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              इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए अंक 194,वर्ष 23,जुलाई 2010
 
 
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प्रतियोगी परीक्षाएं : सुरक्षित भविष्य की चाबी

सिविल सेवा : साहस का इम्तिहान

किसी भी विषय में स्नातक और अगस्त को से वर्ष की आयु का युवा सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में शामिल हो सकता है। ऊपरी आयु सीमा में अजा/अजजा के उम्मीदवारों को साल, अन्य पिछड़े वर्ग और प्रतिरक्षा सेवाओं में युद्ध के समय अपंग हुये व्यक्ति को साल और शारीरिक रूप से अशक्त उम्मीदवारों को साल तक की छूट दी जाती है। सामान्य वर्ग का उम्मीदवार अधिकतम चार बार और अन्य पिछड़े वर्ग का उम्मीदवार बार यह परीक्षा दे सकता है। अजा/अजजा के उम्मीदवारों के लिये अवसरों की संख्या असीमित है।

  • प्रारंभिक परीक्षा हर साल लगभग मई के तीसरे सप्ताह और मुख्य परीक्षा अक्टूबर/नवम्बर में आयोजित की जाती है।

  • 2300 अंकों (साक्षात्कार तथा मुख्य परीक्षा) के आधार पर ही अंतिम मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है। इसमें अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं के (300+300) अंक सम्मिलित नहीं किए जाते, ये पेपर मात्र क्वालिफाइंग होते हैं।

  • प्रारंभिक परीक्षा : लगभग 3.5 लाख उम्मीदवार आवेदन करते हैं लेकिन 50 प्रतिशत के आसपास ही परीक्षा में भाग लेते हैं।

  • साक्षात्कार : कुल रिक्तियों के 3 गुना यानी लगभग 1,200 ही साक्षात्कार का सामना करते हैं।

शक्ति और सुरक्षा की ओर

सिविल सेवा आकर्षित करती है क्योंकि...

  • पद, प्रतिष्ठा, सामाजिक सम्मान, मर्यादा और संभावना का अनोखा मिश्रण केवल यहीं मिलता है।

  • सुविधा, सुरक्षा, सत्ता और अधिकार के समावेश को हर कोई अपनाना चाहता है।

  • सेवा संतुष्टि, कार्य विविधता, चुनौतियां और नए-नए संघर्ष जीवन में गतिशीलता भरते हैं।

  • अपार संभावनाओं के साथ, सर्वकालिक एवं सार्वभौमिक महत्व की सर्वोच्च परीक्षा है।

  • दायित्व निर्वाह, क्षमता, अधिकार और कर्त्तव्य की व्यापकता के प्रतिमानों पर खरी उतरने वाली एकमात्र सेवा है।

  • देश के लिए नीति निर्माण और निर्णयों में भागीदारी किसी अन्य सेवा से संभव नहीं।

  • समाज सेवा के लिए गरिमामय आधार और जनसेवा का सर्वाधिक सशक्त माध्यम है।

  • अपने प्रयासों से लोगों के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।

जब बात कॅरिअर से जुड़े पहले विकल्प के बारे में की जाए तो तेजी से बढ़ता निजी क्षेत्र अपनी मोटी तनख्वाह और पांच सितारा सुविधाओं के बावजूद सिविल सेवा का मुकाबला नहीं कर सकता। सिविल सेवा आज भी भारतीय युवाओं की पहली पसंद है। एसोसिएटेड चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इण्डस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) द्वारा करवाए गए सर्वे के अनुसार इसकी वजह है इससे जुड़े दृश्य और अदृश्य लाभ, सामाजिक प्रतिष्ठा और सुरक्षित भविष्य। इसके साथ ही यह बात भी गलत साबित हुई है कि नए क्षेत्रों में नौकरी की अपार संभावनाओं के कारण केवल दूसरे दर्जे के प्रतिभाशाली लोग ही सिविल सेवा के लिए आवेदन करते हैं। इतना ही नहीं लगभग 300 युवा एग्जीक्यूटिव जिन्हें कई बड़ी कम्पनियों में प्लेसमेंट मिला उनमें से 80 प्रतिशत ने सिविल सर्विस में जाने को प्राथमिकता दी और इसकी वजह के रूप में 70 प्रतिशत एग्जीक्यूटिव ने स्वीकार किया कि प्राइवेट सेक्टर पैसों से लाद देने के बावजूद सुरक्षित भविष्य की गारंटी नहीं देता, जबकि सिविल सेवा की सबसे बड़ी ताकत यही सुरक्षा है।

पहला पायदान

इसके तीन चरणों में सबसे निचले पायदान पर प्रारंभिक परीक्षा आती है। यह मात्र क्वालिफाइंग परीक्षा है और इसका आयोजन उन उम्मीदवारों की खोज के लिए किया जाता है, जो दूसरे पायदान यानी मुख्य परीक्षा में बैठने के योग्य हों। मुख्य परीक्षा तक पहुंचने के लिए प्रारंभिक परीक्षा की सीढ़ी को पार करना जरूरी है, जो दो हिस्सों (पेपर) में बंटी है।
पहला पेपर सामान्य अध्ययन और दूसरा पेपर कृषि विज्ञान, पशुपालन और पशु चिकित्सा विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, रसायन विज्ञान, सिविल इंजीनियरी, वाणिज्यशास्त्र, अर्थशास्त्र, विद्युत इंजीनियरी, भूगोल, भू-विज्ञान, भारतीय इतिहास, विधि, गणित, यांत्रिक इंजीनियरी, चिकित्सा विज्ञान, दर्शनशास्त्र, भौतिकी, राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन, समाजशास्त्र, सांख्यिकी, प्राणी विज्ञान आदि ऐच्छिक विषयों में से चुने गए किसी एक विषय का होता है।
सामान्य अध्ययन के पेपर को इस तरह से तैयार किया जाता है कि इसमें सामान्य विज्ञान, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, भारतीय इतिहास, राष्ट्रीय आंदोलन, भारत और विश्व का भूगोल, भारत की राजव्यवस्था, अर्थव्यवस्था, सामान्य मानसिक योग्यता आदि विषयों से जुड़ा कोई भी क्षेत्र अछूता न रहे और उम्मीदवार के सामान्य ज्ञान की खरी परख हो सके। सामान्य विज्ञान के प्रश्न विज्ञान की सामान्य समझ, रोजाना के अनुभव आदि पर आधारित होते हैं, जिनकी अपेक्षा एक वैज्ञानिक विषयों का विशेष अध्ययन न किए शिक्षित व्यक्ति से की जा सकती है। सम-सामयिक घटनाओं में महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं से संबंधित प्रश्न होते हैं, जो इस बात का परीक्षण करते हैं कि उम्मीदवार की दिन-प्रतिदिन की घटनाओं पर कितनी पकड़ है। भारतीय इतिहास में विषय की व्यापक सामान्य जानकारी के साथ इसके सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक पहलुओं पर विशेष बल दिया जाता है। भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में उन्नीसवीं शताब्दी के नए उभार की प्रवफत्ति और स्वरूप, राष्ट्रीयता का विकास और स्वतंत्रता प्राप्ति से संबंधित प्रश्न होते हैं। वहीं भूगोल में भारतीय भूगोल को खास महत्व दिया जाता है। इसमें देश के भौतिक, सामाजिक और आर्थिक भूगोल से संबंधित प्रश्न होते हैं, जिनमें भारतीय कृषि और प्राकफढतिक संसाधनों की प्रमुख विशेषताएं सम्मिलित हैं। भारत की राजव्यवस्था और अर्थव्यवस्था में देश की राजनीतिक प्रणाली, भारत का संविधान, पंचायती राज, सामाजिक व्यवस्था, भारत के आर्थिक विकास और कृषि से संबंधित ज्ञान का परीक्षण होता है। सामान्य मानसिक योग्यता में अभ्यर्थी की तार्किक और विश्लेजाणात्मक योग्यता को परखा जाता है। कुल मिलाकर प्रारंभिक परीक्षा के पहले पेपर को इस तरह तैयार किया जाता है कि दो घंटे में परिक्षार्थी के ज्ञान के हर पहलू का सटीक आकलन हो सके। ऐच्छिक विषयों का पाठ्यक्रम यूपीएससी द्वारा निर्धारित किया जाता है जो परीक्षा की सूचना के साथ प्रकाशित होता है। सामान्यतया ऐच्छिक विषयों के पाठ्यक्रम की सामग्री डिग्री स्तर की होती है, दूसरे पेपर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आपके किसी विशेष विषय से संबंधित ज्ञान की थाह लेता है। इसका मुख्य उद्देश्य चुने गए विषय पर आपकी गहनता और वैचारिक क्षमता की जांच करना होता है। ये दोनों ही पेपर ऑब्जेक्टिव प्रकार के होते हैं। यानी हर एक प्रश्न में चार-चार विकल्प दिए होते हैं और उम्मीदवार को ए, बी, सी और डी में से कोई एक चुनना होता है। ये पेपर हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होते हैं जिनमें उम्मीदवार कोई एक माध्यम चुन सकता है। संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2007 से एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए इन दोनों प्रश्न-पत्रों में नेगेटिव मार्किंग शुरू कर दी है यानी अब प्रश्न का गलत उत्तर देने पर उस प्रश्न के लिए निर्धारित अंकों में से एक तिहाई अंक आपके स्कोर में से दंडस्वरूप काट लिए जाते हैं। उत्तर न दिए जाने वाले प्रश्नों के अंक दंडस्वरूप नहीं काटे जाते।
यूपीएससी के चेयरमैन के अनुसार 'नेगेटिव मार्किंग इस परीक्षा में अटकलबाजों को हतोत्साहित करने के लिए शुरू की गई है। पहले अटकलबाजी का सहारा लेकर शौकिया या तुक्केबाज सफल हो जाते थे, जबकि मेधावी और गंभीर उम्मीदवार पिछड़ जाते थे। नेगेटिव मार्किंग न होने का यह सबसे बड़ा नुकसान था। इसे उदाहरण के साथ समझते हैं कि माना कोई उम्मीदवार सामान्य अध्ययन के पेपर के 50 प्रश्नों के उत्तर जानता है और शेजा 100 का ए, बी, सी या डी में से कोई भी एक विकल्प चुनकर उत्तर पुस्तिका में भर देता है, तो उसके सही उत्तरों की प्रोबेबिलिटी 25 होने के कारण कुल सही उत्तर (50+25) 75 होने से वह 60 सही उत्तर जानने वाले से बेहतर स्थिति में होता है। इस तरह एक तुक्केबाज गंभीर अभ्यर्थी से अधिक अंक प्राप्त करने में सफल हो जाता था। लेकिन नेगेटिव मार्किंग से इस संभावना पर काफी हद तक लगाम कसी जा सकेगी।'

दूसरा पायदान

आमतौर पर प्रारंभिक परीक्षा में अधिकतम अंक हासिल करने वाले संघ लोक सेवा आयोग की कुल रिक्तियों के 12 या 13 गुणा उम्मीदवार ही मुख्य परीक्षा में भाग लेने के पात्र घोजिात किए जाते हैं। यहां पर 9 चक्रव्यूहों को तोड़ना पड़ता है। इन चक्रव्यूहों को एक शब्द में लिखित परीक्षा कहते हैं। लिखित परीक्षा में कुल 9 पेपर होते हैं। पहला पेपर 300 अंक का संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में से उम्मीदवार द्वारा चुनी गई किसी एक भारतीय भाषा का होता है। दूसरा पेपर 300 अंक का अंग्रेजी भाषा का होता है। ये दोनों पेपर मैट:ाrकुलेशन स्तर के होते हैं और दोनों को सिर्फ क्वालिफाई करना होता है। इनके अंकों को योग्यता क्रम निर्धारण में नहीं गिना जाता, लेकिन इनमें आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम अंक पाने के बाद ही अन्य पेपरों का मूल्यांकन किया जाता है। अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड और सिक्किम राज्यों के उम्मीदवारों के लिए भारतीय भाषाओं से संबंधित पेपर जरूरी नहीं होता है। तीसरा पेपर 200 अंक का होता है, जिसमें दिए हुए विषयों में से किसी एक विषय पर निबंध लिखना होता है।
चौथा और पांचवां पेपर सामान्य ज्ञान से संबंधित होता है। प्रत्येक के लिए 300 अंक निर्धारित हैं। इसके अलावा चार पेपर ऐच्छिक विषयों की सूची में से चुने गए किन्हीं दो विषयों के होते हैं। एक विषय के दो पेपर होते हैं और हर एक 300 अंक का होता है। इस तरह मुख्य परीक्षा कुल 2600 अंकों की होती है, लेकिन इसके 2000 अंक ही अंतिम योग्यता सूची में सम्मिलित किए जाते हैं। मुख्य परीक्षा के ऐच्छिक विषयों में प्रारंभिक परीक्षा के विषयों के अलावा नफविज्ञान (एंथ्रोपॉलॉजी), प्रबंध और कुछ भाषाओं के साहित्य और जुड़ जाते हैं, जबकि भारतीय इतिहास का दायरा बढ़ कर इतिहास, राजनीति विज्ञान से राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध और वाणिज्यशास्त्र से वाणिज्यशास्त्र और लेखाविधि हो जाता है। मुख्य परीक्षा के सभी ऐच्छिक विषयों का सिलेबस भी अलग से विज्ञप्ति के साथ ही दिया जाता है।

तीसरा पायदान

प्रारंभिक परीक्षा और लिखित परीक्षा के बाद बारी आती है साक्षात्कार की। व्यक्तित्व परीक्षा पर आधारित यह परीक्षण पूरी तरह से अन्तरव्यक्तिक वार्तालाप यानी बातचीत पर आधारित होता है, जिसमें उम्मीदवार के ज्ञान के साथ उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व को परखा जाता है। यह 300 अंकों का होता है। यह एक बोर्ड द्वारा लिया जाता है, जिसके सामने उम्मीदवार का बायोडाटा रहता है। साक्षात्कार में मौटे तौर पर उम्मीदवार के बौद्धिक गुणों, सामाजिक लक्षणों, सामाजिक घटनाओं के प्रति रुचि, मानसिक सतर्कता, आलोचनात्मक समझ, स्पष्ट और तर्कसंगत प्रतिपादन की शक्ति, संतुलित निर्णय की शक्ति, रुचि की विविधता और गहराई, नेतफत्व, सामाजिक संगठन की योग्यता, बौद्धिक और नैतिक ईमानदारी आदि का मूल्यांकन किया जाता है।

आखिरी पड़ाव

इन तीनों पायदानों से गुजरने के तुंत बाद यूपीएससी द्वारा आखिरी पड़ाव की तैयारी शुरू कर दी जाती है। लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के 2300 अंकों के आधार पर आयोग मेरिट लिस्ट तैयार करता है और इस सूची में स्थान पाने वालों को आयोग मेरिट लिस्ट में स्थान और उम्मीदवारों द्वारा चाही गई वरीयता के आधार पर विभिन्न पदों पर नियुक्तियों के लिए रिकमंड (अनुशंसित) करता है, लेकिन अंतिम चयन प्रोबेशनरी पीरियड (जो आमतौर पर दो साल का होता है) के बाद ही किया जाता है। इस दौरान अभ्यर्थी के प्रदर्शन के संतोजाजनक न होने की स्थिति में या तो इसकी अवधि बढ़ा दी जाती है या उसे इस सेवा के लिए अयोग्य घोजिात कर दिया जाता है। केंद्रीय सेवा वर्ग 'क' के सभी परिवीक्षकों को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी, मसूरी में पांच महीने का फाउंडेंशन कोर्स करना होता है। इस कोर्स में अभ्यर्थियों को संविधान, संस्कफढति, अर्थनीति, लोक प्रशासन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी आदि का ज्ञान कराया जाता है। यह सामान्य कोर्स है और सिविल सेवकों की अंतर्दफष्टि में व्यापकता लाने के उद्देश्य से करवाया जाता है। इस कोर्स की समाप्ति के बाद परिवीक्षक को संबंधित मंत्रालयों द्वारा स्थापित विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों में विभागीय कार्यों के प्रशिक्षण के लिए भेज दिया जाता है।
आईएएस प्रोबेशनर्स के लिए लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी, मसूरी ही प्रशिक्षण अकादमी होने के कारण उन्हें वहीं रोक लिया जाता है, जबकि आईपीएस के लिए राष्ट्रीय अकादमी, हैदराबाद; राजस्व सेवा के लिए नेशनल अकेडमी ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज, नागपुर; अंकेक्षण और लेखा सेवा के लिए आईएएस ट्रैनिंग स्कूल, शिमला; रेलवे सेवा के लिए रेल्वे स्टाफ कॉलेज, बड़ोदरा; सूचना सेवा के लिए आईआईएमसी, नई दिल्ली आदि में विभागीय कार्यों की जानकारी दी जाती है। इन तीनों पायदानों की मदद से सही जगह के लिए सही व्यक्ति का चुनाव ही इस परीक्षा का उद्देश्य है। सिविल सेवा परीक्षा को इस तरह तैयार किया जाता है कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने यह परीक्षा पहले कभी दी है या नहीं, आप पढ़ाई में औसत छात्र रहे हैं या मेधावी, आप किसी प्रसिद्ध विश्वविद्यालय से पढ़े हैं या किसी ग्रामीण क्षेत्र के महाविद्यालय से, आप महिला हैं या पुरुजा। अगर आपने परीक्षा के पैटर्न को समझते हुए मेहनत के साथ इसकी तैयारी की है तो सफलता मिलना निश्चित है। हमेशा इस बात को याद रखें कि एक असफल और सफल प्रतियोगी में यही अंतर होता है कि सफल प्रतियोगी अपनी कमजोरियों को पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए सटीक व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाते हैं जबकि असफल बार-बार उन्हीं गलतियों को दोहराते रहते हैं। कुल मिलाकर यही वह तरीका है, जो आपको सफल बनाएगा।

कामयाबी के लिए जरूरी

  • सामूहिक अध्ययन

  • लक्ष्य केंद्रित तरीका

  • संक्षिप्त टिप्पणियां बनाना

  • फोकस विधि से अध्ययन

  • स्तरीय टेस्ट पेपर्स का हल

  • एप्लाइड भाग पर विशेष ध्यान

  • विश्लेजाणात्मक प्रवफत्ति का विकास

  • शत प्रतिशत क्षमता के साथ तैयारी

  • परामर्श, परिश्रम और प्रस्तुति पर ध्यान

अनुभव से सीखें

क्यों प्रारंभिक परीक्षा में कई बार यूनिवर्सिटी टॉपर्स भी असफल हो जाते हैं और सामान्य अभ्यर्थी टॉपर बन जाते हैं?
जितनी इस सेवा की गरिमा है उतनी ही इस सेवा के बारे में भ्रांतियां भी हैं, जिनसे निजात पाए बिना इसे पार करना मुश्किल है। इस स्थिति में यह जानना कि सफलता की रणनीति कैसी हो? क्या गलतियां एक अभ्यर्थी बार-बार करता है? क्यों प्रारंभिक परीक्षा में कई बार यूनिवर्सिटी टॉपर्स भी रह जाते हैं और सामान्य अभ्यर्थी टॉपर बन जाते हैं? कैसे विषयों का चुनाव किया जाए? और कब पढ़ाई शुरू की जाए?
ये सवाल व्यवहारिक तौर पर अभ्यर्थी को इसका सामना करने के लिए मजबूत बनाते हैं। अभ्यर्थी मानसिक रूप से इस परीक्षा के लिए अपने आपको तैयार करें। आत्मनिरीक्षण करके इन प्रश्नों का उत्तर खोजें। इसके बाद ही वह इस परीक्षा में बैठने का निश्चय करें। क्या वह इस परीक्षा में लगने वाले कुल समय (1.5 से 2 साल) के लिए पूरी तरह फ्री है। यानी उसके पास कठोर परिश्रम के लिए पर्याप्त समय है या नहीं? परीक्षा की प्रणाली लंबी (शुरू के प्रयासों में असफलता के बाद कई बार बहुत लंबी) है। क्या ऐसी स्थिति में वह पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक तीनों रूप से मजबूत बना रहेगा? क्या वह स्वयं मानसिक रूप से (हर हालात में कठोर परिश्रम करके सफल होना है) इस परीक्षा के लिए तैयार है? कहीं इस परीक्षा में बैठना आपके ऊपर थोपा तो नहीं जा रहा? यदि इन सभी प्रश्नों के उत्तर सकारात्मक हैं तो अभ्यर्थी इस परीक्षा के लिए अगला कदम उठाए अन्यथा नहीं।

गलतियां जो नाकाम कर सकती हैं
  1. बिना पूरी तैयारी के प्रारंभिक परीक्षा में बैठना - परीक्षा में मिलने वाले सीमित अवसरों में से आपका एक अवसर बेकार चला जाता है।

  2. अपनी रुचि और बैकग्राउंड के अनुसार विषय न लेकर केवल सफल अभ्यर्थी के विषय का अंधानुकरण करना - गलत विषय का चयन आपकी सफलता को प्रभावित करेगा।


  3. हमेशा उसी विषय का वैकल्पिक विषय के रूप में चयन करना, जो कि स्नातक स्तर पर केवल सतही स्तर तक पढ़ा है - विषय चयन के चरणों को देखें। कई बार स्नातक के विषयों के अलावा लिए गए विषयों ने बहुत बेहतर परिणाम दिए हैं।
     
  4. प्रारंभिक परीक्षा में समय सीमा (2 घंटे) का ध्यान रखना - आपका पेपर छूट सकता है। सारी मेहनत बेकार जा सकती है।
     
  5. प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य ज्ञान के पेपर को खंडों (इतिहास, भूगोल, गणित, सामयिकी) के अनुसार न पढ़ना - इसके बिना पूरे प्रश्नपत्र की संतुलित तैयारी नहीं हो सकती।
     
  6. प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य ज्ञान के प्रश्नपत्र में प्रश्नों के बदलते ट्रेड को ध्यान में रखना - वर्तमान में सबसे ज्यादा प्रश्न समसामयिकी खंड से पूछे जा रहे हैं, जबकि पहले इतिहास, भूगोल आदि से सर्वाधिक प्रश्न आते थे। इस बदलाव को ध्यान में नहीं रखेंगे तो नुकसान हो सकता है।
     
  7. वैकल्पिक एवं सामान्य अध्ययन दोनों पेपरों की तैयारी पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों का अभ्यास करके न करना - बिना पिछले प्रश्नपत्रों के अभ्यास के बहुत से टॉपिक (जिन्हें आप महत्वपूर्ण नहीं समझते हैं) छूट सकते हैं।
     
  8. प्रश्न में सबसे बड़ा, छोटा, सही, गलत, मुख्य, आरोही क्रम, अवरोही क्रम, गलत नहीं, सही नहीं आदि शब्दों को ध्यान से न पढ़ना - परीक्षा हॉल में समय के दबाव से इस तरह के शब्दों पर अभ्यर्थी कई बार ध्यान नहीं दे पाते, जिससे प्रश्न का पूरा मतलब ही बदल जाता है।
     
  9. सामान्य अध्ययन, इतिहास, भूगोल आदि का मानचित्र के अनुसार अभ्यास न करना - परीक्षा में मानचित्र पर प्रश्न आते हैं। यदि अभ्यास नहीं किया है तो सवाल आते हुए भी गलत हो सकता है।
     
  10. सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र में गणित वाले खंड में अधिक समय लगने वाले प्रश्न को अधिक समय देना - पहले उन प्रश्नों को हल करें जिनमें समय नहीं लगता है अन्यथा प्रश्नपत्र छूटने के पूरे अवसर बन जाते हैं।
     
  11. परीक्षा में पूरी नींद लेकर न जाना और उस दिन देर रात तक पढ़ते रहना - वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रणाली में यह सबसे घातक चरण है। इससे परीक्षा हॉल में आपका मस्तिजक सोता है और आप केवल शारीरिक रूप से उपस्थित होते हैं। इससे आपकी पूरी मेहनत बेकार जा सकती है।

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रेलवे के साथ तय करें
जिंदगी का सफर

भारतीय रेलवे की नई योजनाएं और विस्तार नीतियां इसके दुनिया के सबसे बड़े नियोक्ता होने की बात पुख्ता करती नजर आती हैं। संभावनाएं हैं कि भारतीय रेल का यह क्रम आगे भी जारी रहेगा।

सन् 1853 में ब्रिटिश राज में शुरू भारतीय रेलवे दुनिया की सबसे बड़ी नियोक्ता है। आज अपने 14,06,430 कर्मचारियों (2007 के आंकड़ों के अनुसार) के साथ यह एशिया का दूसरा और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सरकारी रेलवे तंत्र है। अंतिम गणना के आंकड़ों के मुताबिक रेलवे में मैनेजमेंट कर्मचारियों का प्रतिशत 1.1 है, जबकि ग्रुप सी और डी का प्रतिशत क्रमश 64.5 और 34.4 है। इसमें 4.44 लाख वर्कशॉप कर्मचारी व कलाकार और 9.46 लाख अन्य श्रेणियों से हैं। गैर-राजकीय कैडर में ग्रुप सी और डी का अनुपात 1950-51 के 25:75 से बदलकर हाल में 65:35 हो गया है, जिसका अर्थ है कि योग्य व कुशल श्रमशक्ति रेलवे की पहचान बन चुकी है।
नई योजनाओं और विस्तार नीतियों के साथ इस बात की संभावना पुख्ता होती नजर आती है कि यह क्रम आगे भी जारी रहेगा। इन अनेक तरह के पदों पर भर्ती के तरीके भी उतने ही अलग हैं। रेलवे की सबसे ज्यादा भर्तियाँ ग्रुप 'सी' में सहायक स्टेशन मास्टर, टिकट कलेक्टर, ट:sन कलेक्टर, राजभाषा सहायक, कॅमर्शियल अप्रेंटिस, ट्रैफिक अप्रेंटिस, क्लर्क, गार्ड, आदि के पदों पर होती हैं, जो विभिन्न राज्यों के लिए निर्धारित रेलवे भर्ती बोर्ड के माध्यम से भरी जाती हैं। रेलवे में रिक्त पदों की भर्ती की प्रक्रिया की शुरुआत रोजगार समाचार में योग्य उम्मीदवारों के आवेदन मंगवाने के लिए प्रकाशित विज्ञापन से होती है। प्रकाशित पद के विज्ञापन के अनुसार परीक्षा एक चरण, दो चरण, तीन चरण में हो सकती है। लिखित परीक्षा के बाद स्किल टेस्ट/एप्टीट्यूड टेस्ट/साक्षात्कार भी हो सकता है। इनमें चयनित उम्मीदवारों के सभी सर्टिफिकेट की प्रमाणिकता की परख की जाती है। उसके बाद नियुक्ति के लिए सुझाए गए नामों की सूची संबंधित जोन के रेलवे बोर्ड के चीफ पर्सनेल ऑफिसर को भेजी जाती है। फिर परीक्षाओं में सफल रहने वाले छात्रों की सूची को रोजगार समाचार व संबंधित रेलवे बोर्ड की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाता है। उम्मीदवार को अलग से डाक द्वारा भी सूचित किया जाता है।

19 बोर्ड, हजारों नैकरियां

रेलवे रिक्रूटमेंट कन्ट्रोल बोर्ड, नई दिल्ली सभी आरआरबी के लिए नीति निर्धारण का काम करता है। यह भर्ती के लिए होने वाले खर्च पर निगरानी रखता है, आरआरबी के कामकाज का मूल्यांकन करता है और जरूरत के समय सलाह देता है। इसके अलावा आरआरबी की प्रबंधन से जुड़ी सूचनाओं को व्यवस्थित कर उनके कामकाज पर नियंत्रण रखता है। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह कम्प्यूटर जनित होने के कारण बिना किसी पक्षपात के होती है। आरआरबी की वेबसाइट पर चयन प्रक्रिया, परीक्षा की तिथियों (अनुमानित), आवेदन प्रारूप, जाति प्रमाण पत्र का प्रारूप, नई सूचना, ऑनलाइन रजिस्टेशन और एप्लीकेशन, ऑनलाइन एग्जामिनेशन डेमो, परिणाम और योग्य उम्मीदवारों की सूची जारी की जाती है। इस समय देश में कुल 19 रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड-आरआरबी (रेलवे भर्ती बोर्ड) हैं, जो संबंधित क्षेत्रीय स्टाफ की भर्ती का काम करते हैं। हरेक आरआरबी सामान्यतया हर साल दो बार रोजगार समाचार व देश के विभिन्न समाचार पत्रों में जरूरत के मुताबिक भर्ती संबंधी सूचनाएं प्रकाशित करता है। इस तरह साल के हर दिन किसी न किसी रेलवे भर्ती बोर्ड की रिक्तियां मौजूद रहती हैं।

सामान्य पद

सामान्य भर्ती के पद भारतीय रेलवे में सबसे ज्यादा भरे जाने वाले और सबसे ज्यादा आवेदन किए जाने वाले पदों में से एक हैं। इन पदों पर चयन सामान्यतया एक स्तरीय या दोस्तरीय लिखित या ऑनलाइन परीक्षा के आधार पर होता है। यह परीक्षा वस्तुनिष्ठ प्रकार की होती है, जिसमें अंग्रेजी/सामान्य हिन्दी, सामान्य ज्ञान, सामान्य अंकगणित, संख्यात्मक व विश्लेजाणात्मक योग्यता के सवाल होते हैं। सबसे ज्यादा आवेदन किए जाने वाले कुछ पद इस तरह हैं :
सहायक स्टेशन मास्टर : रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा की जाने वाली नियुक्तियों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय पद सहायक स्टेशन मास्टर का है। इसकी लोकप्रियता की एक दूसरी वजह यह भी है कि इसके लिए किसी खास योग्यता की जरूरत नहीं होती, बल्कि आवेदन के लिए किसी भी विषय में स्नातक होना जरूरी है। इसके अलावा उम्मीदवार की आयु 18 से 33 साल के बीच होनी चाहिए। अंतिम चयन संबंधित बोर्ड द्वारा ली जाने वाली लिखित परीक्षा और उसमें योग्य पाए जाने वालों की होने वाली अभिरुचि परीक्षा के आधार पर किया जाता है। इसके लिए आयोजित होने वाली लिखित परीक्षा या ऑनलाइन परीक्षा में सभी सवाल बहुविकल्प प्रकार के होते हैं। परीक्षा में सामान्य ज्ञान, सामान्य अंग्रेजी/हिन्दी, सामान्य अंकगणित और संख्यात्मक व विश्लेजाणात्मक कौशल के सवाल होते हैं। आवेदन करने वाले को शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ होना चाहिए। उसकी दूर दृष्टि 6/6, 6/9 बिना चश्मे के, निकट दृष्टि, एसएन : 0.6,0.6 बिना चश्मे के व बायनोकुलर दृष्टि, दृष्टि क्षेत्र और रात्रि दृष्टि जरूर मौजूद होनी चाहिए।
गुड्स गार्ड : किसी भी विषय में स्नातक 18 से 33 साल के उम्मीदवार इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए होने वाली लिखित या ऑनलाइन परीक्षा दो स्तरीय होती है।
वरिष्ठ  लिपिक सह-टाइपिस्ट : किसी भी विषय में स्नातक होने के साथ हिन्दी में 25 और अंग्रेजी में 30 शब्द प्रति मिनट टाइपिंग निपुणता वाले उम्मीदवार इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवार की आयु 18 से 33 साल के बीच होनी चाहिए। आखिरी चयन दो स्तरीय लिखित परीक्षा व टाइपिंग निपुणता के आधार पर होता है।
कनिष्ठ लिपिक सह-टाइपिस्ट : आवेदन करने वाले को कम से कम 50 फीसदी अंकों के साथ 10वीं पास होना चाहिए। इससे ऊपर योग्यता वालों के लिए 50 प्रतिशत की सीमा जरूरी नहीं है। उम्मीदवार की आयु 18 से 30 साल के बीच होनी चाहिए। इसके साथ हिन्दी में 25 और अंग्रेजी में 30 शब्द प्रति मिनट टाइपिंग निपुणता होनी चाहिए। आखिरी चयन दो-स्तरीय लिखित परीक्षा व टाइपिंग निपुणता के आधार पर होता है।
रेल लिपिक : आवेदन करने वाले को कम से कम 50 फीसदी अंकों के साथ 10वीं पास होना चाहिए। इससे ऊपर योग्यता वालों के लिए 50 प्रतिशत की सीमा जरूरी नहीं है। उम्मीदवार की आयु 18 से 30 साल के बीच होनी चाहिए। आखिरी चयन दो-स्तरीय लिखित परीक्षा व टाइपिंग निपुणता के आधार पर होता है।
टिकट कलेक्टर : आवेदन करने वाले को कम से कम 50 फीसदी अंकों के साथ 10वीं पास होना चाहिए। इससे ऊपर योग्यता वालों के लिए 50 प्रतिशत की सीमा जरूरी नहीं है। इसके लिए आयु सीमा 18 से 30 साल है। आखिरी चयन दो स्तरीय लिखित परीक्षा के आधार पर होता है।
कनिष्ठ लेखा सहायक : किसी भी विषय में स्नातक होने के साथ हिन्दी में 25 और अंग्रेजी में 30 शब्द प्रति मिनट टाइपिंग निपुणता वाले उम्मीदवार इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवार की आयु 18 से 33 साल के बीच होनी चाहिए। चयन दो-स्तरीय लिखित परीक्षा व टाइपिंग निपुणता के आधार पर होता है।
ट्रैफिक अप्रेंटिस : इसके लिए 20 से 33 साल के किसी भी विषय में स्नातक उम्मीदवार आवेदन के पात्र होते हैं। अंतिम चयन दो-स्तरीय लिखित या ऑनलाइन परीक्षा के आधार पर किया जाता है।
खानपान निरीक्षक/मैनेजर : इसके लिए 12वीं के बाद खानपान में डिप्लोमा और उसके बाद किसी स्थापित होटल में दो साल के काम का अनुभव होना चाहिए। इनका चयन एक स्तरीय लिखित व उसके बाद होने वाली अभिरुचि परीक्षा के आधार पर होता है। उम्मीदवार की आयु 18 साल से कम और 31 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
आशुलिपिक (हिन्दी/अंग्रेजी) : 10वीं पास होने के साथ प्रति मिनट 80 शब्द की आशुलिपि और 30 हिन्दी व 40 अंग्रजी प्रति मनिट टंकण गति वाले अभ्यर्थी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवार की आयु 18 से 30 साल के बीच होना चाहिए।
राजभाषा सहायक ग्रेड-II : इसके लिए 18 से 33 साल के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। शैक्षणिक योग्यता : हिन्दी में एमए और स्नातक स्तर पर अंग्रेजी अनिवार्य विषय के रूप में रहा हो या अंग्रेजी में एमए और स्नातक स्तर पर हिन्दी एक अनिवार्य विषय के रूप में रहा हो या किसी भी विषय में स्नातकोत्तर डिग्री और हिन्दी व अंग्रेजी दोनों स्नातक स्तर पर मुख्य विषय के रूप में रहे हों या हिन्दी व अंग्रेजी के मुख्य विषय के साथ स्नातक किया हो। चयन एक स्तर पर होने वाली लिखित या ऑनलाइन परीक्षा और 90 फीसदी अंकों के साथ क्वालीफाई की जाने वाली अनुवाद परीक्षा के आधार पर होता है।
विधि सहायक : विधि स्नातक के साथ किसी बार में वकील के रूप में 3 साल का अनुभव रखने वाले 18 से 40 साल के उम्मीदवार इसके पात्र होते हैं। 5 साल की सेवा पूरी कर चुके विधि स्नातक रेलवे कर्मचारी और निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले रेलवे मजिस्ट:sट भी आवेदन कर सकते हैं। आखिरी चयन एक स्तर पर होने वाली लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर होता है।

रेलवे में तकनीकी पद

भौतिक विज्ञान से संबधित विषयों में स्नातकोत्तर या स्नातक करने वालों, इंजीनियरिंग स्नातकों, इंजीनियरिंग में तीन साल का डिप्लोमा करने वालों, भौतिकी व गणित के साथ 12वीं करने वालों और विभिन्न ट्रेड में आईटीआई करने वालों के लिए रेलवे में अनेक तरह के अवसर हैं। उम्मीदवार को किसी भी रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा विज्ञापित रिक्तियों के जवाब में योग्यता के मुताबिक आवेदन करना होता है। इन पदों पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का लिखित या ऑनलाइन टेस्ट होता है, जिसमें योग्य पाए गए उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच कर संबंधित रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा उससे जुड़े जोनल रेलवे या प्रोडक्शन यूनिट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पास भेजा जाता है। उसके बाद चिकित्सकीय जांच में उपयुक्त पाए गए उम्मीदवार को रिक्तियों की उपलब्धता के मुताबिक जरूरी प्रशिक्षण के लिए भेज दिया जाता है। इन पदों के लिए होने वाली लिखित परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रकार के सवाल होते हैं। 90 से 120 मिनट की इस परीक्षा में करीब 100 से 150 तक सवाल होते हैं। इसमें सामान्य ज्ञान, अंग्रेजी/सामान्य हिन्दी, सामान्य अंकगणित, विश्लेजाणात्मक व संख्यात्मक कौशल और पद के लिए न्यूनतम तकनीकी योग्यता से संबंधित सवाल होते हैं। इस परीक्षा में प्रदर्शन के मुताबिक रिक्तियों से 20 प्रतिशत ज्यादा छंटनी किए हुए उम्मीदवारों को दस्तावेज परीक्षण के लिए बुलाया जाता है। दस्तावेज सही नहीं होने पर इन अतिरिक्त 20 फीसदी उम्मीदवारों में से चयन कर लिया जाता है। इन पदों के लिए साक्षात्कार की व्यवस्था नहीं है। उम्मीदवारों को स्वास्थ्य संबंधी मानदंडों को भी पूरा करना होता है।

इंजीनियरिंग स्नातक के लिए अवसर

रेलवे में सेक्शन इंजीनियर व जूनियर इंजीनियर-घ् के लिए आवेदन करने वालों को मांगी गई शाखा में इंजीनियरिंग स्नातक होना जरूरी है। इंजीनियर में डिग्रीधारी और जरूरी अनुभव वाले उम्मीदवार रेलवे में सुपरवाइजर के पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। सुपरवाइजरों के लिए दो स्तरीय प्रवेश की व्यवस्था है। इसमें ग्रेड-। और ग्रेड-।। पर सीधी नियुक्तियां दी जाती हैं। इन दोनों तरह के पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की आयु 20 साल से कम और 35 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

  • सेक्शन इंजीनियर (विद्युत) : इसके लिए 20 से 35 साल की आयु के विद्युत, यांत्रिक या इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरी में स्नातक डिग्री प्राप्त उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।

  • सेक्शन इंजीनियर (टेलीकॉम) : 18 से 30 साल के इलेक्ट्रानिक्स, दूरसंचार, विद्युत में इंजीनियरिंग डिग्री या इलेक्ट्रानिक्स में एमएससी किए हुए उम्मीदवार इसके लिए आवेदन के पात्र होते हैं।

  • सेक्शन इंजीनियर (डिजाइन)/सिग्नल व टेली- कम्युनिकेशन : विद्युत, इलेक्ट्रानिक्स, माइक्रोप्रोसेसर, टीवी इंजीनियरिंग, फाइबर ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, टेलीकम्युनिकेशन, कम्युनिकेशन, साउंड व टीवी इंजीनियरिंग इण्डस्ट्रियल कन्ट्रोल, इलेक्ट्रानिक इंस्ट्रूमेंटेशन, इण्डस्ट्रियल इलेक्ट्रानिक्स, एप्लाइड इलेक्ट्रानिक्स, डिजिटल इलेक्ट्रानिक्स, पावर इलेक्ट्रानिक्स, इंफॉर्मेशन साइंस, इंफॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी, कम्प्यूटर एप्लीकेशन, कम्प्यूटर इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर साइंस या कम्प्यूटर टेक्नॉलॉजी में 4 साल की डिग्री या एमएससी (इलेक्ट्रानिक्स, भौतिकी, कम्प्यूटर विज्ञान) किए हुए 18 से 35 साल के उम्मीदवार सेक्शन इंजीनियर (डिजाइन/सिग्नल) व टेलीकॉम के पद पर आवेदन कर सकते हैं।

  • सेक्शन इंजीनियर (डीजल/विद्युत) : इसके लिए 18 से 35 साल के मैन्युफैक्चरिंग, मैकाट्रोनिक्स, इण्डस्ट्रियल, मेकेनिकल, टूल एंड मशीनिंग, टूल्स एंड डिस्क मेकिंग, ऑटोमोबाइल, प्रोडक्शन, मैटालर्जी, फाउंड्री टेक्नॉलॉजी, इलेक्ट्रानिक्स या विद्युत इंजीनियरिंग में स्नातक उपाधि प्राप्त उम्मीदवार आवेदन के पात्र होते हैं।

  • सेक्शन इंजीनियर (डीजल/यांत्रिक) : मैन्युफैक्चरिंग, मैकाट्रोनिक्स, इण्डस्ट्रियल, मेकेनिकल, टूल एंड मशीनिंग, टूल्स एंड डिस्क मेकिंग, ऑटोमोबाइल, प्रोडक्शन, मैटालर्जी, फाउंड्री टेक्नॉलॉजी, इलेक्ट्रानिक्स या विद्युत इंजीनियरिंग में स्नातक उपाधि प्राप्त 18 से 35 साल के उम्मीदवार इस पद के लिए आवेदन के पात्र होते हैं।

  • सेक्शन इंजीनियर (डिजाइन)/सेक्शन रिसर्च इंजीनियर (यांत्रिक) : मेन्युफैक्चरिंग, मैकाट्रोनिक्स, इण्डस्ट्रियल, मैकेनिकल, टूल एंड मशीनिंग, टूल्स एंड डिस्क मेकिंग, ऑटोमोबाइल, प्रोडक्शन, मैटालर्जी, फाउंड्री टेक्नॉलॉजी, इलेक्ट्रानिक्स या विद्युत इंजीनियरिंग में स्नातक उपाधि प्राप्त 18 से 35 साल के उम्मीदवार इस पद के लिए आवेदन के पात्र होते हैं।

  • सेक्शन इंजीनियर (कारखाना) : 18 से 35 साल की आयु के मैन्युफैक्चरिंग, मैकाट्रोनिक्स, इण्डस्ट्रियल, मेकेनिकल, टूल एंड मशीनिंग, टूल्स एंड डिस्क मेकिंग, ऑटोमोबाइल, प्रोडक्शन, मैटालर्जी, फाउंड्री टेक्नॉलॉजी इलेक्ट्रानिक्स या विद्युत इंजीनियरिंग में स्नातक उपाधि प्राप्त उम्मीदवार इस पद के लिए आवेदन के पात्र होते हैं।

  • सेक्शन इंजीनियर (कार्य) : इसके लिए 20 से 32 साल के सिविल इंजीनियरिंग से स्नातक उपाधि प्राप्त उम्मीदवार पात्र होते हैं।

  • सेक्शन इंजीनियर (पी. वे.) : सिविल इंजीनियरिंग से स्नातक की डिग्री किए हुए 20 से 32 साल के उम्मीदवार इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।

  • सेक्शन इंजीनियर (डिजाइन)/सेक्शन रिसर्च इंजीनियर (सिविल) : इसके लिए 18 से 35 साल के सिविल इंजीनियरिंग से स्नातक किए हुए उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।

  • केमिकल सुपरवाइजर ग्रेड-।/रिसर्च : आवेदक के पास रसायन प्रौद्योगिकी में डिग्री या पैट्रोलियम प्रोडक्ट, पेंट व केरोसिन प्रिवेंशन और पॉलीमर्स के क्षेत्र में इसके समकक्ष डिग्री होने के साथ औद्योगिक या अनुसंधान व विकास संगठन में उत्पादन, औद्योगिक, सामग्री और संबंधित क्षेत्र में कम से कम एक साल का अनुभव। इसके साथ कम्प्यूटर की किसी भाषा का ज्ञान होना चाहिए।

  • केमिकल सुपरराइजर ग्रेड-।।/रिसर्च : रसायन प्रौद्योगिकी में डिग्री या पैट्रोलियम प्रोडक्ट, पेंट व केरोसिन प्रिवेंशन और पॉलीमर्स के क्षेत्र में इसके समकक्ष डिग्री होने के साथ कम्प्यूटर की किसी भाषा का ज्ञान होना चाहिए।

  • मैटालर्जिक सुपरवाइजर ग्रेड-।।/रिसर्च : इसके लिए आवेदन करने वालों के पास मैटालर्जिक इंजीनियरिंग में डिग्री होने के साथ कम्प्यूटर की किसी भाषा का ज्ञान होना जरूरी है।

  • जूनियर रिसर्च इंजीनियर-।/(सिग्नल और टेली-कम्युनिकेशन) : विद्युत, इलेक्ट्रानिक्स, माइक्रोप्रोसेसर, टीवी इंजीनियरिंग, फाइबर ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, टेलीकम्युनिकेशन, कम्युनिकेशन, साउंड व टीवी इंजीनियरिंग इण्डस्ट्रियल कन्ट्रोल, इलेक्ट्रानिक इंस्ट्रूमेंटेशन, इण्डस्ट्रियल इलेक्ट्रानिक्स, एप्लाइड इलेक्ट्रानिक्स, डिजिटल इलेक्ट्रानिक्स, पॉवर इलेक्ट्रानिक्स, इंफॉर्मेशन साइंस, इंफॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी, कम्प्यूटर एप्लीकेशन, कम्प्यूटर इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर साइंस या कम्प्यूटर टेक्नॉलॉजी में 4 साल की डिग्री या एमएससी (इलेक्ट्रानिक्स, भौतिकी, कम्प्यूटर विज्ञान) किए हुए 18 से 35 साल के उम्मीदवार सेक्शन इंजीनियर (डिजाइन)/सिग्नल व टेलीकॉम के पद पर आवेदन कर सकते हैं।

  • यूनियन इंजीनियर-।/डिजाइन (विद्युत) : विद्युत, इलेक्ट्रानिक्स व दूरसंचार, इलेक्ट्रानिक्स, विद्युत पॉवर सिस्टम, इलेक्ट्रानिक्स व वीडियो इंजीनियरिंग, इंस्ट्रूमेंटेशन व कन्ट्रोल, इण्डस्ट्रियल व वीडियो इंजीनियरिंग, इंस्ट्रूमेंटेशन व कन्ट्रोल, इण्डस्ट्रियल इलेक्ट्रानिक्स, मेकेनिकल, प्रोडक्शन, प्रोडक्शन टेक्नॉलॉजी या इण्डस्ट्रियल इंजीनियरिंग में कम से कम स्नातक उपाधि प्राप्त 18 से 35 साल की आयु के उम्मीदवार इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।

  • जूनियर इंजीनियर-।/डिजाइन/जूनियर रिसर्च इंजीनियर-। (यांत्रिक) : मैन्युफैक्चरिंग, मैकाट्रोनिक्स, इण्डस्ट्रियल, मेकेनिकल, टूल एंड मशीनिंग, टूल्स एंड डिस्क मेकिंग, ऑटोमोबाइल, प्रोडक्शन, मैटालर्जी, फाउंड्री टेक्नॉलॉजी, इलेक्ट्रानिक्स या विद्युत इंजीनियरिंग में स्नातक उपाधि प्राप्त 18 से 35 साल के उम्मीदवार इस पद के लिए आवेदन कर सकते हैं।

  • जूनियर रिसर्च इंजीनियर-।/(सिविल) : इसके लिए 18 से 35 साल के सिविल इंजीनियरिंग में डिग्रीधारी उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। डिपो सामग्री अधीक्षक-। : इंजीनियरिंग की किसी भी शाखा में स्नातक डिग्रीधारी 20 से 35 साल के उम्मीदवार आवेदन के पात्र होते हैं।

आईटीआई वालों के लिये कई मौके

सहायक लोको पायलेट (डीजल) : 10वीं के बाद फिटर, इलेक्ट:ाrशियन, इंस्ट्रूमेंट मेकेनिक, मेकेनिक (रेडियो/टीवी), इलेक्ट्रानिक्स मेकेनिक, मेकेनक (मोटर व्हीकल), वायरमैन, ट:wक्टर मेकेनिक, आर्मेचर व क्वाइल बाइंडर, मेकेनिक (डीजल), हीट इंजन, टर्नर, मशीनिश्ट या रेफ्रिजरेशन व एसी मेकेनिक आईटीआई या एक्ट अप्रेंटिस करने वाले उम्मीदवार इसके पात्र होते हैं। आईटीआई के बदले यांत्रिक, विद्युत, इलेक्ट्रानिक्स या ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने वाले उम्मीदवार भी पात्र होते हैं। सहायक लोको पायलेट बनने के लिए दो स्तरीय परीक्षा से होकर गुजरना होता है। पहले स्तर पर लिखित परीक्षा होती है, उसके बाद अभिरुचि परीक्षा और इसमें योग्य पाए जाने वाले उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच होती है।

  • ईएसएम-।।। : इसके लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार की आयु सीमा 18 से 30 साल है। ईएसएम-III के लिए शैक्षणिक योग्यता 10वीं के बाद विद्युत मिस्त्री, विद्युत फिटर, वायरमैन व्यवसाय में आईटीआई किया होना है। इसके साथ उम्मीदवार को सिग्नल व दूरसंचार विभाग में नैमित्तिक के रूप में एक साल से कार्यरत भी होना चाहिए।

  • टीसीएम-।।। : 10वीं के बाद विद्युत, रेडियो, बेतार, दूरसंचार, टीवी के काम में आईटीआई प्रमाण-पत्र और सिग्नल व दूरसंचार विभाग में नैमित्तिक दूरसंचार/बेतार अनुरक्षक के रूप में एक साल का अनुभव होना जरूरी है। आईटीआई न किए हुए, लेकिन सिग्नल व दूरसंचार विभाग में नैमित्तिक दूरसंचार/बेतार अनुरक्षक के रूप में 3 साल का अनुभव रखने वाले भी आवेदन कर सकते हैं। बिना आईटीआई व अनुभव वाले गणित व भौतिकी से 12वीं पास करने वाले उम्मीदवार भी आवेदन योग्य होते हैं। इसके लिए उम्मीदवार की आयु सीमा 18 से 30 साल के बीच होनी चाहिए।

  • तकनीशियन-।।। : 18 से 30 साल के 10वीं सहित एक्ट अप्रेंटिस या विद्युत ट्रेड में आईटीआई करने वाले उम्मीदवार लिखित परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं।

तकनीशियन-।।। (कारखाना) : फिटर, पेंटर, वैल्डर, मिल राइट फिटर, क्रेन ड्राइवर, मोटर लॉरी ड्राइवर, फिटर (सी एंड डब्ल्यू), डीजल मेकेनिक, फिटर, डीजल विद्युत फिटर आदि पद तकनीशियन-।।। (कारखाना) के अंतर्गत आते हैं। इन पदों पर आवेदन करने वालों को 10वीं के साथ एक्ट अप्रेंटिस या संबंधित ट्रेड में आईटीआई होना चाहिए। इसके लिए 18 से 30 साल की आयु के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। चयन लिखित परीक्षा के आधार पर होता है।
इसके अलावा तकनीशियन-।।। में डीजल/यांत्रिक, डीजल/विद्युत, विद्युत, प्लांट, रेफ्रिजरेशन-कम-वायरमैन, यांत्रिक, कारपेंटर, प्लम्बर, मेसन, मोटर मिस्त्री, मिलराइट, मेंटेनेंस मेकेनिक, टर्नर, फर्नेंस, कटिंग व सिलाई, टूल डाई मेकर आदि के पद होते हैं, जिनके लिए 18 से 30 व 33 साल तक के संबंधित ट्रेड में आईटीआई किए हुए उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।

ग्रुप 'डी' की भर्तियां
भारतीय रेलवे में ग्रुप 'डी' के अन्तर्गत कुली, हम्माल, सफाईवाला, हेल्पर, खलासी, ट्रॉलीमैन, ट्रैकमैन आदि पदों पर भर्ती की जाती है। इनके लिए 18 से 33 साल के आठवीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने वाले सभी योग्य उम्मीदवारों को पहले शारीरिक दक्षता जांच परीक्षा पास करनी होती है। इसमें योग्य पाए जाने वाले उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा के योग्य माना जाता है। लिखित परीक्षा का स्तर आठवीं कक्षा के समान होता है। बहुविकल्प सवालों पर आधारित इस परीक्षा में सामान्य ज्ञान, गणित, सामान्य विज्ञान और तर्कशक्ति के सवाल होते हैं। ग्रुप 'डी' में स्काउट व गाइड प्रेसिडेंट, स्काउट/गाइड/रोवर/रेंजर या हिमालय वुड बैज धारक या प्री एचडब्ल्यूबी प्रशिक्षित स्काउट या लीडर/एडवांस्ड ट्रैंड गाइड/लीडर/कैप्टन या 3 साल से स्काउट के सक्रिय सदस्य या राष्ट्रीय स्तर पर एक व राज्य स्तर पर कम से कम दो प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले या यूनिट/जिला स्तर पर स्काउट/गाइड गतिविधियों में अच्छे स्तर के रिकॉर्ड वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। आखिरी चयन स्काउट/गाइड से संबंधित लिखित परीक्षा व उसके बाद होने वाले साक्षात्कार के आधार पर होता है।

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