electroniki
इलेक्ट्रॉनिक्स आपके लिए 24, अंक 208, वर्ष नवमबर 2011
 
 
Article1 Article2 Article3 Article4 Article5 Article6 Article7 Article8 Article9 Article10 Article11 Article12

विज्ञान कथा

साइबर युद्धघ्घ् 

q डॉ राजीव रंजन उपाध्याय 

बारहवें देवासुर संग्राम के उपरान्त देवताओं, असुरों और दानवों में समझौते की बातचीत प्रारम्भ हुई। यह निश्चित हुआ कि असुरगण दजला और फरात नदियों के बीच वाले समस्त भू-भाग पर अपना साम्राज्य स्थापित करें और दानव लोग जो जननी दनु की संतान थे, मध्य क्षेत्र की उस तीव्र गति से बहती हुयी नदी, जिसका नामकरण दनूब हुआ था के उस पार के समस्त भू-क्षेत्र पर अपना अधियत्य जमाया। सभी ने बात मान ली यह जान कर उनके पिता महर्षि कश्यप और माताएँ, दिति, अदिति और दनु प्रसन्न हों गयीं। महर्षि कश्यप आधुनिक कैस्पियन सागर-उन्हीं के नाम पर विख्यात कश्यप सागर की सुरम्य भूमि पर स्थित, अपने आश्रम में आनन्द से, पत्नियों के साथ रहने लगे। 

दानव, असुरों को अपेक्षाअधिक शक्तिशाली थे। उन्हेंने उस  नदी का नाम अपनी माता दनु पर रखा और यह नदी आज भी किंन्चित परिवर्तित नाम- दनाउ डेन्यूब के नाम से विख्यात है।  

दानवों में विख्यात बलि था, जिससे भयभीत होकर, कश्यप पुत्र विष्णु तीन पग भूमि मांगने गये थे। उसी के वंश में विख्यात मय नामक दानव हुआ था जो महान शिल्पी था तथा उसी के वंशज वृद्धि के फलस्वरूप फैले और अपने पूर्वज मय के नाम पर जिस सभ्यता और स्थापत्थ को जन्म दिया& वह आज मय सभ्यता के नाम से विख्यात है। मय मेधावी इंजीनियर था। इन्हीं दानवों का एक वैज्ञानिक राजा था, सुयोग्य शासक था और था साइबरनेटिक्स का विशेषज्ञ। उसका राज्य मात्र एक हजार किलोमीटर के क्षेत्र में था, परन्तु उसकी प्रजा सम्पन्न थी समृद्धि हर तरफ दिखती थी। राजा पोलोमा को एक ही शौक था, वह भी युद्ध का। पर उससे कोई टकराना नहीं चाहता था - वह साईबरनेटिक्स का विशेषज्ञ जो ठहरा। अपने शौक को पूरा करने के लिए उसने एक अनोखा रास्ता निकाला। 

राजा पोलोमा के राज्य में विवेकवान मशीनों की भरमार हो गयी। राजा के आदेश से वे वेधशालाओं, पहाड़ों की चोटियों , स्कूलों, राजपथों, वृक्षों, दीवालों, तालाबों, नदी तटों, और सुदूर गगन में भी स्थापित करा दी गयीं, जिससे उसके नागरिकों को, कहीं भटकना न पड़े, वृक्षों में फलों के विषय में सूचना मिल सके, नदियों में बाढ़ का पूर्वानुमान हो सके तथा वर्षा की सूचना- अग्रिम प्राप्त हो सके। इतना ही नहीं उसने अपनी पुरानी राजधानों के नाम को बदल कर उसे पालोमा- साइब्रामा, रख दिया। इस तरह पालोमा&साइब्रोमा में मशीनों से बच कर निकल पाना असम्भव था। 

राजाज्ञा से विवेकवान मशीनों का निर्माण बहुधर्मिक हो गया। राज्य में साइबर- पक्षी थे, साइबर पतंगे थे, साइबर -सर्प थे, साईबर मक्खियां थीं। साइबर मधुमक्षिकाएं थीं, साइबर मछलियाँ थीं साइबर के कड़े और कछुए थे, साइबर पक्षी थे- और जिन वस्तुओं की, जीवों की आप कल्पना कर सकते हैं उस सभी के साइबर प्रतिरूप राज्य में विद्यमान थे। इन वस्तुओं के उपरान्त पालोमा के राज्य में युद्ध  मशीनों भी बहुतायत से थीं। राजा के युद्ध प्रेम ने इन विविध युद्ध  मशीनों को असंख्य कर दिया।

उसके साइबर वायुयानों, तोपों, सैनिकों, मशीन-गनों, राइफलों और यहाँ तक कि उसके कारतूसों का मुकाबला करने वाला कोई दूसरा देश अथवा राजा नहें था। राजा को यही चिन्ता सता रही थी, कि वह युद्ध किससे करे - वह रणवाँकुरा जो ठहरा।  

अपने युद्ध प्रेम की पूर्ति हेतु राजा ने अपने इंजीनियरों को साइबर सैनिकों के निर्माण का आदेश दिया। वह साइबर सैनिकों से युद्ध कर अपनी युद्ध पिपासा शान्त करता था। और वह सदा विजयी रहता था राजा के इन युद्धों से प्रजा परेशान रहती थी। 

                                                  

राजा विजय के बाद युद्ध क्षेत्र के आसपास के रहने वालों के मकानें को, खेतों को, वृक्षों को, पशुओं को मार डालता, नष्ट कर देता और बाद में वह प्रजा को इसका हरजाना देता था। मरने वाले-मारने वालों की तरह ही साइबर होते वृक्ष और पशु भी पर नुकसान तो प्रजा का था जो मानव थे। हरजाना पाने के बाद कुछ दिनों के लिए प्रसन्न होते पर भविष्य के युद्ध की कल्पना उन्हें बेचैन कर देती थी। 

राजा पालोमा को प्रजा के मनःस्थिति का पता चला। उसने इंजीनियरों को बुलाया और कहा धरा अभियान के बाद अब हमें अन्तरिक्ष युद्धों का प्रारम्भ करना चाहिए। भविष्य को ध्यान में रखते हुए आवश्यक है यह युद्ध अभ्यास। 

राजा के इंजीनियरों ने बात मान ली। उन्होंने इस कार्य हेतु कृत्रिम तारें और एक चाँद भी बना दिया। इतना ही नहीं उन्होंने उस चन्दमा पर एक कम्प्यूटर भी स्थपित कर दिया। यह अति विकसित कम्प्यूटर था। इस कार्य हेतु राजा ने अपनी प्रजा पर कर बढ़ा दिये। प्रजा के पास विकल्प था ही नहीं। वह यह सोच कर टैक्स देने के लिए तैयार थी कि इस प्रकार प्रत्येक वर्ष हमारा युद्धाभ्यास के समय होने वाला नुकसान तो बन्द होगा। रणबाँकुरा राजा अन्तरिक्ष युद्ध में व्यस्त रहे यह उत्तम विकल्प है। 

राजा के शिल्पियों ने इंजीनियरों ने उस चन्दमा पर जो कम्प्यूटर लगाया था वह युद्ध के लिए सैनिकों की सेना तैयार कर सकता था, उन्हें युद्ध के लिए सज्जित कर सकता था, कम होने पर उन्हें गोला& बारूद उपलब्ध कराने में समर्थ था। राजा यह सूचना पाकर अतयंत प्रसन्न हुआ। उसके मन में युद्ध करने की इच्छा बलवती हो उठी क्योंकि चन्दमा स्थित कम्प्यूटर सभी प्रकार के कार्यों को करने में समर्थ था।

राजा ने चन्दमा स्थित कम्प्यूटर को ''इलेक्ट्रो एसाल्ट" शुरू करने का संदेश भेजा। संदेश भेजने में हुयी त्रुटि के कारण चन्द स्थित कम्प्यूटर ने उसे इलेक्ट्रोसारस, पढ़ लिया। संदेश का पालन करने हेतु उसने तैयारी शुरू कर दी

इसी बीच साइबर सेना को सजाकर राजा ने अपने राज्य के सुदूर क्षेत्र में कब्जा जमाये बैठे साइबर दस्युओं का सफाया कर डाला वह इस अभियान में विजयी होकर अपने महल में लौट आया। वह अपने मित्रों के साथ हर्षोल्लास में डूबा था। इतने में एक अप्रत्याशित घटना घटित हो गयी।

सुदर स्थित राजा के इंजीनियरों द्वारा रचित चन्दमा से एक मिसाइल राजा के महल पर आ गिरी। राजा के महल का वह भाग विविध एन्ड्रयड़ों का केन्द था, वे सभी नष्ट हो गये। क्रोध में भर कर राजा ने चन्दमा स्थित कम्प्यूटर से इस घटना का स्पष्टीकरण माँगा। सूचना भेज दी गयी पर चन्दमा का कम्प्यूटर मौन था। राजा कम्प्यूटर की इस हरकत पर नाराज और परेशान था।

वहाँ पर चन्दमा पर पूर्व सूचना द्वारा उत्पन्न हुये इलेक्ट्रोसारस ने कम्प्यूटर को अपनी पूँछ में चिपका लिया था। इलेक्ट्रोसारस ने अतिविशालकाय स्वरूप धारण कर लिया था।

क्रोध से झल्लाते हुए राजा ने अपने साइबर सैनिकों के साथ एक दूसरा शक्तिशाली कम्प्यूटर चन्दमा पर चढ़ाई करने हेतु भेज दिया।

वह कम्प्यूटर वास्तविक योद्धा था उसने उस मदान्ध इलेक्ट्रोसारस को ललकारा। पर वह कुछ कर न सका। राजा को मात्र खड़खड़ाहटों, टकराहटों को छोड़ कर कुछ भी, अपने महल स्थित मास्टर कम्प्यूटर पर सुनाई नहीं दिया। राजा ने आवेश में आकर साईबरनान्टों, साइबर इंजीनियरों, साइबर मशीनों, साइबर- लेटीनेन्टों और एक साईबर जनरल को रवाना कर दिया। पर वे भी उस इलेक्ट्रोसारस के सम्मुख टिक न सके।  

राजा अपनी वेधशला की दूरबीन से देख रहा था। वह यह देख देख कर हाथ मल रहा था कि उसकी सारी सेना को वह इलेक्ट्रो सारस किस प्रकार नष्ट किये डाल रहा था। इतना ही नहीं वह इलेक्ट्रोसारस लगातार अपना विस्तार कर रहा था। उसका शरीर बढ़ रहा था, वह उस कृत्रिम चन्दमा को अपने पेट में समेटने का प्रयास कर रहा था। चन्दमा घट रहा था और इलेक्ट्रोसारस- विशालकाय होता जा रहा था राजा सोचने लगा-क्या करूँ।

मेरी सेना-मेरे रोबो हार चुके हैं।
चन्दमा को वह धीरे धीरे खा रहा है।

यदि मैं सेना लेकर युद्ध करूँ तो परिणाम क्या हो सकता है, यह सोच कर वह काँप उठा।

जीवन में पहली बार राजा भयभीत हुआ था!

वह बेचैनी से अपने राजसी कक्ष में घूम रहा था। 

एकएक उसके कम्प्यूटर का स्वर्ण जटित पिंटर चल पड़ा। खट - खट - खट - खट की आवाज के बाद जो प्रिंट निकला उसे राजा ने उत्सुकता से पढ़ा.........''राजा पोलोमा तुम अपना राज्य सिंहासन मुझे दे दो...तुम राज्य से दूर चले जाओ...अन्यथा.........'' इससे अधिक राजा पढ़ न सका। वह सर थाम कर बैठ गया। 

कुछ पलों के बाद वह अपने नाइट&सूट और चप्पलों को पहने वह दौड़ता हुआ अपने महल के भूगर्भ में स्थित-आपदाहारी मशीन के पास जा पहुँचा। 

इस इलेक्ट्रोसारस के पहले राजा अपने मंत्री से, सैनिक सलाहकारों से विचार विमर्श करने के बाद अपना युद्ध अभियान प्रारम्भ करना था। पर आज परिस्थिति बदल गयी थी। उसको जीवन राज्य और सुख सुविधाओं पर आक्रमण की चिन्ता भयभीत किये हुई थी। 

उसने आपदाहारी कम्प्यूटर के निर्माण के बाद, पहली बार उसे ऑन किया। 

कम्प्यूटर ऑन हुआ यह देख कर राजा ने गिड़गिड़ाने हुए स्वर में उससे पूछा ''हे कम्प्यूटर! इलेक्ट्रोसारस। चन्मा  स्थित वह विकराल कम्प्यूटर मेरा राज्य, मेरा सिंहासन, मेरा सर्वस्व ले लेना चाहता है। तुम मुझे बताओ मैं क्या करूँ? 

कम्प्यूटर में कुछ संकेत चमके और वह कहने लगा'' तुमने आज तक मुझसे सलाह नहीं ली थी ...अब गिडगिड़ा रहे हो अपनी बुद्धिमत्ता पर ! पहले तुम मुझे आदरणीय फेरोमैग्नेटिक महामात्य! महामंत्री! कहना सीखो, फिर मैं तुम्हारे निवेदन पर विचार करूँगा। 

राजा के नेत्रों में आशा की क्षीण रेखा चमक उठी। उसने कहा ''महामात्य! महामंत्री !! कृपा कर मेरी समस्या का निराकरण कैसे हो बताएँ।।" 

महामात्य! कम्प्यूटर कुछ पलों तक मौन रहा। यह मौन राजा के लिए बेचैनी उत्प़ करने वाला था। वह कातर दृष्टि से कम्प्यूटर को देख रहा था। 

कम्प्यूटर की ध्वनि ने उसे सचेष्ट कर दिया ''हम एक अतिशक्ति शाली इलेक्ट्रोसारस का निर्माण करेंगे जो चन्दमा के इलेक्ट्रोसारस को पराजित कर देगा और इस के द्वारा तुम्हारी समस्या सुलझा दी जायेगी।"  

प्रसन्नता राजा के चेहरे पर नाच उठी। उसने विनीत स्वर में महामात्य कम्प्यूटर से कहा ''उस अतिशक्तिशाली इल्ट्रोसारस का ब्लूप्रिंट आप कब तैयार करेगे?''  

''इसी क्षण''कहते हुए उस कम्प्यूटर ने खटखटाहटों, सरसराहटों, भनभनाहटों के सिलसिले को शुरू कर दिया और राजा ने देखा कि कम्प्यूटर के बगल में एक विशाल चमकती आँखों वाला दो पंजों पर चलने काले रंग का जीव! बनकर, खड़ा हो रहा था उस देखकर राजा घबरा गया। उसकी आवाज बन्द हो गई। वह पसीने&पसीने हो उठा।  

कुछ मन को मजबूत कर उसने महामात्य कम्प्यूटर से कहा ''नहीं इसकी आवश्यकता नहीं हैं यह तो चनौमा के इलेक्ट्रोसारस की तरहवहाँ पर चन्दमा पर पूर्व सूचना द्वारा उत्पन्न हुये इलेक्ट्रोसारस ने कम्प्यूटर को अपनी पूँछ में चिपका लिया था। इलेक्ट्रोसारस ने अतिविशालकाय स्वरूप धारण कर लिया था।  

क्रोध से झल्लाते हुए राजा ने अपने साइबर सैनिकों के साथ एक दूसरा शक्तिशाली कम्प्यूटर चन्दमा पर चढ़ाई करने हेतु भेज दिया।  

वह कम्प्यूटर वास्तविक योद्धा था उसने उस मदान्ध इलेक्ट्रोसारस को ललकारा। पर वह कुछ कर न सका। राजा को मात्र खड़खड़ाहटों, टकराहटों को छोड़ कर कुछ भी, अपने महल स्थित मास्टर कम्प्यूटर पर सुनाई नहीं दिया। राजा ने आवेश में आकर साईबरनान्टों, साइबर इंजीनियरों, साइबर मशीनों, साइबर- लेटीनेन्टों और एक साईबर जनरल को रवाना कर दिया। पर वे भी उस इलेक्ट्रोसारस के सम्मुख टिक न सके।

राजा अपनी वेधशला की दूरबीन से देख रहा था। वह यह देख देख कर हाथ मल रहा था कि उसकी सारी सेना को वह इलेक्ट्रो सारस किस प्रकार नष्ट किये डाल रहा था। इतना ही नहीं वह इलेक्ट्रोसारस लगातार अपना विस्तार कर रहा था। उसका शरीर बढ़ रहा था, वह उस कृत्रिम चन्दमा को अपने पेट में समेटने का प्रयास कर रहा था। चन्दमा घट रहा था और इलेक्ट्रोसारस- विशालकाय होता जा रहा था राजा सोचने लगा-क्या करूँ।  

                                                        मेरी सेना-मेरे रोबो हार चुके हैं।
                                                     चन्दमा को वह धीरे धीरे खा रहा है।  

यदि मैं सेना लेकर युद्ध करूँ तो परिणाम क्या हो सकता है, यह सोच कर वह काँप उठा। 

जीवन में पहली बार राजा भयभीत हुआ था! 

वह बेचैनी से अपने राजसी कक्ष में घूम रहा था। 

एकएक उसके कम्प्यूटर का स्वर्ण जटित पिंटर चल पड़ा। खट - खट - खट - खट की आवाज के बाद जो प्रिंट निकला उसे राजा ने उत्सुकता से पढ़ा.........''राजा पोलोमा तुम अपना राज्य सिंहासन मुझे दे दो...तुम राज्य से दूर चले जाओ...अन्यथा.........`` इससे अधिक राजा पढ़ न सका। वह सर थाम कर बैठ गया। 

कुछ पलों के बाद वह अपने नाइट-सूट और चप्पलों को पहने वह दौड़ता हुआ अपने महल के भूगर्भ मेंस्थित-आपदाहारी मशीन के पास जा पहुँचा। 

इस इलेक्ट्रोसारस के पहले राजा अपने मंत्री से, सैनिक सलाहकारों से विचार विमर्श करने के बाद अपना युद्ध अभियान प्रारम्भ करना था। पर आज परिस्थिति बदल गयी थी। उसको जीवन राज्य और सुख सुविधाओं पर आक्रमण की चिन्ता भयभीत किये हुई थी। 

उसने आपदाहारी कम्प्यूटर के निर्माण के बाद, पहली बार उसे ऑन किया। 

कम्प्यूटर ऑन हुआ यह देख कर राजा ने गिड़गिड़ाने हुए स्वर में उससे पूछा ''हे कम्प्यूटर! इलेक्ट्रोसारस। चनौमा  स्थित वह विकराल कम्प्यूटर मेरा राज्य, मेरा सिंहासन, मेरा सर्वस्व ले लेना चाहता है। तुम मुझे बताओ मैं क्या करूँ?

कम्प्यूटर में कुछ संकेत चमके और वह कहने लगा'' तुमने आज तक मुझसे सलाह नहीं ली थी ...अब गिडगिड़ा रहे हो अपनी बुद्धिमत्ता पर ! पहले तुम मुझे आदरणीय फेरोमैग्नेटिक महामात्य! महामंत्री! कहना सीखो, फिर मैं तुम्हारे निवेदन पर विचार करूँगा। 

राजा के नेत्रों में आशा की क्षीण रेखा चमक उठी। उसने कहा ''महामात्य! महामंत्री !! कृपा कर मेरी समस्या का निराकरण कैसे हो बताएँ।।" 

महामात्य! कम्प्यूटर कुछ पलों तक मौन रहा। यह मौन राजा के लिए बेचैनी उत्प़ करने वाला था। वह कातर दृष्टि से कम्प्यूटर को देख रहा था। 

कम्प्यूटर की ध्वनि ने उसे सचेष्ट कर दिया ''हम एक अतिशक्ति शाली इलेक्ट्रोसारस का निर्माण करेंगे जो चन्दमा के इलेक्ट्रोसारस को पराजित कर देगा और इस के द्वारा तुम्हारी समस्या सुलझा दी जायेगी।"

प्रसन्नता राजा के चेहरे पर नाच उठी। उसने विनीत स्वर में महामात्य कम्प्यूटर से कहा ''उस अतिशक्तिशाली इल्ट्रोसारस का ब्लूप्रिंट आप कब तैयार करेगे?" 

''इसी क्षण'' कहते हुए उस कम्प्यूटर ने खटखटाहटों, सरसराहटों, भनभनाहटों के सिलसिले को शुरू कर दिया और राजा ने देखा कि कम्प्यूटर के बगल में एक विशाल चमकती आँखों वाला दो पंजों पर चलने काले रंग का जीव! बनकर, खड़ा हो रहा था उस देखकर राजा घबरा गया। उसकी आवाज बन्द हो गई। वह पसीने-पसीने हो उठा। 

कुछ मन को मजबूत कर उसने महामात्य कम्प्यूटर से कहा ''नहीं इसकी आवश्यकता नहीं हैं यह तो चनौमा  क इलेक्ट्रोसारस की तरहबेकाबू हो सकता है। यह तो मुझे भी भार सकता है। हे मंत्री। हे मेरे आदरणीय महामात्य! इसको नष्ट करो राजा की आवाज कांप रही थी।

''तुम्हें मुझे पहले इसके विषय में बताना था। तुम अपने शब्दों का उचित प्रयोग नहीं कर पाये, इसी कारण यह समस्या उत्पन्न हुयी है। ठीक है रुको!" कहता कम्प्यूटर मौन हो गया। वह सोच रहा था, राजा को लगा। 

फिर उस कम्प्यूटर में पुरानी सरसराहट! घरघराघट, खटखट शुरू हुई और उसके बाद आवाज गूँजी। ''ठीक है! एक एन्टीमून और एन्टी इलेक्ट्रोसारस को हम बना दें? उसे चन्ौमा  के आरबिट में, कक्षा में स्थापित कर दें तो? बात ठीक है, पर उसके पहले वह कुछ प्रश्नों का उत्तर दे। 

''ठीक है उस इलेक्ट्रोसारस से चनौमा स्थित इलेक्ट्रोसारस से क्या प्रश्न करना होगा?" 

'' ओह! बात सीधी सी है, गणितीय! लेकिन पहले तुम उस चनौमा  के इलेक्ट्रोसारस को मेसेज दो कि तुम उसे अपना सिंहासन देने को तैयार हो यदि वह तीन प्रश्नों का उत्तर दे सके।" 

राजा पोलोमा ने चनौ स्थित इलेक्ट्रोसारस को मेसेज भेजा। वह उत्तर देने को सहमत हो गया।

राजा ने यह सूचना महामात्य कम्प्यूटर को दी।  

''महामात्य ने कहा'' इलेक्ट्रोसारस से कहो कि वह अपने को अपने से भाग दे। आदेश का पालन हुआ। 

स्वतः को स्वतः से भाग देने पर स्वतः बचता है, इस कारण वह इलेक्ट्रोसारस चन्मा  पर स्थिर रहा। 

यह देखकर राजा घबरा उठा। वह बिना चप्पलों को पहने ऊपर की तरफ भागा। मगर दूसरे क्षण महामात्य कम्प्यूटर ने कहा ''भागो मत यह गणना तो मैंने इलेक्ट्रोसारस के ध्यान को बटाने के लिए की थी। तुम अब अपने राजसी कक्ष के कम्प्यूटर से उस इलेक्ट्रोसारस को संदेश भेजे कि वह अपने को अपने धन मूल से गुणा करे।"

 राजा ने वैसा ही किया। 

इलेक्ट्रोसारस ने सभी प्रयास कर डाले उसका धन मूल उतना ही रहा। राजा अब हताश हो गया। वह कांप रहा था भय से हो। इलेक्ट्रोसारस के आक्रमण के भय से हो। 

यह देखकर महामात्य कम्प्यूटर ने कहा, "राजा धैर्य धारण करो अन्तिम प्रश्न भी उस दुष्ट को भेज दो।" 

राजा ने कहा बताइये,"अब तुम उसको अपने में से अपने को घटाने के लिए कहो!"

राजा ने अपने राजसी कक्ष में जाकर इलेक्ट्रोसारस का यह संदेश भेज दिया।  

उस इलेक्ट्रोसारस ने अपनी पूँछ निकाल दी, फिर, अपने विकराल पंजों को निकाल कर फेंक दिया। सर को अपने शरीर से अलग करने के पहले उसने अपने लोहे के पंखों को नष्टकर वह जीरो हो गया। अस्तित्व विहीन हो गया। 

राजा अपनी वेघशाला से यह दृश्य देखकर तेजी से दौड़ता हुआ महामात्य कम्प्यूटर के पास पहुंचा और कहा कि इलेक्ट्रोसारस जीरो हो गया है। 

''आहा हा हा! महामात्य कम्प्यूटर ने अट्टहास किया और अब  मैं उस चन्ौमा स्थित नष्ट हुए इलेक्ट्रोसारस की जगह खुद ले लूंगा। मैं तुम्हारी कमजोरी जान गया हूँ।"

राजा ने महामात्य कम्प्यूटर की खटखटाहट, छटपटाहट सुनी। उसने देखा कि एक विशाल पंजा निकल रहा था, उस कम्प्यूटर की बगल से। राजा ने घबराकर उस कम्प्यूटर को पीटना शुरू कर दिया। और उसकी की-बोर्ड पर नो&इलेक्ट्रोसारस प्रिंट करना चाहा।  राजा को देखकर आश्चर्य हुआ, उसकी आँखें फटी रह गयीं, वह कम्प्यूटर लाल तप्त हो उठा....वह पिघलने लगा। ''मैं जल रहा हूँ, पिघल रहा हूँ। मेरी ट्यूब जल गयी है..जलने में मजा है.. मुझे मजा आ रहा है।" की आवाज कक्ष में गूंज उठी। उसके पिघलने से लाल लाल तरल पदार्थ कक्ष की फर्श पर फैल रहा था। कम्प्यूटर 'सॉस` बन चुका था। राजा ने कम्प्यूटर की-बोर्ड पर फिर दृष्टि डाली....वह देखकर मुस्कुरा उठा ''वहाँ पर उसने घबराहट में इलेक्ट्रोसारस की जगह पर इलेक्ट्रोसॉस प्रिंट कर दिया था। 

q परिसर कोठी , काके बाबू देवकाली मार्ग, फैजाबाद 

qqq

 
 
पत्रिका में सुधार हेतु आप अपने सुझाव हमें ई-मेल के माध्यम से भेज सकते है।
साईट का निर्माण एवं रखरखाव आईसेक्ट वेब सेन्टर द्वारा किया गया है।