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भारतीय
वैज्ञानिक :अपनी
खोजों से
बदली दुनिया
शून्य
से
ब्रह्मांड
की उत्पत्ति
के रहस्यों
की परतें
हमने खोजी
हैं। गणित की
बारीकियों
से लेकर
आधुनिक
चिकित्सा
विज्ञान के
प्लास्टिक
सर्जरी का
मूल भारत के
पुरातन
ग्रंथों में
मिलता है। आज
भारत
दुनियाभर
में आईटी और
उत्पादन
क्षेत्र में
तेज गति से
बढ़ती
अर्थव्यवस्था
के लिए जाना
जाता है। पर,
इस पवित्र
भूमि ने
दुनिया को कई
होनहार
वैज्ञानिक
भी दिए,
जिन्होंने
आधुनिक
विज्ञान को
नई दिशा दी।
भारत भूमि से
जुड़े
वैज्ञानिकों
की खोजों की
नई दुनिया न
केवल खरी है,
बल्कि उसने
भविष्य में
होने वाले
शोधों को भी
आधार दिया है
। आज दुनिया
के विभिन्न
शोध
संस्थाओं
में भारतीय
वैज्ञानिकों
की तूती
बोलती है।
आइये,
विज्ञान की
दुनिया में
हलचल मचाने
वाले
भारतीयों के
बारे में
जाने :

सुब्रह्मण्यम
चंद्रशेखर : वर्ष
1983 में भौतिक
शास्त्र के
लिए नोबेल
पुरस्कार
विजेता डॉ.
सुब्रह्मण्यम
चंद्रशेखर खगोल भौतिक
शास्त्रा
थे। उनकी
शिक्षा
चेन्नई के
प्रेसीडेंसी
कॉलेज में
हुई । वे
नोबेल
पुरस्कार
विजेता सर सी.वी.
रमन के भतीजे
थे।
खोज
: श्री
चंद्रशेखर ने 'व्हाइट
ड्वार्फ'
यानी श्वेत
बौने नाम के
नक्षत्रों
के बारे में
सिद्धांत का
प्रतिपादन
किया। इन
नक्षत्रों
के लिए
उन्होंने जो
सीमा
निर्धारित
की है, उसे 'चंद्रशेखर सीमा` कहा
जाता है।
उनके
सिद्धांत से
ब्रह्मांड
की उत्पत्ति
के बारे में
अनेक
रहस्यों का
पताचला।

चंद्रशेखर
वेंकटरमन :भौतिक
शास्त्र के
लिए नोबेल
पुरस्कार
विजेता पहले
भारतीय डॉ.
चंद्रशेखर वेंकटरमन
थे। उन्हें 1930
में यह
पुरस्कार
मिला। उनका
जन्म
तमिलनाडु
में
तिरूचिरापल्ली
के पास
तिरूवाइक्कावल
में हुआ था।
उन्हें सर की
उपाधि से भी
सम्मानित
किया गया।
रमन पहले
एशियाई भी थे,
जिन्हें
विज्ञान में
नोबेल
पुरस्कार
मिला।
खोज: श्री
वेंकटरमन ने
अनुसंधान
में इस बात
का पता लगाया
कि किस तरह
प्रकाश में
अन्य तरंग,
लंबाई की
किरणें भी
मौजूद रहती
हैं। उनकी
खोज को 'रमन
प्रभाव` के
नाम से भी
जाना जाता
है। 1928 में की
गई इस खोज से
पारदर्शी
माध्यम से
होकर गुजरने
वाली प्रकाश
किरणों में
आवफत्ति
परिवर्तन की
व्याख्या की
गई।

डॉ.
जगदीशचन्द्र
बसु : इन्हें
भौतिकी, जीवन
विज्ञान,
वनस्पति
विज्ञान तथा
पुरातत्व का
गहरा ज्ञान
था। डॉ.
जगदीशचन्द्र
बसु का जन्म 30
नवंबर, 1858 को
बंगाल में
मेमनसिंह
में हुआ था।
उन्होंने
सेंट जैवियर
महाविद्यालय,
कलकत्ता से
स्नातक की
उपाधि
प्राप्तकी।
खोज: डॉ. बसु पहले
वैज्ञानिक
थे
जिन्होंने
रेडियो और
सूक्ष्म
तरंगों की
प्रकाशिकी
पर कार्य
किया।
वनस्पति
विज्ञान में
इन्होंने कई
महत्वपूर्ण
खोजें कीं।
ये भारत के
पहले
वैज्ञानिक
शोधकर्ता
थे। इन्हें
रेडियो
विज्ञान का
पिता माना
जाता है।
इन्होंने एक
यंत्र
क्रेस्कोग्राफ
का आविष्कार
किया, जिससे
विभिन्न
उत्तेजकों
के प्रति
पौधों की
प्रतिक्रिया
का अध्ययन
किया गया।
उन्होंने
सिद्ध किया
कि
वनस्पतियों
और पशुओं के
ऊतकों में
काफी समानता
है।

श्रीनिवास
रामानुजन : गणित
के क्षेत्र
में
रामानुजन
किसी भी
प्रकार से
गौस, यूलर और
आर्कमिडीज
से कम नहीं
थे। औपचारिक
शिक्षा न
लेने के
बावजूद
श्रीनिवास
अयंगर
रामानुजन ने
उच्च गणित के
क्षेत्र में
काफी
विलक्षण
खोजें कीं।
महानतम
गणितज्ञ
रामानुजन का
जन्म 22
दिसम्बर 1887 को
तमिलनाडु
में हुआ था।
खोज
: रामानुजन
के प्रमुख
गणितीय
कार्यों में
एक है, किसी
संख्या के
विभाजनों की
संख्या
ज्ञात करने
के फॉर्मूले
की ााs ज ।
रामानुजन के
फॉर्मूले से
किसी भी
संख्या के
विभाजनों की
संख्या
ज्ञात की जा
सकती है ।
उदाहरण के
लिए संख्या 2000
के कुल
विभाजन होते
है, 3972999029388। हाल
ही में भौतिक
विज्ञान की
नई थ्योरी 'सुपरस्टिंग
थ्योरी` में
इस फॉर्मूले
का काफी
उपयाग हुआ है
।

सत्येंद
नाथ बोस : भौतिकी के
क्षेत्र में
सत्येंद नाथ
बोस ऐसा नाम
है, जिन्हें
नोबेल
पुरस्कार
नहीं मिला
लेकिन उनके
सिद्धांतों
पर काम करने
वालों को यह
सम्मान
मिला। 1
जनवरी 1994 को
कलकत्ता में
जन्में
सत्येंद नाथ
बोस ने
कलत्ता विवि
से 1915 में
एमएससी करने
के बाद
आविष्कारों
की दुनिया
मेंकदमरखा।
खोज
: भौतिकी
क्षेत्र में
उनके द्वारा
प्रतिपादित
सिद्धांतों
का नाम 'बोसन`
पड़ा। उनके
साथ
आइंस्टीन ने
भी काम किया।
उनके काम `बोसन
बोस
आइंस्टीन
स्टैटिक्स`
और बोस
आइंस्टीन
कंडेंसेट` की
अवधारणाओं
पर हुए
अनुसंधान को
एक से अधिक
नोबेल
पुरस्कार
मिले।
डॉ.
वलिया हमजा : लैटिन
अमेरिका के
कई देशों से
होकर बहने
वाली दुनिया
की सबसे बड़ी
नदियों में
से एक अमेजन
नदी के नीचे
एक ओर नदी
होने का पता
डॉ. बलिया
हमजा ने
लगाया है। डॉ.
हमजा ने 40 साल
से भी अधिक
समय तक इस
क्षेत्र में
अनुसंधान
किया।
खोज
: वैज्ञानिकों
ने भारतीय
मूल के
भूगर्भ
वैज्ञानिक
डॉ. वलिया
हमजा की
अगुवाई में
खोजी गई इस
नदी का नाम
उन्हीं के
नाम पर 'हमजा '
रखा।
ब्राजील की
राष्ट्रीय
वेधशाला के
वैज्ञानिकों
ने करीब 6
हजार किमी
लंबी इस
भूमिगत नदी
का पता लगाया
है ।

डॉ.
जयंत एस
वैद्य : ब्रिटेन में
भारतीय मूल
के
वैज्ञानिक
डॉ. जयंत एस.
वैद्य ने
स्तर कैंसर
के इलाज में
एक ाड़ी
सफलता हासिल
की है।
उन्होंने
इलाज के लिए
छ: सप्ताह
चलने वाली
रेडियोथैरेपी
को महज आधा
घंटे की 'सिंगल
डोज` में बदल
दिया।
खोज
: नई तकनीक
में
रेडियोथैरेपी
उपकरण को
पूरे स्तन
में डालने के
बजाए केवल
कैंसर
प्रभावित
स्थान पर ही
डाला जाता
है।
यूनिवर्सिटी
कॉलेज लंदन
में कार्यरत
जयंत और उनके
सहयोगियों
ने इस तकनीक
को 'टारगेटस
इंट्रा
ऑपरेटिव
रेडियोरेपी`
(टीआईआर) नाम
दिया है ।
वर्तमान
तकनीक में
पूरे स्तन पर
रेडियोएक्टिव
किरणें
पड़ने की
वजह से शरीर
के अन्य
महत्वपूर्ण
अंगों के भी
प्रभावित
होने का खतरा
रहता है।

डॉ.
अर्चना
शर्मा : जेनेवा
में दुनिया
की सबसे बड़ी
भूमिगत
प्रयोगशाला
सर्न में
स्टॉक
फिजिसिस्ट
के रूप में
कार्यरत डॉ.
अर्चना
प्रोटॉन बीम
की टक्कर
वाले प्रयोग
में शामिल
अकेली
भारतीय
महिला
वैज्ञानिक
हैं।
खोज
: प्रयोग से
कहीं कोई
ब्लैक होल
पैदा नहीं
हुआ और धरती
उसमें समा
नहीं गई।
यहाँ
दुनियाँ के
सबसे बड़े
पार्टिकिल
कोलाइडर
एलएचसी की
सुंगनुमा
ट्यूब में
लगभग रोशनी
की रप्तार से
चक्कर काट
रहे
प्रोटांस की
आपस में
टक्कर करवाई
गई। इस
प्रयोग की
सफलता से
ब्रह्मांड
की उत्पत्ति
के रहस्य से
पर्दा उठ
सकता है ।
हरगोविंद
खुराना : प्रसिद्ध
भारतीय
अमेरिकी
वैज्ञानिक
डॉ. हरगोविंद
खुराना का
मैसाचुसेट्स
के कॉनकॉर्ड
में निधन हो
गया । खुराना
को 1968 में
चिकित्सा के
क्षेत्र में
नोबेल
पुरस्कार से
सम्मानित
किया गया था।
वह 89 वर्ष के
थे। वह
एमआईटी में
जीवन
विज्ञान एवं
रसायन
विज्ञान के
प्रोफेसर थे
। उन्हें 1968
में दो अन्य
वैज्ञानिकों
के साथ नोबेल
पुरस्कार से
सम्मानित
किया गया था।
उन्हें यह
सम्मान आर.एन.ए.
के
न्यूक्लियोटाइड
सीक्वेंस को
सुलझाने और
जेनेटिक कोड
को समझने के
लिए दिया गया
था। उस समय
वह
विसकोंसिन
विश्वविद्यालय
में कार्यरत
थे। खुराना
का जन्म
एकीकृत भारत
के पंजाब
प्रांत के
रायपुर में 1922
में हुआ था।
वह इलाका अब
पाकिस्तान
में है। डॉ.
खुराना का
निधन हाल ही
में हुआ है।
खोज
: खुराना को
एक ऐसे
वैज्ञानिक
के तौर पर
जाना जाता है
जिन्होंने
डीएनए रसायन
में अपने
उम्दा काम से
जीवन रसायन
के क्षेत्र
में क्रांति
ला दी।
विसकोंसिन‚मैडिसन
विश्वविद्यालय
में जीवन
रसायन के
प्रोफेसर
असीम अंसारी
ने कहा कि
विसकोंसिन
में 1960 से 1970 में
जो काम
उन्होंने
किया वह नई
वैज्ञानिक
खोजों और
प्रगति को
प्रेरित
करना जारी
रखेहुएहैं।
वेंकटरमण
रामकृष्णन: भारत
में जन्में
अमेरिकी
नागरिक
वेंकटरमण
रामकृष्णन
को ब्रिटेन
में नाइटहुड
की उपाधि से
सम्मानित
किया गया है।
वेंकी के नाम
से मशहूर
वैज्ञानिक
वेंकटरमण को
आण्विक
विज्ञान में
उल्लेखनीय
योगदान के
लिए 2009 में
रसायन
विज्ञान का
नोबेल
पुरस्कार
प्रदान किया
गया था। 2010 में
उन्हें भारत
सरकार की ओर
से पद्म
विभूषण दिया
जाना
ब्रितानी
समाज में
बाहरी लोगों
के योगदान को
दर्शाता है,,
रामकृष्णन
का जन्म
तमिलनाडु के
चिदंबरम में
हुआ था
उन्होंने
बड़ौदा
विश्वविद्यालय
ओहियो,
कैलिफोर्निया
और डियागो
विश्वविद्यालय
में पढ़ाई
की।
साभार
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