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              इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए अंक 194,वर्ष 23,जुलाई 2010
 
 
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नॉलेज कार्नर

ये भी हैं करियर के ऑप्शन

हर साल देश के विभिन्न संस्थानों से 30 लाख ग्रेजुएट्स और सात लाख पोस्ट ग्रेजुएट्स पास होकर निकलते हैं। ऐसे में पढ़ाई के बाद पहला प्रश्न होता है जॉब? कुछ स्टूडेंट्स जॉब पाने में कामयाब रहते हैं, तो बड़ी संख्या में जॉब तलाश में लगे रहते हैं। ऐसे में कॉलेज फ्रेशर्स का जॉब ओरिएंटेड कोर्सेज की ओर अधिक झुकाव होता है। हाल ही में विकास योजनाओं के बजट में हो रही बढ़ोत्तरी, निर्माण कार्यों में आई तेजी और सरकारी व मल्टीनेशनल कंपनियों का गांवों की ओर रुख करना, सभी स्तरों पर जॉब के नए अवसर उत्पन्न कर रहा है। आप भी अच्छे जॉब्स चुनकर अपना शानदार भविष्य बनाएं।

रिटेल मार्केट

मंदी ने कुछ समय के लिए रिटेल सेक्टर को प्रभावित अवश्य किया है, पर अभी भी इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के लिए संभावनाओं की कमी नहीं है। कमोबेश सभी बड़े रिटेलर्स अपने विस्तार की योजना बना रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011 तक इस क्षेत्र में 22 लाख लोगों की जरूरत होगी। रिटेल मैनेजमेंट में डिप्लोमा करने के बाद स्टूडेंट्स यहां कस्टमर सपोर्ट असिस्टेंट, स्टोर सुपरवाइजर, टीम लीडर, स्टोर मैनेजर, एरिया स्टोर मैनेजर के तौर पर काम कर सकते हैं। महिलाओं के लिए इस क्षेत्र में अधिक अवसर हैं। बतौर स्टोर सुपरवाइजर और अस्सिटेंट स्टोर मैनेजर आप 15 से 20 हजार रुपए तक कमा सकते हैं। अच्छे संस्थान से रिटेल मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री करने वालों के लिए सैलरी पैकेज तीन से चार लाख रुपए तक हो सकता है।
कोर्स : प्रवेश के इच्छुक रिटेल मैनेजमेंट, रिटेल ऑपरेशन, रिटेल सर्विस, विजुअल मर्चेंटाइजिंग, प्रोफेशनल रिटेलिंग स्किल्स, फ्रंटलाइन सेल्स में डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं। इसके लिए हायर सेकंडरी परीक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी है। साथ ही आपकी अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ होनी चाहिए।

'बीएफएसआई'
करियर का पुख्ता हिस्सा

सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों ही लिहाज से जिस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नौकरी की संभावनाएं हैं, वह है बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विस और इंश्योरेंस यानी बीएफएसआई। आंकड़ों की मानें तो बीएफएसआई सेक्टर में आने वाले पांच सालों तक हर साल 10 लाख से अधिक नौकरियां उत्पन्न होगी। अकेले इंश्योरेंस सेक्टर में पांच लाख से अधिक जॉब उत्पन्न होंगे। बैंकिंग में प्रोबेशनरी ऑफिसर व क्लर्क, तो इंश्योरेंस सेक्टर में एजेंट्स की अधिक मांग रहेगी। सीए, सीएस, एमबीए, एकाउंटेंट आदि के लिए भी अवसर होंगे। वित्त मामलों की समझ, विश्लेजाण क्षमता तथा अच्छा व्यवहार कौशल इस क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए जरूरी है। अधिकतर बैंक व इंश्योरेंस कंपनियां क्लैरिकल पदों पर स्नातकों को वरीयता दे रही हैं। इतना ही नहीं, इस क्षेत्र में काम कर रहे 65 प्रतिशत लोग परास्नातक हैं। ग्रेजुएशन के बाद स्पेशलाइज्ड कोर्स करने पर एंट्री व मिडल लेवल नौकरियां पाने में आसानी रहती है। यहां रिक्रूटमेंट लिखित परीक्षा व इंटरव्यू परीक्षा के आधार पर होता है। इंश्योरेंस सेक्टर में एजेंट्स के अलावा जूनियर सेल्स मैनेजर, सेल्स मैनेजर, फाइनेंशियल सर्विस कंसल्टेंट व सीनियर सेल्स मैनेजरों की नियुक्ति की जाती है।
कोर्स : बैंकिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज, पीजी डिप्लोमा इन इंश्योरेंस एंड रिस्क मैनेजमेंट, इंश्योरेंस मैनेजमेंट, सर्टिफिकेट कोर्स इन एकाउंटिंग एंड टेक्नीशियन, फाइनेंशियल मैनेजमेंट, प्लानिंग एंड वेल्थ मैनेजमेंट आदि में पीजी व सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं।

सबको प्यारा हेल्थ केयर

बड़े कॉरपोरेट घरानों के हेल्थ केयर सेक्टर में निवेश और भारत में कम कीमतों पर उपलब्ध उच्च स्तरीय मेडिकल सुविधाएं इस क्षेत्र में विकास को बढ़ावा दे रही हैं। टेक्नो पार्क एडवाइजर की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 तक भारतीय हेल्थ केयर इण्डस्ट्री 75 अरब डॉलर की हो जाएगी। फिलहाल भारत में 6 लाख डॉक्टर्स और 10 लाख नर्सों की कमी है। आंकड़ों के अनुसार विश्व में हर साल 20 लाख नर्सों की मांग की जाती है, भारत में यह संख्या 80 हजार है। फार्मा सेक्टर जहां पूरी तरह मंदी प्रूफ है, वहीं क्लीनिकल रिसर्च के क्षेत्र में भी प्रोफेशनल्स की संख्या दस हजार से 50 हजार हो जाने की उम्मीद है। ऐसे में बायोसाइंस स्नातक और लाइफ साइंस स्नातकों के लिए अच्छी संभावनाएं उत्पन्न होंगी। एमबीबीएस, एमडी, एमएस स्टूडेंट्स आदि मेडिकल प्रोफेशनल्स के अलावा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स, फार्मेसी कंसल्टेंट, केमिस्ट एंड मेडिकल साइंटिस्ट, फिटनेस एक्सपर्ट, न्यूट्रीशन व डाइटेटिक्स एक्सपर्ट की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। फिटनेस के प्रति लोगों में बढ़ती जागरूकता ने फिटनेस को एक आकर्षक कॅरियर का रूप दे दिया है। फिटनेस व फिजिकल ट्रैनिंग में विशेषज्ञता रखने वाले स्टूडेंट्स अपना जिम या फिटनेस सेंटर भी खोल सकते हैं अथवा पर्सनल ट्रेनर, थेरेपिस्ट, स्पोर्ट्स मेडिसिन, स्पोर्ट्स कोच, एथलेटिक ट्रेनर व न्यूट्रीनिस्ट के तौर पर नौकरी सकते हैं।
कोर्स : क्लीनिकल रिसर्च एंड क्लीनिकल डाटा मैनेजमेंट, बीएससी नर्सिंग व ऑनकोलॉजी नर्सिंग, फिटनेस, न्यूटिःशन व डाइटेटिक्स और फिटनेस मैनेजमेंट के डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्सेज कर सकते हैं।

अवसरों का खजाना मीडिया

विशेषज्ञों के अनुसार 2011 तक इस क्षेत्र की क्षमता में दोगुनी वफद्धि होगी। 17.1 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे विज्ञापन उद्योग की ही बात करें तो हर साल इस क्षेत्र में लगभग 2500 नए लोगों की मांग होती है। फिक्की एंड केपीएमजी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2013 तक 1052 अरब रुपए की होने की संभावना है। इस क्षेत्र के जानकार रिटेल कम्युनिकेशन व कन्वर्जेंस (न्यू मीडिया) के क्षेत्र में भी एजेंसी, फिल्म आदि में काम कर सकते हैं।
कोर्स : मास कम्युनिकेशन, वीडियो एडिटिंग, साउंड रिकार्डिंग, रेडियो प्रोडक्शन, टीवी ग्राफिक्स व एनिमेशन, टीवी जर्नलिज्म एंड एनिमेशन, टीवी जर्नलिज्म, मास मीडिया रिसर्च एंड प्लानिंग, न्यूज रीडिंग, कैमरा एंड लाइटिंग तकनीक, मीडिया मैनेजमेंट, एडवरटाइजिंग एंड मार्केटिंग कम्युनिकेशंस, फाइन आर्ट्स एंड कम्युनिकेशन डिजाइन आदि में डिग्री, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं।

तेजी से उभरता क्षेत्र हॉस्पिटैलिटी

भारतीय हॉस्पिटैलिटी इण्डस्ट्री हर वर्ष 20 से 30 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। स्पेशलाइज्ड नॉलेज रखने वालों के लिए होटल मैनेजमेंट व खुद का बिजनेस खोलने के रूप में भी काफी संभावनाएं हैं। होटल ऑपरेशन ट्रैनी के रूप में सात से दस हजार रुपए के वेतन से शुरुआत करके मैनेजर, जनरल मैनेजर के तौर पर 60 से 70 हजार रुपए तक कमा सकते हैं। हाउस कीपिंग, होटल ऑपरेशन, शेफ, फ्रंट ऑफिस, हॉस्पिटल व एयरलाइंस केटरिंग में नौकरी के अनेक अवसर हैं।
कोर्स : डिप्लोमा इन होटल एंड हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट, डिप्लोमा इन फूड प्रोडक्शन एंड बेवरेजेस सर्विस, डिप्लोमा इन फ्रंट ऑफिस एंड हाउस कीपिंग आदि कोर्स कर सकते हैं।

शिक्षा है उज्जवल भविष्य

पूरी तरह सुरक्षित और आकर्षक संभावनाओं वाला क्षेत्र। प्राइवेट शिक्षा के क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश, नया वेतन आयोग तथा सरकार द्वारा नए शैक्षिक संस्थान खोलने संबंधी योजनाएं स्टूडेंट्स का ध्यान बड़े पैमाने पर इस ओर आकर्षित कर रही हैं। ऑनलाइन एजुकेशन, कोचिंग, ई-लर्निंग, स्पेशल एजुकेशन, कॅरियर कंसल्टेंसी ने इस क्षेत्र को और भी व्यापक बना दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार स्कूल व यूनिवर्सिटी दोनों स्तरों पर शिक्षकों की भारी मांग उत्पन्न होगी।


कोर्स : शैक्षिक योग्यता के अलावा ईटीटी, एनटीटी, विशिष्ट बीटीसी, बीएड करना आपकी उम्मीदवारी को बढ़ा देगा। एजुकेशन एडमिनिस्टःsशन में भी अवसरों की कमी नहीं है। इन दिनों एजुकेशन सेक्टर में कई अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।

ये भी क्षेत्र में बढ़िया

अधिकांश सेक्टरों में तेजी की बयार आ रही है। घरेलू खपत पर नजर डालें, तो कुछ खास क्षेत्र ऐसे हैं, जहां कॅरियर की अच्छी संभावनाएं दिख रही हैं। भारत की 12,600 करोड़ रुपए की ब्यूटी इण्डस्ट्री सालाना 30 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। जहां कॉस्मेटोलॉजिस्ट, फिटनेस इंस्टःक्टर, डाइटीशियन और स्टाइलिस्ट के रूप में आप अपना भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं। फार्मा भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इंश्योरेंस इण्डस्ट्री में इंश्योरेंस एजेंट के अलावा मार्केटिंग प्रोफेशनल, सर्वेयर, अंडरराइटर्स और एक्चुरीज आदि की भी खासी डिमांड है। इसी तरह यदि मीडिया की बात करें, तो यह सेक्टर सिर्फ न्यूज एंकरिंग और रेडियो जॉकी (आरजे) तक सीमित नहीं है। यहां एडिटोरियल, डिजाइनिंग, प्रोडक्शन और रिपोर्टिंग से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स की काफी जरूरत है। इस साल लगभग 50 चैनल और 100 से ज्यादा रेडियो स्टेशन शुरू होने की संभावना है। टेलीकॉम क्षेत्र में भी नेटवर्क इंजीनियर, नेटवर्क प्लानर, मार्केटिंग एक्सपर्ट्स और कस्टमर सर्विस से जुड़े लोगों के लिए आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। इंफ्रास्टःक्चर क्षेत्र में सरकार की 50 से 60 हजार करोड़ रुपए खर्च करने की योजना है, जहां सिविल इंजीनियर, आर्किटेक्ट, मैनेजर, रिएलिटी प्रोफेशनल्स के लिए मांग उत्पन्न होगी। शिक्षा के क्षेsत्र में ऐसे लोगों की मांग होगी, जो पुराने ढर्रे से अलग कुछ नया करना चाहते हैं एवं शिक्षा के क्षेत्र में सफलता हासिल करना चाहते हैं।

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दस रास्ते, एक नौकरी

इन 10 चरणों का ध्यान रखा जाए तो जॉब खोजने में पर्याप्त मदद मिल सकती है। जैसा कि चीनी कहावत है 'हजारों मील की लंबी यात्रा पहले कदम से शुरू होती है।'

-लीजा लेरर

वास्तविकता को समझना

जॉब कैसे खोजते हैं, इसके साथ दिमागी रूप से जॉब के लिए कितने तैयार हैं यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जानें कि जॉब हंटिंग का मतलब क्या है? जैसे स्वयं को व अपने कौशल को प्रस्तुत करना। नियोक्ता को बताना कि आपकी दक्षता कैसे उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। जॉब पाना एक काम है, जिसमें समय लगता है। जब तक सफलता न मिले, हार न मानें।

स्वयं का आकलन

अपनी पसंद, क्षमताओं, मूल्यों, आवश्यकताओं और कार्य पद्धति को जानें और उन्हें लिख लें। अगर आप अपने व्यक्तित्व को अच्छी तरह पहचान लेंगे तो बहुत जल्दी सही काम और सही नियोक्ता को खोज निकालेंगे।

उद्देश्य का निर्धारण

आप किस तरह का ओहदा चाहते हैं? किस तरह के काम में आपको आनंद आएगा? किस तरह का नियोक्ता आपके लिए उपयुक्त होगा? किस शहर में काम करने में सहूलियत होगी? इन बातों को पहले ही समझ लेना अच्छा होगा।

पोर्टफोलियो की तैयारी

दस्तावेजों को तैयार व इकट्ठा करें, जैसे : सैम्पल कवर लैटर, लैटर ऑफ इंक्वायरी या एप्लीकेशन। फॉलो-अप, एक्सेप्टेंस और रिजेक्शन लैटर। आपका रिज्यूमे लैटर ऑफ रेक्मेंडेशन स्कूल या कॉलेज के सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री अवॉर्ड और साइटेशन बिजनेस कार्ड।

सहयोग समूह का निर्माण

उन लोगों का समूह तैयार करें जो नौकरी खोजने में मदद कर सकें। दोस्तों, रिश्तेदारों और सहयोगियों से संपर्क बनाए रखें। हर व्यक्ति को अलग कार्य सौंपें जैसे दोस्तों को कंपनी के बारे में जानने की जिम्मेदारी तो रिश्तेदारों को उस कंपनी में उपयुक्त व्यक्ति से नेटवर्किंग का काम।

नियोक्ताओं का शोध

उन नियोक्ताओं को खोजिए जिन्हें आपके कौशल की आवश्यकता है और फिर उन लोगों के नाम हासिल करें जो आपको वह ओहदा दिला सकते हैं, जो आप चाहते हैं।

आवेदन की तैयारी

सभी महत्वपूर्ण कवर लैटर, रिज्यूमें और उपयोगी दस्तावेज तैयार करें। यह याद रखें कि आपके दस्तावेज अनौपचारिक न हों क्योंकि इनसे प्रोफेशनल दुनिया की शुरुआत होती है।

साक्षात्कार से पहले

साक्षात्कार के लिए जाने से पहले यह जानें कि कंपनी के उद्देश्य क्या हैं और आप उसे लक्ष्य हासिल करने में कैसे मदद कर सकते हैं। साक्षात्कार के लिए सही तरीके से तैयार हों।

नौकरी का प्रस्ताव

नौकरी के प्रस्ताव को स्वीकारने या मना करने के लिए उपयुक्त ढंग से तैयार किया गया पत्र लिखें। अगर प्रस्ताव स्वीकार हो तो कंपनी में काम करने की इच्छा जाहिर करते हुए सूचित करें कि आप कब से काम शुरू कर रहे हैं। अगर प्रस्ताव पसंद न हो तो इंकार के लिए भी पत्र लिखें कि भविष्य में आपको दुबारा अवसर देने के बारे में सोचना आपके लिए कितना महत्वपूर्ण होगा।

प्रक्रिया का मूल्यांकन

अगर आपको मनपसंद नौकरी नहीं मिल पा रही तो पूछें क्या सभी आवश्यक तैयारियां कीं? क्या सभी चरणों को अपनाया? क्या सुधार करें? फायदा न मिले तो किसी प्रोफेशनल की सहायता लें।

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