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इलेक्ट्रॉनिक्स आपके लिए अंक 211, वर्ष 24,फ़रवरी 2012
 
 
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तकनीकी

वर्ष 2011 का तकनीकी सफर

कालीशंकर

वरिष्ट वैज्ञानिक , इसरो

विज्ञान वृतांत : वर्ष

अंतरिक्ष अन्वेषण और अन्तरिक्ष विज्ञान की दफष्टि से 2011 वर्ष विश्व और भारत दोनों के लिए ही बहुत महत्वपूर्ण रहा। इस वर्ष अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण घटनाएँ घटित हुईं। ये महत्वपूर्ण घटनाएँ थीं अमरीकी स्पेस शटल का रिटायरमेन्ट तथा यूरी गगारिन की ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा की 50वीं वर्षगांठ। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन 'अल्फा' के निर्माण कार्य में और भी प्रगति हुई। भारत में भी इस वर्ष कई महत्वपूर्ण नीतभार अंतरिक्ष में भेजे गये। कुछ महत्वपूर्ण मिशन‚बफहस्पति ग्रह के लिए 'जूनो' मिशन पफथ्वी के चन्दमा के लिए 'गेल' मिशन, मंगल ग्रह के लिए 'मंगल ग्रह विज्ञान प्रयोगशाला' (एम.एस.एल), रूसी मिशन 'फोबोस‚ग्रन्ट', चीनी अंतरिक्ष स्टेशन टायनगॉग 1 का प्रमोचन किया गया। इसके अलावा इस वर्ष अनेक संचार उपग्रह भी प्रमोचित किये गये जिन्होंने विश्व संचार क्षमता को बढ़ाया। यहाँ बारी-बारी से हम सबके बारे में उल्लेख कर रहे हैं : 

स्पेस शटल का रिटायरमेंट

अंतरिक्ष परिवहन के रूप में स्पेस शटल एक अत्यधिक सफल अंतरिक्ष परिवहन रहा है। इसकी प्रथम उड़ान 12 अप्रैल 1981 (एस टी एस1) को तथा आखिरी उड़ान (एस.टी.एस.‚135) 8 जुलाई 2011 को सम्पन्न हुई। 21 जुलाई 2011 को स्पेस शटल की आखिरी उड़ान (जो कि इसकी 135वीं उड़ान थी) पफथ्वी पर वापस आई और उसी के साथ स्पेस शटल युग का समापन हो गया। 30 वर्ष 3 महीने की आपरेशनल अवधि में स्पेस शटल की 135 उड़ानें हुईं जिनमें 2 उड़ानें (स्पेस शटल चैलेंजर तथा स्पेस शटल कोलम्बिया) कमश: 1986 और 2003 में दुर्घटना ग्रस्त हो गई। अपनी कुल अवधि में स्पेस शटल कुल 1331 दिन 8 घण्टा अन्तरिक्ष में रही तथा पफथ्वी की कुल 21158 पारिक्रमाएँ कीं। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण से सम्बन्धित समुचित अनुभव प्राप्त करने के लिए स्पेस शटल 9 बार रूसी अंतरिक्ष स्टेशन 'मीर ' से जुड़ी। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण में स्पेस शटल की प्रमुख भूमिका रही है।

यूरी गगारिन की प्रथम मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान की 50 वीं वर्षगाँठ 

12 अप्रैल 2011 को यूरी गगारिन की प्रथम ऐतिहासिक अंतरिक्ष उड़ान की 50 वीं वर्षगांठ सारी दुनिया में और विशेषकर रूस में बड़े धूम-धाम से मनाई गई। आज भले ही यूरी गगारिन इस दुनिया में नही है लेकिन 12 अप्रैल 1961 को वोस्टोक अंतरिक्षयान के द्वारा की गई 108 मिनट की अंतरिक्ष यात्रा इतिहास के पन्नों में अमर हो गई है। इस उपलक्ष्य में व्रिटेन ने एक कार्यकम चलाया जिसका नाम था 'यूरी गगारिन 50'। इस अवसर पर 4 अप्रैल 2011 को रूस ने अपना एक मानवयुक्त अंतरिक्षयान 'सोयुज‚टी एम ए‚21, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए भेजा जिसका नाम 'गगारिन' रखा गया। 'यूरी गगारिन 50'कार्यक्रम का शुभारम्भ ब्रिटेन की प्रथम और एक मात्र महिला अंतरिक्ष यात्री हेलेन शर्मन के द्वारा किया गया। इस अवसर पर शर्मन ने अपने उद्गार इस प्रकार प्रकट किये, ''उनसे प्रेरणाऍ प्राप्त करने के कारण यूरी गगारिन को अंतर्राष्ट्रीय ताज से सम्मानित किया गया। वे जहाँ भी गये वहॉ पर लोगों की भीड़ उस व्यक्ति की एक झलक पाने के लिए इकट्ठा हो गई जिसनानवीय क्षमताओं को अंतरिक्ष अन्वेषण की बुलन्दियों तक पहुँचाया।

अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण की प्रगति

वर्ष 2011 में अन्तर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन 'अल्फा ' के निर्माण से सम्बन्धित 5 मानवयुक्त और 7 मानवरहित उड़ाने सम्पन्न हुईं। इनका विवरण निम्न है :

मानव युक्त उड़ानें 

मानवयुक्त उड़ानों के द्वारा वर्ष 2011 में 22 अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में गये जिनमें 2 महिलाऍ थीं। ये मानव युक्त उड़ानें निम्न हैं :‚

  • स्पेस शटल उड़ान एसटीएस‚133 :इसका प्रमोचन 24 फरवरी 2011 को किया गया तथा यह 19 मार्च 2011 को पफथ्वी पर वापस आयी। इसके द्वारा 6 अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में गये। यह स्पेस शटल डिस्कवरी की 39 वीं उड़ान तथा 'अल्फा ' स्टेशन के लिए 60वीं मानवयुक्त उड़ान थी विभिन्न असेम्बली कार्यों के अलावा इस उड़ान में स्टेशन के लिए स्थायी बहुउद्देश्यीय माड्यूल 'पी.एम.एम. ' ले जाकर स्टेशन से जोड़ा गया।
  • सोयुज‚टी.एम.ए.‚21 उड़ान अल्फा स्टेशन के लिए 4 अप्रैल 2011 को प्रमोचित इस मानवयुक्त अंतरिक्षयान का नाम 'गगारिन` था। इसके द्वारा तीन अन्तरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में गये। यह उड़ान 'अल्फा' स्टेशन के स्थायी दल अंतरिक्ष यात्रियों की अदला‚बदली के लिए थी।
  • शटल उड़ान एस टी एस‚134 : यह स्पेस शटल एन्डयौर की आखिरी और 25वीं उड़ान थी। इसका प्रमोचन 16 मई 2011 को हुआ तथा यह 1 जून 2011 को पफथ्वी पर वापस आई। इस मिशन के द्वारा प्रमोचित नीतभार थे‚अल्फा मैगनेटिक स्पेक्ट्रोमीटर 2, एक्सप्रेस लाजिस्टिक्स कैरियर 3, ग्लैसियर फ्रीजर माड्यूल तथा अल्फा स्टेशन के लिए अन्य सामग्री। इस मिशन में कुछ परीक्षण भी किये गये। इसके द्वारा 6 अंतरिक्षयात्री अंतरिक्ष में गये।

  • 'सोयुज‚ टी.एम.ए. 02 एम' अंतरिक्षयान की उड़ान : इस अंतरिक्ष यान का प्रमोचन 7 जून 2011 को किया गया। यह अल्फा अंतरिक्ष स्टेशन के लिए 63वीं मानवयुक्त उड़ान थी। इस के द्वारा नया अंतरिक्ष यात्री दल 'अल्फा ' अंतरिक्ष स्टेशन में पहुचाया गया।

  • शटल उड़ान, एस.टी.एस.‚135 : यह स्पेस शटल कार्यकम की आखिरी  एवं 135 वीं उड़ान, स्पेस शटल अटलान्टीस की 33वीं उड़ान तथा 'अल्फा ' अंतरिक्ष स्टेशन के लिए 64 वीं मानवयुक्त उड़ान थी। इसका प्रमोचन 8 जुलाई 2011 को हुआ तथा यह 21 जुलाई 2011 को पफथ्वी पर वापस आई। इस मिशन के प्रमुख नीतभार बहुउद्देशीय लाजिस्टिक्स माड्यूल 'रैफेलो', लाइट वेट बहुउद्देशीय  कॅरियर (एल.एम.सी.) तथा 'रोबोटिक रीप्यूलिंग मिशन' (आर.आर.एम.) अल्फा स्टेशन पहुँचाये गये और उससे जोड़े गये। इस मिशन के द्वारा 4 अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में गये।

  • सोयुज‚ टी.एम.ए. 22 की उड़ानें : इसके द्वारा अल्फा अंतरिक्ष स्टेशन के लिए नये अंतरिक्ष यात्री दल को पहुँचाया गया।

मानव रहित अथवा कार्गो उड़ाने :

वर्ष 2011 में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से सम्बन्धित 7 उड़ानें सम्पन्न हुईं जिनका ब्यौरा निम्न है : 

  • जापानी अंतरिक्ष संस्था के एच.टी.वी.‚2 की उड़ान : जापान ने एक कार्गो अंतरिक्षयान एच‚2 ट्रान्सफर वेहिकल (एच टी वी) का विकास किया है। इसकी द्वितीय प्रायोगिक उड़ान अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए 22 जनवरी 2011 को सम्पन्न हुई। यह अंतरिक्ष स्टेशन के साथ 20 फरवरी तक जुड़ा रहा।

  • आटोमैटेड ट्रान्सफर वेहिकल (ए टी वी‚2) की उड़ान : जापान की भाँति योरपीय अंतरिक्ष संस्था भी एक कार्गो अंतरिक्षयान का विकास कर रही है। इसकी द्वितीय प्रायोगिक उड़ान 16 फरवरी 2011 को सम्पन्न हुई। द्वितीय उड़ान के अंतरिक्षयान का नाम 'जोहैनस केप्लर'था।

  • इसके अलावा 'अल्फा` अंतरिक्ष स्टेशन में विभिन्न प्रकार की सामग्री (खान पान उपकरण इत्यादि) पहुँचाने के लिए रूसी 'प्रोग्रेस` कार्गो अंतरिक्षयानों की निम्न उड़ाने सम्पन्न हुईं।

 

1      प्रोग्रेस एम‚09 एम     :     प्रमोचन                   28.01.2011

2      प्रोग्रेस एम‚10 एम     :     प्रमोचन                   27.04.2011

3      प्रोग्रेस एम‚11 एम     :     प्रमोचन                   21.06.2011

4      प्रोग्रेस एम‚12 एम     :     प्रमोचन                   24.08.2011

5      प्रोग्रेस एम‚13 एम     :     प्रमोचन                   30.10.2011 

                                       

भारत की अन्तरिक्ष उपलब्धियाँ

वर्ष 2011 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की ओर से निम्न प्रमोचन सम्पन्न हुए :

  • 20 अप्रैल 2011 को पी.एस.एल.वी.सी16 उड़ान के द्वारा तीन उपग्रहों रिसोर्ससैट‚2, यूथसैट एवं एक्स‚सैट का प्रमोचन श्री हरिकोटा प्रमोचन स्थल से किया गया। इनमें दो नीतभार भारतीय थे तथा एक्स‚सैट सिंगापोर का प्रथम उपग्रहथा।
  • 21 मई 2011 को कोरू के फेन्च गुएना प्रमोचन स्थल से एरियन‚5 प्रमोचन राकेट के द्वारा भारत के जी सैट‚8 उपग्रह का प्रमोचन किया गया। जीसैट‚8 एक उच्च पावर भारतीय उपग्रह है जिसमें 24 कू‚बैन्ड ट्रान्सपान्डर तथा दो चैनेल जीपीएस सहायता कृत भू परिवर्द्धित नेविगेशन तंत्र (गगन) लगाहुआहै।
  • 15 जुलाई 2011 को पी.एस.एल.वी.सी. 17 की उड़ान के द्वारा भारत के एक अन्य संचार उपग्रह जी सैट‚12 का प्रमोचन किया गया। जी सैट‚12 में 12 विस्तफत सी बैन्ड ट्रान्सपान्डर हैं। यह सुदूर शिक्षण, टेलीमेडिसिन एवं ग्रामीण संसाधन केन्द (वी.आर.सी.) सेवाओं में उपयोगी हुआ है।
  • 12 अक्टूबर 2011 को पी.एस.एल.वी.सी. 18 उड़ान के द्वारा चार उपग्रहों का प्रमोचन किया गया। ये उपग्रह थे - भारत और फान्स के संयुक्त प्रयासों से निर्मित 'मेघा‚ट्रापिक्स उपग्रह, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के द्वारा निर्मित जुगनू उपग्रह, एस.आर.एम. विश्वविद्यालय (चेन्नै के पास) के द्वारा निर्मित 'एस.आर.एम.‚सैट` उपग्रह तथा लक्सेमबर्ग के द्वारा विकसित उपग्रह 'वेसेलसैट‚1`।

विभिन्न ग्रहीय मिशन/अन्य मिशनये मिशन निम्न हैं

ये मिशन निम्न हैं :

  • 'जूनो' मिशन : यह नासा का बफहस्पति ग्रह के लिए मिशन है जिसका प्रमोचन 5 अगस्त 2011 को प्लोरिडा के केप केनेवेरल प्रमोचन स्थल से अटलस ट 551 राकेट के द्वारा किया गया। जूनो मिशन 2800 मिलियन कि.मी. की यात्रा करके 2016 में बफहस्पति ग्रह की कक्षा में प्रवेश करेगा। बफहस्पति ग्रह की संरचना, गुरूत्व फील्ड, चुम्बकीय फील्ड और ध्रुवीय चुम्बक मण्डल का अध्ययन करने के लिए इसे बफहस्पति ग्रह की ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया जायेगा।

  • ग्रेल मिशन : ग्रेल मिशन चन्दमा के लिए है जिसका प्रमोचन 10 सितम्बर 2011 को केप केनेवेरल वायु सेना बेस से किया गया। इसके अन्तर्गत दो अन्तरिक्षयान 'ग्रेल‚ए` और 'ग्रेल‚बी` एक साथ प्रमोचित किये गये। प्रयुक्त प्रमोचन राकेट डेल्टा‚घ्घ् था। इस मिशन के द्वारा चन्दमा की आन्तरिक संरचना का पता लगाने के लिए यह मिशन उच्च गुणवत्ता गुरूत्व फील्ड मानचित्रण तकनीकी का प्रयोग करेगा। मिशन का विज्ञान चरण 90 दिन का होगा। विज्ञान चरण के बाद मिशन का 5 दिवसीय डी‚कमीशनिंग अवधि का नियोजन किया गया है तथा उसके बाद ये दोनों लगभग 40 दिन में अंतरिक्षयान चन्द सतह पर आघात करेंगे।

  • चीनी अन्तरिक्ष कार्यक्रम : 29 सितम्बर 2011 को चीन ने एक अंतरिक्ष स्टेशन माड्यूल टायनगॉग‚1 प्रमोचित किया जिसकी अंतरिक्ष कक्षा 362 कि0मी (अपोजी) 355 कि.मी. (पेरिजी) है। 31 अक्टूबर 2011 को मानव रहित शेन्जू‚8 अंतरिक्षयान प्रमोचित किया गया जो 2 नवम्बर 2011 को टायनगॉग‚1 से जाकर जुड़ गया (डाकिंग)। यह चीन के द्वारा प्रथम कक्षीय डाकिंगथी।

  • मंगल ग्रह विज्ञान प्रयोगशाला : 25 नवम्बर 2011 को मंगल ग्रह के लिए चिर प्रतीक्षित नासा मिशन मंगल ग्रह विज्ञान प्रयोगशाला (जिसकी बग्घी का नाम क्यूरियासिटी है) का प्रमोचन किया गया। पूर्व की मंगल ग्रह बग्घियों की तुलना में 10 गुना अधिक भारी वैज्ञानिक उपकरण ले जाने वाली मंगल ग्रह विज्ञान प्रयोगशाला में उच्चतम तकनीकों तथा विशिष्ट लैंण्डिग प्रणाली का प्रयोग किया गया है। यह मंगल ग्रह में अगस्त 2012 में पहुँचेगी। मंगल ग्रह की सतह में लैन्डिग के बाद 23 महीने तक यह प्रयोगशाला मंगल ग्रह के दर्जनों सैम्पुलों (जमीन से ड्रिल करके निकाले गये) की जाँच करेगी। इसमें पावर आपूर्ति के लिए रेडियो आइसोटोप पावर जनरेटर का प्रयोग किया गया है। पफथ्वी के डीप स्पेस नेटवर्क से संचार स्थापन के लिए यह मंगल ग्रह के पूर्व आरबिटरों के माध्यम से रेडियो रिले प्रकिया का प्रयोग करेगी।

  • फोबोस‚ग्रन्ट मिशन : 8 नवम्बर 2011 को रूस के फोबोस‚ग्रण्ट मिशन का प्रमोचन बेकानूर कास्मोड्रोम से किया गया। फोबोस‚ग्रण्ट मिशन एक सैम्पुल रिटर्न मिशन है जो मंगल ग्रह के एक चन्दमा 'फोबोस` ग्रन्ट में उतर कर वहाँ से 200 ग्राम भार के इसके मफदा सैम्पुल लेकर वापस आयेगा। इस अंतरिक्षयान के साथ मंगल ग्रह की परिकमा करने वाला एक चीनी उपग्रह 'यिंघू‚1` तथा ग्रहीय संस्था का नीतभार 'लिविंग इन्टरप्लैनेटरी प्लाईट एक्सपेरीमेन्ट` भी भेजा गया है। फोबोस‚ग्रन्टमंगल ग्रह मिशन 'मार्स 96` की असफलता के बाद रूस के अंतरा‚ग्रहीय मिशन कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रथम मंगल ग्रह मिशन है। मिशन का लिप्ट‚आफ 8 नवम्बर 2011 को सार्वत्रिक समय 20:16 बजे (जी.एम.टी.) सफलतापूर्वक हुआ लेकिन उसके थोड़ी देर बाद तक अंतरिक्षयान पफथ्वी की कक्षा से बाहर नहीं निकल पाया। यदि अन्तरिक्षयान पफथ्वी की कक्षा से बाहर निकल जाता तो यह सितम्बर 2012 में मंगल ग्रह की कक्षा में पहुच जाता तथा फरवरी 2013 में 'फोबोस` चन्दमा पर उतरता और फिर उसके बाद यह अगस्त 2014 में पफथ्वी पर फोबोस चन्दमा के सैम्पुल लेकर वापस आता लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। 24 नवम्बर 2011 को रूसी अन्तरिक्ष संस्था ने यह घोषित किया कि फोबोस ग्रन्ट मिशन असफल रहा।

  • अंतरिक्ष में सबसे बड़ी रेडियो दूरबीन‚ 'स्पेक्टर‚आर`ः 18 जुलाई 2011 को रूस ने विश्व की सबसे बड़ी रेडियो दूरबीन‚'स्पेक्टर‚आर` अंतरिक्ष में स्थापित किया। इस दूरबीन का व्यास 10 मीटर है तथा यह रूसी आस्ट्रो अंतरिक्ष केन्द की दूरबीन है। इसे अत्यधिक दीर्घ वफत्तीय कक्षा में स्थापित किया गया है जिसकी अपोजी (पफथ्वी से इष्टतम दूरी) 390,000 कि.मी. और पेरिजी (पफथ्वी से निम्नतम दूरी) 10,000 किमी है। इस दूरबीन का प्रमुख लक्ष्य अत्यधिक उच्च विभेदन (लगभग एक आर्क सेकण्ड का दस लाखवॉ हिस्सा) के साथ खगोलिकी प्रेक्षण करना है तथा इसके लिए यह भू स्थित दूरबीनों के साथ मिलकर व्यतिकरणमिति मोड में काम करेगी। व्यतिकरणमिति (इन्टरफेरोमीट्री) एक खगोलिकी प्रेक्षण तकनीकी है जिसके अन्तर्गत कई दूरबीनों के संयुक्तीकरण से एक विशालकाय दूरबीन को रियलाइज किया जाता है। दूरबीन का आकार (अर्थात व्यास) जितना बड़ा होगा, उसका विभेदन उतना ही उच्चहोगा। 

                                                    

वर्ष 2011 में कुछ विख्यात संचार

  • जेड एक्स 10 (चाइनासैट 10) : यह एक चीन का संचार उपग्रह है जिसका प्रमोचन 20 जून 2011 को किया गया। इसमें 30 सी‚बैन्ड एवं 16 कू‚बैन्ड ट्रान्सपान्डर हैं। 5000 कि.ग्रा. के इस उपग्रह का डिजाइन जीवन काल 15 वर्ष है। यह भू‚स्थिर कक्षा में स्थापित किया गया है।

  • अरबसैट‚ 5सी : यह अरबसैट संस्था का भू‚स्थिर उपग्रह है जिसका प्रमोचन 21 सितम्बर को एरियन‚5 प्रमोचन राकेट के द्वारा किया गया। इसमें 26 सक्रिय (ऐक्टिव) सी‚बैन्ड तथा 12 सक्रिय का‚बैन्ड ट्रान्सपान्डर पर हैं। जिन संचार उपग्रहों के ट्रान्सपान्डरों में सिंग्नल के लिए आन‚बोर्ड प्रोसेशिंग की सुविधा उपलब्ध होती है उन ट्रान्सपान्डरों को सकिय (ऐक्टिव) ट्रान्सपान्डर कहते हैं। इस उपग्रह का जीवन काल भी 15 वर्ष है।

  • अटलान्टिक बर्ड 7 : यह यूटलर्सेट संस्था का संचार उपग्रह है जिसका प्रमोचन 25 सितम्बर 2011 को किया गया। इसमें 56 सकिय कू‚बैन्ड ट्रान्सपाण्डर हैं। 4600 कि.ग्रा. भार वाले इस भू‚स्थिर उपग्रह का जीवन काल भी 15 वर्ष  है। इसका प्रमोचन जेनिट‚3 एस एल राकेट से कियागया।

  •  इन्टलसैट‚18 संचार उपग्रह : यह इन्टलसैट संस्थाका उपग्रह है जिसका प्रमोचन 5 अक्टूबर 2011 को 'जेनिट‚3 एस एल बी` राकेट के द्वारा किया गया। इसमें 24 सी‚बैण्ड एवं 12 क्‚बैण्ड ट्रान्सपान्डर हैं। 3200 कि.ग्रा. के इस उपग्रह में 2 प्रस्तरणीय (डिप्लायेबुल) सौर एरे हैं।

  • 'यूटेलसैट डब्ल्यू 3 सी` संचार उपग्रह : यह भी यूटेलसैट संस्था का उपग्रह है जिसका प्रमोचन 7 अक्टूबर 2011 को किया गया। 5370 कि.ग्रा. के इस भू स्थिर उपग्रह में 53 कू‚बैण्ड एवं 3 का‚बैण्ड ट्रान्सपाण्डर है तथा उपग्रह का जीवन काल 15 वर्ष है।
  • वायासैट‚1 उपग्रह :वायासैट कम्पनी के इस संचार उपग्रह का प्रमोचन 19 अक्टूबर 2011 को किया गया। ऐसा विश्वास है कि यह विश्व का सबसे बड़ा उच्चतम क्षमता वाला विस्तफत बैण्ड संचार उपग्रह है। यह एक अत्यन्त उच्च कोटि का का‚बैण्ड इन्टरनेट उपग्रह है।

  • गैलीलियो नेविगेशन तंत्र के दो उपग्रह : गैलीलियो योरप का उपग्रह आधारित नेविगेशन तंत्र है जिसमें कुल 30 उपग्रह होंगे। 21 अक्टूबर 2011 को इस तंत्र के दो अन्य उपग्रहों का प्रमोचन कियागया।

सिमुलेशन मिशन ''मार्स‚500``

यह एक अन्तर्राष्ट्रीय बहु‚भाग वाला आइसोलेशन परीक्षण था जिसमें मंगल ग्रह की मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान के विभिन्न पहलुओं का सिमुलेशन पफथ्वी पर 520 दिन के लिए किया गया। परीक्षण सुविधा रूस के मास्को स्थित रूसी विज्ञान अकेडेमी के बायोमेडिकल प्राब्लम इस्टीट्यूट में स्थित थी। वर्ष 2007 से 2011 के बीच 640 परीक्षणों की योजना थी जिन्हें तीन स्टेजों में बाँटा गया था। प्रत्येक स्टेज में स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं के ग्रुप मार्कअप अंतरिक्षयान के अन्दर रहे। परीक्षण के दौरान बाह्य दुनिया से संचार व्यवस्था सीमित थी तथा यह संचार प्रकिया वास्तविक मंगल ग्रह परिस्थितियों को देखते हुए 25 मिनट के विलम्बन के साथ सम्पन्न की गई। 520 दिवसीय आखिर स्टेज का परीक्षण 4 नवम्बर 2011 को समाप्त हुआ। इस आखिरी स्टेज में 6 लोगों के अंतर्राष्ट्रीय दल ने हिस्सा लिया जिसमें 3 रूसी, एक फ्रान्सीसी, एक इटलीवासी तथा एक चीनी नागरिक था। इस स्टेज में मंगल ग्रह की सतह पर लैंन्डिग तथा इसकी सतह पर तीन स्पेस वाकों का भी सिमुलेशन 14,18 और 22 फरवरी 2011 को किया गया। परीक्षण समाप्त होने के बाद सभी भागीदार बहुत अच्छी भौतिक और मानसिक अवस्था में थे। इसमें आवासीय माड्यूल भागीदारों के लिए प्रमुख रहने का स्थान था जो एक बेलनाकार 3.6 20 मीटर के माड्यूल के रूप में था।

आशियाना कालोनी, कानपुर रोड,
लखनऊ‚

 
 
 
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