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विज्ञान वृतांत : वर्ष 2011
वैज्ञानिक उपब्धियों भरा रहा 2011
चक्रेश जैन
विज्ञान लेखक
वर्ष 2011 वैज्ञानिक अनुसंधानों और खोजों के लिए सफलतम वर्ष रहा। कई महत्वपूर्ण खोजें वैज्ञानिकों द्वारा इस वर्ष की गई। वर्ष 2011 अंतर्राष्ट्रीय रसायन विज्ञान वर्ष के रूप में मनाया गया। साथ ही इस वर्ष हमने कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को भी खो दिया जिन्होंने अपनी खोजों से दुनिया को नया मार्ग दिखाया। हम यहाँ साल 2011 की महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियों के बारे में जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैं।
वर्ष 2011 ब्रह्माण्ड संबंधी हमारी समझ को समफद्धतर बनाने की दिशा में ऐतिहासिक और सार्थक रहा। इस वर्ष भी महाप्रयोग जारी रहा और सर्न प्रयोगशाला में पार्टिकल फिजिक्स के शोधकर्ता ईश्वरीय कणों यानी गॉड पार्टिकल की व्याख्या के निकट पहुँच गए। दिसम्बर में इस दिशा में अत्यधिक उत्साहजनक संकेत मिले, लेकिन अभी पुष्टि होना बाकी हैं। साल के पूर्वार्द्ध में सर्न प्रयोगशाला के शोधार्थियों ने एंटीमैटर यानी प्रतिपदार्थ को लगभग 15 मिनटों तक स्टोर करने में ऐतिहासिक सफलता मिली। वास्तव में प्रतिपदार्थ ब्रह्मांड के बड़े रहस्यों में सम्मिलित है। यह वही वर्ष है, जब शोधकर्ताओं ने प्रकाश की गति से तेज न्यूट्रिनों कणों का पता लगाकर आइंस्टाइन के सापेक्षतावाद के विशिष्ट सिद्धांत को चुनौतियों के कटघरे में खड़ा कर दिया। इस प्रयोग की सफलता को लेकर वैज्ञानिकों की राय एक जैसी नहीं है। सच तो यह है कि वैज्ञानिकों द्वारा ब्रह्मांड को कई दशकों तक खंगालने के बाद भी अभी तक अनेक रहस्यों पर से पर्दा नहीं हटा है।
बीते वर्ष मेडम क्यूरी को रसायन विज्ञान में दिए गए नोबेल सम्मान का शताब्दी वर्ष मनाया गया। उन्होंने विज्ञान की दो विधाओं में नोबेल पुरस्कार विजेता बनकर नया इतिहास रचा। मेडम क्यूरी को पहला नोबेल पुरस्कार भौतिक शास्त्र में 1903 में प्रदान किया गया था। इसी वर्ष इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ केमिकल सोसायटी की स्थापना के सौ वर्ष पूरे हुए। इस संस्था की स्थापना 1911 में की गई थी। दुनिया भर में 2011 अंतर्राष्ट्रीय रसायन विज्ञान वर्ष के रूप में मनाया गया। इसी वर्ष इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योर एंड एप्लाइड केमिस्ट्री ने रासायनिक तत्वों की आवर्त सारणी में दो और नये तत्त्वों 'लीवरमारियम` और 'प्लेरोवियम` को सम्मिलित करने के संकेत दिए। इनके साथ ही आवर्त सारणी में अब कुल 118 तत्व हो गये हैं।
इसी वर्ष दक्षिण ध्रुव पर पहली बार विजय पताका फहराने का शताब्दी वर्ष मनाया गया। 14 दिसम्बर 1911 को रोआल्ड एमंडसेन ने यहां पहुंचकर नया इतिहास रचा था। गुजरे साल जनवरी में अतिचालकता की खोज के सौ साल पूरे हुए। अतिचालकता, प्रगत भौतिकी में अनुसंधान का अत्यधिक संभावनाओं भरा विषय है। डच वैज्ञानिक हाइके केमरलिंग ओन्नेस को इस खोज के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया। इसी साल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान का शताब्दी वर्ष था।
गुजरे साल में खगोल विज्ञान में उत्साह का माहौल रहा। शोधकर्ताओं की अंतर्राष्ट्रीय टीम ने पल्सर तारे के निकट एक अद्भुत हीरक ग्रह की खोज की, जो मुख्य रूप से कार्बन का बना है। यह ग्रह हमारी पफथ्वी से चार हजार प्रकाश वर्ष दूर है। विदा ले चुके साल में दो तारों की परिक्रमा करते ग्रह का पता भी चला। फरवरी में अंतरिक्ष एजेंसी नासा के केपलर मिशन ने पहली बार पफथ्वी के आकार के छह बाहरी ग्रहों की घोषणा कीं। इन ग्रहों की खोज तारों के आस-पास के 'हेबिटेबल झोन` में की गई है। केपलर मिशन अभी तक 1235 बाहरी ग्रहों की खोज कर चुका है। नासा ने 7 मार्च 2009 को केपलर मिशन अंतरिक्ष में भेजा था। यह वही वर्ष है, जब अंतरिक्षयान मैसेंजर बुध ग्रह की परिकमा के लिए उसकी कक्षा में पहुँच गया। मैसेंजर का पूरा नाम है‚मरकरी सरफेस स्पेस एन्वायरोनमेंट जियोकेमिस्ट्री एंड रेंजिंग।` 'मैसेंजर का उद्देश्य उस जगह का पता लगाना है, जो पहले कभी नहें देखी जा सकी थी। विदा ले चुके साल में ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के खगोलविद् डेनियल वेलिस और उनके सहयोगियों ने एक सुदूरवर्ती ग्रह का पता लगाया,जो अपने तारे की विपरीत दिशा में परिकमा कर रहा है। इसकानाम है‚'डब्ल्यूएएसपी‚17 बी।` इस खोज ने ग्रह सिद्धांतों को प्रश्नों के घेरे में खड़ा कर दिया। प्रचलित धारणा है कि एक ग्रह ठीक उसी दिशा में तारे का चक्कर लगा रहा है, जिस दिशा में तारा अपनी धुरी पर घूम रहा है। उल्टी परेक्रमा कर रहे ग्रह की खोज डेविड आर. एंडरसन ने 2009 में की थी।
वर्ष में मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश लिए 26 नवम्बर को मानवरहित परमाणु ऊर्जा चालित रोवर सफलतापूर्वक भेजा गया। यह रोवर अगले साल मंगल की सतह का स्पर्श करेगा। इस रोवर को 'क्यूरोसिटी` नाम दिया गया है। वास्तव में यह एक अति उन्नत विज्ञान प्रयोगशाला है। इस बीच 'साइंस` में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार मंगल ग्रह पर प्रवहमान जल का पता चला है। इस वर्ष 15 जुलाई को डॉन अंतरिक्षयान क्षुद ग्रह में स्थापित किया। अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में पहली बार कोई& अंतरिक्षयान क्षुद ग्रह तक पहुंचा। बीते साल के अंत में सौरमंडल के बाहर पफथ्वी के आकार के दो ग्रहों का पता चला, जिन्हें केप्लर 20‚ई और केप्लर 20‚एफ नाम दिया गया है। इन ग्रहों की खोज का महत्व यही है कि इनके मिलने से पफथ्वी जैसे ग्रहों की खोज यात्रा आगे बढ़ी है।
इस वर्ष यूरी गगारिन की प्रथम अंतरिक्ष यात्रा के पचास वर्ष पूरे हुए और स्वर्ण जयंती मनाई गई। यह वही वर्ष था, जब नासा ने अपने स्पेस शटलों की तीन दशकों की यात्रा को अलविदा कह दिया। तीन दशकों में नासा ने चैलेंजर, कोलंबिया, डिस्कवरी और एंडेवर का उपयोग उपग्रहों को स्थापित करने, अंतरिक्ष यात्राओं और अंतरिक्ष स्टेशनों के निर्माण के लिए किया। 12 जुलाई 1981 को कोलंबिया की टेस्ट प्लाइट के साथ स्पेस शटलों की उड़ानें शुरु हुई थीं।
इसी वर्ष में खगोल वैज्ञानिकों ने एक नई राशि 'ओफियूकस` का दावा किया। इससे परम्परागत ज्योतिषविदों में वैचारिक हलचल मच गई। नई राशि का जन्म पफथ्वी के समय के साथ अपनी धुरी पर झुकने के कारण आया है। यह झुकाव चन्दमा के पफथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की ओर आकर्षित होने से पैदा हुआ है। अब राशियों की संख्या बारह से बढ़कर तेरह हो गई है। नई राशि 'ओफियूकस` वफश्चिक के बाद और धनु के पहले है।
गुजरा साल भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान में बड़ी उपलब्धियों का रहा। 'इसरो` ने 20 अप्रैल को पीएसएलवी‚सी‚16 यान के जरिये रिसोर्ससेट‚2 सहित तीन उपग्रहों को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक विदाई दी। इस उपग्रह का वजन 1206 किग्रा.और जीवनकाल पांच वर्ष है। इससे फसलों की स्थिति, वनों की कटाई पर निगरानी,जलाशयों एवं झीलों में जल और हिमालय में बर्फ पिघलने की स्थिति का आकलन किया जा सकेगा। आपदा प्रबंधन में भी सहायता मिलेगी। यूथसैट का निर्माण भारत और रूस ने मिलकर किया है। इसका उपयोग तारामंडल और पर्यावरण के अध्ययन में किया जायेगा। सिंगापुर के उपग्रह एक्ससैट का उपयोग मानचित्रीकरण में किया जायेगा। इस वर्ष के उत्तरार्द्ध में इसरो ने 12 अक्टूबर को ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपणयान सी‚18 से मौसम उपग्रह सहित चार उपग्रहों को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक स्थापित किया। अब भारत मौसम उपग्रह भेजने वाला दुनिया का दूसरा देश है। एक हजार किग्रा. वजनी मेघा ट्रॉपिक को उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों और वायुमंडलीय परिवर्तनों का अध्ययन करने के लिए तैयार किया गया है।
बीते साल में वैज्ञानिकों ने पहली कृत्रिम पत्ती विकसित की, जो सूर्य की रोशनी से ऊर्जा का उत्पादन कर सकती है। इस प्रयोग की टीम का नेतफत्व कर रहे डेनियल नोसेरा ने कहा कि दशकों से एक कृत्रिम पत्ती विकसित करने का वैज्ञानिकों का सपना पूरा हुआ। अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका 'जूटेक्सा` के अनुसार अरुणाचल प्रदेश के कामेंग जिले में मेंढक की नई प्रजातियों का पता चला। संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2011 को अंतर्राष्ट्रीय वानिकी वर्ष घोषित किया, जिसका उद्देश्य सभी प्रकार के वनों के सतत प्रबंधन,संरक्षण एवं विकास के प्रति जागरुकता बढ़ाना था।
वर्ष 2011 में विरोध और आलोचनाओं के बीच जेनेटिक इंजीनियरी के प्रयोग जारी रहे। मलेरिया के विरुद्ध जंग जारी रही और अनुसंधानकर्ताओं ने आनुवंशिकी रूप से परिवर्तित मच्छरों के सफजन का प्रयास किया। विज्ञान की प्रतिष्ठित 'साइंस` पत्रिका के अनुसार शोधकर्ताओं ने कम्प्यूटर की सहायता से प्लूरोधी औषधियों की डिजाइन तैयार की। इसी वर्ष ऑनलाइन ज्ञानकोश विकीपीडिया की स्थापना के दस वर्ष पूरे हुए। जिमी वेल्स और लैरी सैंर ने 15 जनवरी 2001 को इसकी स्थापना की थी। जानकारों का कहना है कि अगर इसे पुस्तकों में बदला जाये तो दस हजार पुस्तकें छापना पड़ेंगी।
वर्ष 2011 का विज्ञान के तीनों विषयों में दिया गया नोबेल सम्मान सात वैज्ञानिकों को प्रदान किया गया। रसायन विज्ञान में क्वासी किस्टलों के अध्येता डेनियल शेक्टमैन को अकेले ही इस पुरस्कार के लिए चुना गया। औषधि विज्ञान में सम्मान के सहभागी वैज्ञानिक रॉल्फ स्टीनमैन का दुर्भाग्यवश 3 अक्टूबर को निधन हो गया। नोबेल समिति ने उनके निधन से पहले ही पुरस्कार प्रदान करने का निर्णय कर लिया था, अत: उन्हें यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किया गया। नोबेल पुरस्कारों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ। विज्ञान को राजनीति से जुदा नहीं किया जा सकता। परमाणु रिएक्टर हादसे और प्रलयंकारी सुनामी मे विफलताओं के बाद जापान के प्रधानमंत्री नाओतो ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। उत्तर कोरिया को परमाणु विज्ञान के मानचित्र पर जगह दिलाने वाले वहां के राष्ट्रपति किम जोंग इल का दिसम्बर में देहांत हो गया। उन्होंने अपने देश में लंबी दूरी के मिसाइल कार्यकम को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमेका निभाई। बीते साल भी अंतरिक्ष विज्ञान पर भारी धनराशि खर्च हुई,क्योंकि सरकारों की प्राथमिकता में यही सबसे ऊपर रहा। गुजरे साल भी अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा को वित्तीय संकट का चेहरा देखना पड़ा। दिसम्बर में अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने जिनेवा में जैविकी हथियारों पर रोक लगाने संबंधी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवादियों के हाथों में आधुनिक जीन प्रौद्योगिकी पहुंचने से जैविकी हथियारों का खतरा बढ़ रहा है, जो चिंता का विषय है। इसी वर्ष के उत्तरार्द्ध में हमारे देश में राज्यसभा में मानव अंग प्रत्यारोपण संशोधन विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया।
वर्ष 2011 में हमने विज्ञान जगत के कुछ दैदीप्यमान रत्नों को खो दिया। 9 नवम्बर को नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉ. हरगोविन्द खुराना का निधन हो गया। उन्हें 1968 में आरएनए के न्यूक्लियोटाइड अनुकम और जेनेटिक कोड में विशेष शोध के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया था। इस वर्ष विख्यात परमाणु वैज्ञानिक डॉ. पी.के. अयंगर का देहांत 21 दिसंबर को हो गया। उन्होंने 1974 में किये गये प्रथम परमाणु परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सुप्रसिद्ध गणितज्ञ ए.रंगनाथ राव का 11 अप्रैल को निधन हो गया। उन्होंने अहमदाबाद स्थित विप्रम साराभाई कम्युनिटी साइंस सेंटर में गणित की प्रयोगशाला स्थापित की थी। उन्हें विज्ञान और गणित को लोकप्रिय बनाने की दिशा में विशेष योगदान के लिए राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद् ने पुरस्कृत किया था।
18/1, शांतिनिकेतन, भोपाल, 462023, म.प्र.
E-mail : jchakres2003@yahoo.com
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