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              इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए अंक 188,वर्ष 22,फरवरी 2010
 
 
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जैव विविधता  : पृथ्वी पर जीवन का आधार

q मनीष मोहन गोरे
 

2010 को संयुक्त राष्ट्र ने 'अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता वर्ष` घोषित किया है। इसके अंतर्गत जैवीय विविधता और पृथ्वी पर जीवन के मूल्य को समझने के लिए पूरी दुनिया में अनेकानेक कार्यक्रम समूचे वर्ष चलाए जाएंगे। इस विशिष्ट वर्ष की अधिघोषणा संयुक्त राष्ट्र आम सभा की 20 दिसम्बर 2006 ई. में हुई 83वीं बैठक में की गई (रिजोल्यूशन 61/203) थी।

अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता वर्ष के संचालन और समन्वय की जिम्मेदारी कन्वेन्शन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी (CBD) को दी गई है। सीबीडी एक 'अन्तर्राष्ट्रीय सहमति` है जिसने 1992 में रीओ डी जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी सम्मेलन (अर्थ समीट) में आकार ग्रहण किया था। इस सहमति का उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित करना और इससे होने वाले लाभों का स्थायी तौर पर उपयोग और समान रूप से साझा करना है। सीबीडी के वर्तमान सदस्य विश्व के 193 देश हैं।

हमारी पृथ्वी की जैव विविधता मानवता के आर्थिक एवं सामाजिक विकास का मूल आधार है। इसलिए यह हमारी वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है। यहां यह जानना भी प्रासंगिक है कि जीव जातियों और इकोसिस्टम के सामने आज जो खतरे और चुनौतियां हैं वो पहले नहीं थीं। मानवीय गतिविधियों के परिणामस्वरूप जीव जातियों का विलोपन बड़ी तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसे रोकना जैव विविधता के संरक्षण के लिए आज बेहद जरूरी हो गया है।

जीवजातियों और इकोसिस्टम के खतरों को दूर करने की जुगत के नाम पर ही संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनइपी) ने नवंबर 1988 में जैव विविधता के लिए विशेषज्ञों का एक अस्थाई कार्य दल बनाया और इस समूह का कार्य जैव विविधता पर एक अन्तर्राष्ट्रीय समागम/सहमति की आवश्यकता की टोह लेना था। जल्द ही मई, 1989 में यूएनइपी ने जैव विविधता के संरक्षण एवं इसके स्थाई उपयोग हेतु एक अन्तर्राष्ट्रीय विधिक प्रपत्र के निर्माण के लिए तकनीकी व विधिक विशेषज्ञों के एक अस्थाई कार्यदल की स्थापना की गई।

फरवरी, 1991 तक यह अस्थाई दल अन्तर सरकारी वार्ता समिति में तब्दील हो गया और 22 मई, 1992 को जैव विविधता पर केंदित नैरोबी सम्मेलन में सीबीडी ने अपनी संरचना को अंतिम रूप दिया।

इस दिवस के महत्व को ध्यान में रखते हुए 22 मई को पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। पर्यावरण और विकास पर केंदित संयुक्त राष्ट्र पृथ्वी शिखर सम्मेलन (5 जून, 1992) में सीबीडी के प्रपत्र पर हस्ताक्षर किए गए। यह प्रपत्र पूरे विश्व के समक्ष हस्ताक्षर के लिए 4 जून, 1993 तक खुला रखा गया और तब तक 168 देशों ने हस्ताक्षर किए थे। सीबीडी 29 दिसंबर, 1993 को निम्नलिखित तीन उद्देश्यों के साथ प्रभावी हुई :

1. जैव विविधता संरक्षण।

2. स्थायी तौर पर जैव विविधता का उपयोग।

3. जैव विविधता के लाभों का समानता से साझा।

एक वाक्य में कह सकते हैं कि जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन के लिए इसलिए जरूरी है क्योंकि जैव विविधता ही इस ग्रह पर जीवन का आधार है।

जैव विविधता के निरंतर हास से पृथ्वी की प्राकृतिक संपदा और पारितंत्र में बहुत तेज गिरावट हो रही है। जीवाणु और फफूंद (कवक) दोनों ही निम्न श्रेणी के पौधे होते हैं जो कूड़े&कचरे/गंदगी को विघटित करके मिट्टी को उर्वर बनाते हैं। अगर ये जीव नष्ट हुए तो हमारे कृषि उत्पादन में कमी आ जाएगी। वहीं दूसरी तरफ प्रकृति में पाए जाने वाले तमाम कीट, चमगादड़ और पक्षी, फूलों में परागण की जैविक प्रक्रिया को सुनिश्चित करते हैं जिससे अंततः फल का निर्माण होता है। यदि इनकी संख्या में कमी आई तो  कृषि उत्पादन में कमी आएगी। अनेक प्राकृतिक स्रोतों से तकरीबन 42 फीसदी कैंसररोधी दवाएं बनाई जाती हैं और अगर हमारी पृथ्वी पर स्थित जैव विविधता में वर्तमान दर से हास होता रहा तो हम चुनौतियों से घिर जाएंगे।

हम अपने प्राकृतिक पर्यावरण की खूबसूरती और प्रचुरता को खोने के साथ&साथ उस पारिस्थितिकीय प्रक्रिया में भी रूकावट डाल रहे हैं जिस पर हमारा अस्तित्व टिका हुआ है। बगैर जैव विविधता के हम पृथ्वी पर किसी भी जीवन स्वरूप की कल्पना नहीं कर सकते हैं।

पृथ्वी की जैव विविधता को हो रही इसी सतत् हानि को रोकने और इस चुनौती से लड़ने के लिए वर्ष 2002 में विश्व के नेता जैव विविधता की हानि को वर्ष 2010 तक कम करने को कटिबद्ध हुए थे। जैव विविधता को बचाने की इस वैश्विक मुहिम को काउन्ट डाउन 2010 नेटवर्क नाम दिया गया है। इस नेटवर्क में पूरी दुनिया से करीब 969 पार्टनर हैं जिनमें सरकारी और गैर&सरकारी दोनों ही प्रकार की संस्थाएं हैं। सभी प्रकार के सार्वजनिक संस्थान, स्थानीय और राष्ट्रीय गैर सरकारी संस्थाएं इस मुहिम से जुड़ी हुई हैं। नेटवर्क का एक सक्रिय हिस्सा बनकर ये संस्थाएं अपने स्थानीय मुद्दों को ग्लोबल जैव विविधता के एजेंडे से जोड़ने का काम कर रही हैं और इस प्रकार जैव
विविधता संरक्षण के मसले पर एक अंतर्राष्ट्रीय बहस का मंच तैयार हो रहा है। काउन्ट डाउन 2010 के पार्टनर दुनिया के 60 से भी अधिक देशों में स्थित हैं। यूरोपीय, एशियाई, अमेरिकी और अफ्रीकी देशों में इस नेटवर्क के कई सारे केन्द स्थापित किए गए हैं। इस नेटवर्क का मूल उद्देश्य है पूरी दुनिया में जैव
विविधता के संरक्षण को लेकर जन जागरूकता पैदा करना। काउन्ट डाउन 2010 नेटवर्क संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता वर्ष 2010 का एक प्रमुख सहभागी बना हुआ है और इस नेटवर्क के पूरी दुनिया में फैले 900 से अधिक पार्टनर इस वर्ष का लक्ष्य हासिल करने के लिए जैव विविधता से जुड़ी हर छोटी&बड़ी सूचनाओं का परस्पर आदान&प्रदान करते रहेंगे।

जैव विविधता के संरक्षण से पृथ्वी के अनमोल जीवित पर्यावरण को बचाया जा सकता है और यदि पृथ्वी पर मौजूद पर्यावरण को बचा लिया तो लंबे समय तक पेड़&पौधे, जंतु और हम मनुष्य इस पृथ्वी पर अपना अस्तित्व कायम रख सकते हैं। हमें दो में से किसी एक का चुनाव करना होगा& अंधाधुंध विकास या फिर पृथ्वी पर अपना सुखद व सुदीर्घ अस्तित्व। फैसला हम मनुष्यों को ही करना है। चूंकि पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवों में मनुष्य ही बुद्धिमान है इसलिए पृथ्वी, इसकी वनस्पतियां, जंतुओं और साथ ही स्वयं के लिए उसे अधिक फिक्रमंद होना चाहिए और इसके लिए उसे अपनी बुद्धि व विवेक से उचित फैसला करना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव कोफी अन्नान ने अगस्त, 2005 में जैव विविधता और स्वास्थ्य के एक अन्तर्राष्ट्रीय मंच से यह संदेश दिया था कि जैव विविधता के सतत् संरक्षण और उपयोग में विफल होने की दशा में हमारे हाथ विघटित पर्यावरण, नई व विकराल बीमारियें और गरीबी के अलावा कुछ नहीं आएगा।

जैव विविधता हमारे ग्रह पृथ्वी पर जीवन का प्रतीक है। इसका उचित संरक्षण करके इस प्राकृतिक पूंजी को अपनी भावी पीढ़ी को सौंपना हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है। हमें इस जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। दुनिया के हर व्यक्ति को इस जिम्मेदारी को याद दिलाना अंतरराष्ट्रीय जैव
विविधता वर्ष का अभीष्ट है। 

विज्ञान प्रसार, ए50., इन्स्टीट्यूशनल एरिया, सैक्टर&62,
नोएडा 201307 (उत्तर प्रदेश)

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