|
तकनीकी
वर्ष
2011 का तकनीकी
सफर
कालीशंकर
वरिष्ट वैज्ञानिक , इसरो
विज्ञान
वृतांत :
वर्ष
अंतरिक्ष
अन्वेषण और
अन्तरिक्ष
विज्ञान की
दफष्टि से 2011
वर्ष विश्व
और भारत
दोनों के
लिए ही बहुत
महत्वपूर्ण
रहा। इस
वर्ष
अंतरिक्ष
अन्वेषण के
क्षेत्र
में दो
महत्वपूर्ण
घटनाएँ
घटित हुईं।
ये
महत्वपूर्ण
घटनाएँ थीं
अमरीकी
स्पेस शटल
का
रिटायरमेन्ट
तथा यूरी
गगारिन की
ऐतिहासिक
अंतरिक्ष
यात्रा की 50वीं
वर्षगांठ।
इस वर्ष
अंतर्राष्ट्रीय
अन्तरिक्ष
स्टेशन 'अल्फा'
के निर्माण
कार्य में
और भी
प्रगति
हुई। भारत
में भी इस
वर्ष कई
महत्वपूर्ण
नीतभार
अंतरिक्ष
में भेजे
गये। कुछ
महत्वपूर्ण
मिशन‚बफहस्पति
ग्रह के लिए
'जूनो' मिशन
पफथ्वी के
चन्दमा के
लिए 'गेल'
मिशन, मंगल
ग्रह के लिए
'मंगल ग्रह
विज्ञान
प्रयोगशाला'
(एम.एस.एल),
रूसी मिशन 'फोबोस‚ग्रन्ट',
चीनी
अंतरिक्ष
स्टेशन
टायनगॉग 1 का
प्रमोचन
किया गया।
इसके अलावा
इस वर्ष
अनेक संचार
उपग्रह भी
प्रमोचित
किये गये
जिन्होंने
विश्व
संचार
क्षमता को
बढ़ाया।
यहाँ बारी-बारी
से हम सबके
बारे में
उल्लेख कर
रहे हैं :
स्पेस
शटल का
रिटायरमेंट
अंतरिक्ष
परिवहन के
रूप में
स्पेस शटल
एक अत्यधिक
सफल
अंतरिक्ष
परिवहन रहा
है। इसकी
प्रथम
उड़ान 12
अप्रैल 1981 (एस
टी एस1) को
तथा आखिरी
उड़ान (एस.टी.एस.‚135)
8 जुलाई 2011 को
सम्पन्न
हुई। 21
जुलाई 2011 को
स्पेस शटल
की आखिरी
उड़ान (जो कि
इसकी 135वीं
उड़ान थी)
पफथ्वी पर
वापस आई और
उसी के साथ
स्पेस शटल
युग का
समापन हो
गया। 30 वर्ष 3
महीने की
आपरेशनल
अवधि में
स्पेस शटल
की 135
उड़ानें
हुईं
जिनमें 2
उड़ानें (स्पेस
शटल
चैलेंजर
तथा स्पेस
शटल
कोलम्बिया)
कमश: 1986 और 2003
में
दुर्घटना
ग्रस्त हो
गई। अपनी
कुल अवधि
में स्पेस
शटल कुल 1331
दिन 8 घण्टा
अन्तरिक्ष
में रही तथा
पफथ्वी की
कुल 21158
पारिक्रमाएँ
कीं।
अंतर्राष्ट्रीय
अंतरिक्ष
स्टेशन के
निर्माण से
सम्बन्धित
समुचित
अनुभव
प्राप्त
करने के लिए
स्पेस शटल 9
बार रूसी
अंतरिक्ष
स्टेशन 'मीर
' से जुड़ी।
अंतर्राष्ट्रीय
अंतरिक्ष
स्टेशन के
निर्माण
में स्पेस
शटल की
प्रमुख
भूमिका रही
है।
यूरी
गगारिन की
प्रथम
मानवयुक्त
अंतरिक्ष
उड़ान की 50
वीं
वर्षगाँठ
12
अप्रैल 2011 को
यूरी
गगारिन की
प्रथम
ऐतिहासिक
अंतरिक्ष
उड़ान की 50
वीं
वर्षगांठ
सारी
दुनिया में
और विशेषकर
रूस में
बड़े धूम-धाम
से मनाई गई।
आज भले ही
यूरी
गगारिन इस
दुनिया में
नही है
लेकिन 12
अप्रैल 1961 को
वोस्टोक
अंतरिक्षयान
के द्वारा
की गई 108 मिनट
की
अंतरिक्ष
यात्रा
इतिहास के
पन्नों में
अमर हो गई
है। इस
उपलक्ष्य
में
व्रिटेन ने
एक कार्यकम
चलाया
जिसका नाम
था 'यूरी
गगारिन 50'।
इस अवसर पर 4
अप्रैल 2011 को
रूस ने अपना
एक
मानवयुक्त
अंतरिक्षयान
'सोयुज‚टी
एम ए‚21,
अंतर्राष्ट्रीय
अंतरिक्ष
स्टेशन के
लिए भेजा
जिसका नाम 'गगारिन'
रखा गया। 'यूरी
गगारिन 50'कार्यक्रम
का
शुभारम्भ
ब्रिटेन की
प्रथम और एक
मात्र
महिला
अंतरिक्ष
यात्री
हेलेन
शर्मन के
द्वारा
किया गया।
इस अवसर पर
शर्मन ने
अपने
उद्गार इस
प्रकार
प्रकट किये,
''उनसे
प्रेरणाऍ
प्राप्त
करने के
कारण यूरी
गगारिन को
अंतर्राष्ट्रीय
ताज से
सम्मानित
किया गया।
वे जहाँ भी
गये वहॉ पर
लोगों की
भीड़ उस
व्यक्ति की
एक झलक पाने
के लिए
इकट्ठा हो
गई
जिसनानवीय
क्षमताओं
को
अंतरिक्ष
अन्वेषण की
बुलन्दियों
तक
पहुँचाया।
अंतर्राष्ट्रीय
अंतरिक्ष
स्टेशन के
निर्माण की
प्रगति
वर्ष
2011 में
अन्तर्राष्ट्रीय
अंतरिक्ष
स्टेशन 'अल्फा
' के निर्माण
से
सम्बन्धित 5
मानवयुक्त
और 7
मानवरहित
उड़ाने
सम्पन्न
हुईं। इनका
विवरण
निम्न है :
मानव युक्त
उड़ानें
मानवयुक्त
उड़ानों के
द्वारा
वर्ष 2011 में 22
अंतरिक्ष
यात्री
अंतरिक्ष
में गये
जिनमें 2
महिलाऍ
थीं। ये
मानव युक्त
उड़ानें
निम्न हैं :‚
- स्पेस
शटल उड़ान
एसटीएस‚133 :इसका
प्रमोचन 24
फरवरी 2011 को
किया गया
तथा यह 19
मार्च 2011 को
पफथ्वी पर
वापस आयी।
इसके
द्वारा 6
अंतरिक्ष
यात्री
अंतरिक्ष
में गये। यह
स्पेस शटल
डिस्कवरी
की 39 वीं
उड़ान तथा 'अल्फा
' स्टेशन के
लिए 60वीं
मानवयुक्त
उड़ान थी
विभिन्न
असेम्बली
कार्यों के
अलावा इस
उड़ान में
स्टेशन के
लिए स्थायी
बहुउद्देश्यीय
माड्यूल 'पी.एम.एम.
' ले जाकर
स्टेशन से
जोड़ा गया।
- सोयुज‚टी.एम.ए.‚21
उड़ान
अल्फा
स्टेशन के
लिए 4 अप्रैल
2011 को
प्रमोचित
इस
मानवयुक्त
अंतरिक्षयान
का नाम 'गगारिन`
था। इसके
द्वारा तीन
अन्तरिक्ष
यात्री
अंतरिक्ष
में गये। यह
उड़ान 'अल्फा'
स्टेशन के
स्थायी दल
अंतरिक्ष
यात्रियों
की अदला‚बदली
के लिए थी।
-
शटल
उड़ान एस टी
एस‚134 : यह
स्पेस शटल
एन्डयौर की
आखिरी और 25वीं
उड़ान थी।
इसका
प्रमोचन 16
मई 2011 को हुआ
तथा यह 1 जून 2011
को पफथ्वी
पर वापस आई।
इस मिशन के
द्वारा
प्रमोचित
नीतभार थे‚अल्फा
मैगनेटिक
स्पेक्ट्रोमीटर
2, एक्सप्रेस
लाजिस्टिक्स
कैरियर 3,
ग्लैसियर
फ्रीजर
माड्यूल
तथा अल्फा
स्टेशन के
लिए अन्य
सामग्री।
इस मिशन में
कुछ
परीक्षण भी
किये गये।
इसके
द्वारा 6
अंतरिक्षयात्री
अंतरिक्ष
में गये।
-
'सोयुज‚
टी.एम.ए. 02 एम'
अंतरिक्षयान
की उड़ान : इस
अंतरिक्ष
यान का
प्रमोचन 7
जून 2011 को
किया गया।
यह अल्फा
अंतरिक्ष
स्टेशन के
लिए 63वीं
मानवयुक्त
उड़ान थी।
इस के
द्वारा नया
अंतरिक्ष
यात्री दल 'अल्फा
' अंतरिक्ष
स्टेशन में
पहुचाया
गया।

-
शटल
उड़ान, एस.टी.एस.‚135
: यह स्पेस
शटल
कार्यकम की
आखिरी एवं
135 वीं उड़ान,
स्पेस शटल
अटलान्टीस
की 33वीं
उड़ान तथा 'अल्फा
' अंतरिक्ष
स्टेशन के
लिए 64 वीं
मानवयुक्त
उड़ान थी।
इसका
प्रमोचन 8
जुलाई 2011 को
हुआ तथा यह 21
जुलाई 2011 को
पफथ्वी पर
वापस आई। इस
मिशन के
प्रमुख
नीतभार
बहुउद्देशीय
लाजिस्टिक्स
माड्यूल 'रैफेलो',
लाइट वेट
बहुउद्देशीय
कॅरियर (एल.एम.सी.)
तथा 'रोबोटिक
रीप्यूलिंग
मिशन' (आर.आर.एम.)
अल्फा
स्टेशन
पहुँचाये
गये और उससे
जोड़े गये।
इस मिशन के
द्वारा 4
अंतरिक्ष
यात्री
अंतरिक्ष
में गये।
मानव
रहित अथवा
कार्गो
उड़ाने :
वर्ष
2011 में
अंतर्राष्ट्रीय
अंतरिक्ष
स्टेशन से
सम्बन्धित 7
उड़ानें
सम्पन्न
हुईं जिनका
ब्यौरा
निम्न है :

- इसके
अलावा 'अल्फा`
अंतरिक्ष
स्टेशन में
विभिन्न
प्रकार की
सामग्री (खान
पान उपकरण
इत्यादि)
पहुँचाने
के लिए रूसी
'प्रोग्रेस`
कार्गो
अंतरिक्षयानों
की निम्न
उड़ाने
सम्पन्न
हुईं।
1
प्रोग्रेस
एम‚09 एम :
प्रमोचन
28.01.2011
2
प्रोग्रेस
एम‚10 एम :
प्रमोचन
27.04.2011
3
प्रोग्रेस
एम‚11 एम :
प्रमोचन
21.06.2011
4
प्रोग्रेस
एम‚12 एम :
प्रमोचन
24.08.2011
5
प्रोग्रेस
एम‚13 एम :
प्रमोचन
30.10.2011
भारत की
अन्तरिक्ष
उपलब्धियाँ
वर्ष
2011 में
भारतीय
अंतरिक्ष
अनुसंधान
संगठन (इसरो)
की ओर से
निम्न
प्रमोचन
सम्पन्न
हुए :
- 20
अप्रैल 2011 को
पी.एस.एल.वी.सी16
उड़ान के
द्वारा तीन
उपग्रहों
रिसोर्ससैट‚2,
यूथसैट एवं
एक्स‚सैट
का प्रमोचन
श्री
हरिकोटा
प्रमोचन
स्थल से
किया गया।
इनमें दो
नीतभार
भारतीय थे
तथा एक्स‚सैट
सिंगापोर
का प्रथम
उपग्रहथा।
- 21
मई 2011 को कोरू
के फेन्च
गुएना
प्रमोचन
स्थल से
एरियन‚5
प्रमोचन
राकेट के
द्वारा
भारत के जी
सैट‚8
उपग्रह का
प्रमोचन
किया गया।
जीसैट‚8 एक
उच्च पावर
भारतीय
उपग्रह है
जिसमें 24 कू‚बैन्ड
ट्रान्सपान्डर
तथा दो
चैनेल
जीपीएस
सहायता कृत
भू
परिवर्द्धित
नेविगेशन
तंत्र (गगन)
लगाहुआहै।
- 15
जुलाई 2011 को
पी.एस.एल.वी.सी.
17 की उड़ान
के द्वारा
भारत के एक
अन्य संचार
उपग्रह जी
सैट‚12 का
प्रमोचन
किया गया।
जी सैट‚12 में 12
विस्तफत सी
बैन्ड
ट्रान्सपान्डर
हैं। यह
सुदूर
शिक्षण,
टेलीमेडिसिन
एवं
ग्रामीण
संसाधन
केन्द (वी.आर.सी.)
सेवाओं में
उपयोगी हुआ
है।
-
12
अक्टूबर 2011
को पी.एस.एल.वी.सी.
18 उड़ान के
द्वारा चार
उपग्रहों
का प्रमोचन
किया गया।
ये उपग्रह
थे - भारत और
फान्स के
संयुक्त
प्रयासों
से निर्मित 'मेघा‚ट्रापिक्स
उपग्रह,
भारतीय
प्रौद्योगिकी
संस्थान के
द्वारा
निर्मित
जुगनू
उपग्रह, एस.आर.एम.
विश्वविद्यालय
(चेन्नै के
पास) के
द्वारा
निर्मित 'एस.आर.एम.‚सैट`
उपग्रह तथा
लक्सेमबर्ग
के द्वारा
विकसित
उपग्रह 'वेसेलसैट‚1`।
विभिन्न
ग्रहीय
मिशन/अन्य
मिशनये मिशन
निम्न हैं
ये मिशन निम्न हैं :

-
'जूनो'
मिशन : यह
नासा का
बफहस्पति
ग्रह के लिए
मिशन है
जिसका
प्रमोचन 5
अगस्त 2011 को
प्लोरिडा
के केप
केनेवेरल
प्रमोचन
स्थल से
अटलस ट 551
राकेट के
द्वारा
किया गया।
जूनो मिशन 2800
मिलियन कि.मी.
की यात्रा
करके 2016 में
बफहस्पति
ग्रह की
कक्षा में
प्रवेश
करेगा।
बफहस्पति
ग्रह की
संरचना,
गुरूत्व
फील्ड,
चुम्बकीय
फील्ड और
ध्रुवीय
चुम्बक
मण्डल का
अध्ययन
करने के लिए
इसे
बफहस्पति
ग्रह की
ध्रुवीय
कक्षा में
स्थापित
किया
जायेगा।
- फोबोस‚ग्रन्ट
मिशन : 8
नवम्बर 2011 को
रूस के
फोबोस‚ग्रण्ट
मिशन का
प्रमोचन
बेकानूर
कास्मोड्रोम
से किया
गया। फोबोस‚ग्रण्ट
मिशन एक
सैम्पुल
रिटर्न
मिशन है जो
मंगल ग्रह
के एक
चन्दमा 'फोबोस`
ग्रन्ट में
उतर कर वहाँ
से 200 ग्राम
भार के इसके
मफदा
सैम्पुल
लेकर वापस
आयेगा। इस
अंतरिक्षयान
के साथ मंगल
ग्रह की
परिकमा
करने वाला
एक चीनी
उपग्रह 'यिंघू‚1`
तथा ग्रहीय
संस्था का
नीतभार 'लिविंग
इन्टरप्लैनेटरी
प्लाईट
एक्सपेरीमेन्ट`
भी भेजा गया
है। फोबोस‚ग्रन्टमंगल
ग्रह मिशन 'मार्स
96` की असफलता
के बाद रूस
के अंतरा‚ग्रहीय
मिशन
कार्यक्रम
के
अन्तर्गत
प्रथम मंगल
ग्रह मिशन
है। मिशन का
लिप्ट‚आफ 8
नवम्बर 2011 को
सार्वत्रिक
समय 20:16 बजे (जी.एम.टी.)
सफलतापूर्वक
हुआ लेकिन
उसके थोड़ी
देर बाद तक
अंतरिक्षयान
पफथ्वी की
कक्षा से
बाहर नहीं
निकल पाया।
यदि
अन्तरिक्षयान
पफथ्वी की
कक्षा से
बाहर निकल
जाता तो यह
सितम्बर 2012
में मंगल
ग्रह की
कक्षा में
पहुच जाता
तथा फरवरी 2013
में 'फोबोस`
चन्दमा पर
उतरता और
फिर उसके
बाद यह
अगस्त 2014 में
पफथ्वी पर
फोबोस
चन्दमा के
सैम्पुल
लेकर वापस
आता लेकिन
ऐसा नहीं हो
सका है। 24
नवम्बर 2011 को
रूसी
अन्तरिक्ष
संस्था ने
यह घोषित
किया कि
फोबोस
ग्रन्ट
मिशन असफल
रहा।

-
अंतरिक्ष
में सबसे
बड़ी
रेडियो
दूरबीन‚ 'स्पेक्टर‚आर`ः
18 जुलाई 2011 को
रूस ने
विश्व की
सबसे बड़ी
रेडियो
दूरबीन‚'स्पेक्टर‚आर`
अंतरिक्ष
में
स्थापित
किया। इस
दूरबीन का
व्यास 10
मीटर है तथा
यह रूसी
आस्ट्रो
अंतरिक्ष
केन्द की
दूरबीन है।
इसे
अत्यधिक
दीर्घ
वफत्तीय
कक्षा में
स्थापित
किया गया है
जिसकी
अपोजी (पफथ्वी
से इष्टतम
दूरी) 390,000 कि.मी.
और पेरिजी (पफथ्वी
से निम्नतम
दूरी) 10,000 किमी
है। इस
दूरबीन का
प्रमुख
लक्ष्य
अत्यधिक
उच्च
विभेदन (लगभग
एक आर्क
सेकण्ड का
दस लाखवॉ
हिस्सा) के
साथ
खगोलिकी
प्रेक्षण
करना है तथा
इसके लिए यह
भू स्थित
दूरबीनों
के साथ
मिलकर
व्यतिकरणमिति
मोड में काम
करेगी।
व्यतिकरणमिति
(इन्टरफेरोमीट्री)
एक खगोलिकी
प्रेक्षण
तकनीकी है
जिसके
अन्तर्गत
कई
दूरबीनों
के
संयुक्तीकरण
से एक
विशालकाय
दूरबीन को
रियलाइज
किया जाता
है। दूरबीन
का आकार (अर्थात
व्यास)
जितना बड़ा
होगा, उसका
विभेदन
उतना ही
उच्चहोगा।
वर्ष 2011 में
कुछ
विख्यात
संचार
- अरबसैट‚ 5सी : यह अरबसैट
संस्था का
भू‚स्थिर
उपग्रह है
जिसका
प्रमोचन 21
सितम्बर को
एरियन‚5
प्रमोचन
राकेट के
द्वारा
किया गया।
इसमें 26
सक्रिय (ऐक्टिव)
सी‚बैन्ड
तथा 12
सक्रिय का‚बैन्ड
ट्रान्सपान्डर
पर हैं। जिन
संचार
उपग्रहों
के
ट्रान्सपान्डरों
में
सिंग्नल के
लिए आन‚बोर्ड
प्रोसेशिंग
की सुविधा
उपलब्ध
होती है उन
ट्रान्सपान्डरों
को सकिय (ऐक्टिव)
ट्रान्सपान्डर
कहते हैं।
इस उपग्रह
का जीवन काल
भी 15 वर्ष
है।
- अटलान्टिक
बर्ड 7 : यह
यूटलर्सेट
संस्था का
संचार
उपग्रह है
जिसका
प्रमोचन 25
सितम्बर 2011
को किया
गया। इसमें
56 सकिय कू‚बैन्ड
ट्रान्सपाण्डर
हैं। 4600 कि.ग्रा.
भार वाले इस
भू‚स्थिर
उपग्रह का
जीवन काल भी
15 वर्ष है।
इसका
प्रमोचन
जेनिट‚3 एस
एल राकेट से
कियागया।

- इन्टलसैट‚18
संचार
उपग्रह : यह
इन्टलसैट
संस्थाका
उपग्रह है
जिसका
प्रमोचन 5
अक्टूबर 2011
को 'जेनिट‚3
एस एल बी`
राकेट के
द्वारा
किया गया।
इसमें 24 सी‚बैण्ड
एवं 12 क्‚बैण्ड
ट्रान्सपान्डर
हैं। 3200 कि.ग्रा.
के इस
उपग्रह में 2
प्रस्तरणीय
(डिप्लायेबुल)
सौर एरे
हैं।
- 'यूटेलसैट
डब्ल्यू 3 सी`
संचार
उपग्रह : यह
भी
यूटेलसैट
संस्था का
उपग्रह है
जिसका
प्रमोचन 7
अक्टूबर 2011
को किया
गया। 5370 कि.ग्रा.
के इस भू
स्थिर
उपग्रह में
53 कू‚बैण्ड
एवं 3 का‚बैण्ड
ट्रान्सपाण्डर
है तथा
उपग्रह का
जीवन काल 15
वर्ष है।
सिमुलेशन
मिशन ''मार्स‚500``

यह
एक
अन्तर्राष्ट्रीय
बहु‚भाग
वाला
आइसोलेशन
परीक्षण था
जिसमें
मंगल ग्रह
की
मानवयुक्त
अंतरिक्ष
उड़ान के
विभिन्न
पहलुओं का
सिमुलेशन
पफथ्वी पर 520
दिन के लिए
किया गया।
परीक्षण
सुविधा रूस
के मास्को
स्थित रूसी
विज्ञान
अकेडेमी के
बायोमेडिकल
प्राब्लम
इस्टीट्यूट
में स्थित
थी। वर्ष 2007
से 2011 के बीच 640
परीक्षणों
की योजना थी
जिन्हें
तीन
स्टेजों
में बाँटा
गया था।
प्रत्येक
स्टेज में
स्वैच्छिक
कार्यकर्ताओं
के ग्रुप
मार्कअप
अंतरिक्षयान
के अन्दर
रहे।
परीक्षण के
दौरान
बाह्य
दुनिया से
संचार
व्यवस्था
सीमित थी
तथा यह
संचार
प्रकिया
वास्तविक
मंगल ग्रह
परिस्थितियों
को देखते
हुए 25 मिनट
के विलम्बन
के साथ
सम्पन्न की
गई। 520
दिवसीय
आखिर स्टेज
का परीक्षण 4
नवम्बर 2011 को
समाप्त
हुआ। इस
आखिरी
स्टेज में 6
लोगों के
अंतर्राष्ट्रीय
दल ने
हिस्सा
लिया
जिसमें 3
रूसी, एक
फ्रान्सीसी,
एक
इटलीवासी
तथा एक चीनी
नागरिक था।
इस स्टेज
में मंगल
ग्रह की सतह
पर
लैंन्डिग
तथा इसकी
सतह पर तीन
स्पेस
वाकों का भी
सिमुलेशन 14,18
और 22 फरवरी 2011
को किया
गया।
परीक्षण
समाप्त
होने के बाद
सभी
भागीदार
बहुत अच्छी
भौतिक और
मानसिक
अवस्था में
थे। इसमें
आवासीय
माड्यूल
भागीदारों
के लिए
प्रमुख
रहने का
स्थान था जो
एक
बेलनाकार 3.6 20
मीटर के
माड्यूल के
रूप में था।
आशियाना
कालोनी,
कानपुर रोड,
लखनऊ‚ |