज और अलग-अलग कम्युनिकेशन टूल्स बैक-एंड सॉप्टवेयर या सर्विस वाला है, ताकि आप अपने पसंदीदा यूजर्स के बीच वेब पेज शेयर, सेव, ऑर्गेनाइज या कॉफ्रेंस और सेमिनार कर सकें। साथ में वॉइस और टेक्स्ट चैट कर सकें।
  • ब्लैकल : blackle.com का बैकग्राउंड काला है। वजह है जब भी नेट सर्फिंग करें थोड़ी ऊर्जा बचाई जा सके। इंटरनेट सर्च इंजन की दुनिया में सबसे बड़े नाम गूगल ने इस साइट को बनाया है ताकि जितनी बार इस साइट पर सर्च किया जाएगा उतनी बार गूगल की खास क्षमता के साथ ऊर्जा की बचत का फायदा मिलता है।
  • मोब्लॉग : मोबाइल और वेबलॉग से मिलकर बनी टेक्नॉलॉजी में कैमरा युक्त सेलुलर या पीडीए के जरिए जिंदगी के हर छोटे-बड़े पल को इंटरनेट पर अपडेट कर सकते हैं। फोन और पीसी की मदद से की जाने वाली नेटवर्किंग की बदौलत आप कभी भी अकेले नहीं रहते।

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हेयर स्टाइलिस्ट बन संवारें प्यूचर

आज देश में महिलाएं व पुरुजा ही नहीं युवा भी बालों की समस्या से ग्रस्त हैं, इसलिए इस क्षेत्र के विशेषज्ञों की बहुत मांग है। हालांकि युवाओं के लिए यह क्षेत्र नया विकल्प बनकर उभर रहा है, लेकिन भविष्य में इस क्षेत्र में रोजगार की काफी अच्छी संभावनाएं मौजूद हैं। यदि आप भी टिःकोलॉजिस्ट बनकर बालों की देखभाल करना चाहते हैं या आपको इस क्षेत्र में इंट्रैस्ट हो तो यह विकल्प सबसे बेहतर है।

ब्यूटी कल्चर अब बहुत अधिक वैज्ञानिक और तकनीकी बन गया है। टिःकोलॉजी का नया क्षेत्र इसी का प्रमाण है। यह ऐसा विज्ञान है, जो बालों और सिर की त्वचा की समस्याओं पर अध्ययन करता है। इस क्षेत्र में ट्रैनिंग कोर्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि बाल गिरना, गंजापन, खुजली और बालों की गुणवत्ता वगैरह समस्याओं का स्थायी और बेहतर निदान किया जा सके।
स्वास्थ्य और रोग निदान के क्षेत्र में यह विज्ञान मूलत कपाल यानी सिर की त्वचा और बालों से संबंधित होता है। विदेशों में इस विषय का व्यावसायिक रूप से उपयोग बहुत पहले से किया जा रहा है। हेयर केयर में टिःकोलॉजी विशेषज्ञों के लिए नए अवसर बन रहे हैं। इस क्षेत्र में बढ़ती मांग का अंदाजा आप इसी से लगाएं कि ग्लैमर नगरी मुंबई में इसका कोर्स उपलब्ध कराने वाले संस्थान तेजी से खुल रहे हैं।

रोजगार की संभावना

आने वाले समय में टिःकोलॉजी बेहतर हेयर ट्रीटमेंट के लिए एक अनिवार्य योग्यता बन जाएगी। इसके अलावा कॉस्मेटिक उत्पादन करने वाली विभिन्न कंपनियों में भी टिःकोलॉजिस्ट के लिए अवसर बनेंगे। इसके लिए जाहिर सी बात है कि आपको टिःकोलॉजी में प्रोफेशनल कोर्स करना पड़ेगा। आप चाहें तो इंटरनेशनल टिःकोलॉजी एसोसिएशन के सदस्य बन सकते हैं। अपने देश में भी अब जगह-जगह टिःकोलॉजी में कोर्स कराए जा रहे हैं। यह प्रोफेशनल ट्रैनिंग ब्यूटीशियन के तौर पर आपको अलग ही प्रतिष्ठा दिलाएगी।

जरूरी योग्यता

आमतौर पर टिःकोलॉजी में उपलब्ध कराए जाने वाले कोर्सेज की अवधि तीन माह से लेकर आठ माह तक की है। सर्टिफिकेट कोर्स और डिग्री प्रोग्राम भी उपलब्ध हैं। इन कोर्सेज में ग्रेजुएट्स, ब्यूटीकल्चर या मेडिकल क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति प्रवेश ले सकते हैं।

बेहतर इलाज के विकल्प

टिःकेलॉजी नैचुरोपैथी और परंपरागत पश्चिमी औजाधियों के बीच सूत्र का काम करती है। इस विज्ञान के कारण सिर की त्वचा और बालों से संबंधित बीमारियों के बेहतर इलाज को लेकर कई विकल्प प्राप्त हो सकते हैं। दरअसल बाल और सिर की त्वचा हमारे शरीर का ही हिस्सा होते हैं। हमारे शरीर में आई कोई भी कमी या समस्या इनमें किसी न किसी लक्षण के रूप में प्रकट होती है। यही इसकी चुनौती है।

आमदनी

आज बालों की समस्या से सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं युवा भी चिंतित हैं, इसलिए वे भी अपने बालों को सुरक्षित रखने के लिए बालों का ट्रीटमेंट करवाते हैं। तो जाहिर सी बात है कि इसमें आप प्रतिमाह मनचाही कमाई कर सकते हैं, मसलन कि शुरुआती तौर पर आप 15 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह आसानी से कमा सकते हैं। अनुभव बढ़ने के साथ-साथ आपकी कमाई भी दोगुना हो जाएगी।

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