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              इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए अंक 194,वर्ष 23,जुलाई 2010
 
 
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पारंपरिक कोर्सेस की बढ़ती मांग
सेक्ट कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल एजुकेशन

आज के समय में व्यावसायिक कोर्सेस की भरमार और उनको हासिल करने की भागमभाग बढ़ती जा रही है। चाहे वो इंजीनियरिंग हो, एम बी ए हो या फिर ऑडिट अकाउंटिंग से संबंधित कोर्सेस हों। लेकिन इसी भागमभाग के बीच पुराने पारम्परिक कोर्सेस एक मजबूत दीवार की तरह अडिग खड़े हैं। चाहे वो बी. कॉम हो, बी.बी.ए. हो, बी सी ए हो, बी एस सी हो या फिर बी.ए. हो।
पिछले 5 वर्षों में एक समय ऐसा आया था जब लगने लगा था कि अब नये कोर्सस का जमाना है और पुराने कोर्सेस बंद हो जाएंगे। किन्तु धीरे-धीरे साल दर साल यह तथ्य सामने आया कि बरसों से चले आ रहे कोर्सेस जैसे वाणिज्य शिक्षा, कम्प्यूटर, मैनेजमेंट, आर्ट्स आदि ऐसे कोर्सस हैं जिनकी मांग लगातार बनी हुयी है। इसके पीछे के संभावित कारणों की यदि बात करें तो यह बात समझ में आयेगी कि व्यावसायिक कोर्सेस जैसे इन्जीनियरिंग, एम.बी.ए. आदि की मांग बढ़ते ही कुछ सक्षम और कुछ अकादमिक रूप से अक्षम व्यवसायियों ने महाविद्यालय को कम लागत में ज्यादा लाभ देने वाला व्यवसाय समझकर इसको प्रारम्भ कर दिया।
परिणाम स्वरूप हुआ यह कि महाविद्यालयों की संख्या अर्थात् व्यवसायिक कोर्सेस की सीट्स व छात्रों की उपलब्धता का अनुपात गड़बड़ा गया। सीट से अधिक छात्र हो गये जिसके कारण प्रतियोगिता समाप्त हो गयी, और जैसे ही प्रतियोगिता समाप्त हुई विषय की मांग कम हो गयी। इसी दौरान रिसेशन का दौर चला और व्यवसायिक कोर्सेस के जरिये अधिक वेतन अर्थात् पैकेज वाले लोगों को नौकरियों से बेदखल किया जाने लगा। इस सारे घटनाक्रम का अर्थ यह है कि इतने ज्यादा उतार-चढ़ाव से अस्थिरता पैदा हुई जिससे छात्रों व अभिभावकों में असमंजस बढ़ने लगा। इसी असमंजस और कैरियर की निश्चिंतता के मद्देनजर छात्रों ने अपना रुख पारम्परिक कोर्सेस की ओर किया। क्योंकि व्यवसायिक अथवा पारम्परिक कोर्सेस में स्नातक उपाधि के बाद भी छात्रों को बहुत सारी कैरियर की सम्भावनाएं बनती हैं। चाहे व्यवसायिक कोर्स हो या बी एस सी, बी कॉम के डिग्री कोर्स, सभी एम बी ए या अन्य स्नातकोत्तर कोर्सेस कर सकते हैं। इन कोर्सेस की फीस भी व्यावसायिक कोर्सेस की तुलना में कम होती है। वो सभी शासकीय व गैर शासकीय विभाग अभी भी बी.कॉम., बी सी ए, बी.ए. जैसे कोर्सेस की मांग करते हैं जो पूर्व से स्थापित हैं। पारम्परिक कोर्स के छात्र अपनी स्नातक की पढ़ाई के साथ-साथ यदि आईसेक्ट-इग्नू में संचालित कोर्सेस भी कर लेते हैं तो उनकी मार्केट वेल्यू में वफद्धि होती है तथा वे अच्छे पैकेज में काम कर सकते हैं। आईसेक्ट द्वारा पारंपरिक कोर्सेस हेतु सेक्ट कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल एजुकेशन की स्थापना भोपाल में की गयी है।
अभी सामान्य कोर्सेस में प्रवेश प्रक्रिया चालू है और अपनी इन बातों के तथ्यों को परखने के लिये मैंने वर्तमान में अपने महाविद्यालय के साथ-साथ कई अन्य महाविद्यालयों का सर्वेक्षण किया तो ये सिद्ध हुआ कि व्यावसायिक कोर्सेस की तुलना में पारंपरिक कोर्सेस की मांग यथावत है। सभी महाविद्यालय सामान्यत अपनी सीट्स भर रहे हैं वहीं दूसरी ओर बी.ई. में प्रवेश के लिये गलाकाट प्रतिस्पर्धा जारी है।
हाँ, कुछ पुराने कोर्सेस जो भाषा, इतिहास एवं कला से संबंधित हैं उनमें नकारात्मक प्रभाव हुआ है और जो पारंपरिक कोर्सेस होते हुये भी आधुनिकता को समाहित किये हुये हैं उनका वर्चस्व स्थापित है।

 डॉ. सत्येन्द्र खरे

प्रवेश प्रक्रिया
  • सेक्ट कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल एजुकेशन में बी.सी.ए., बी.कॉम, बी.एस.सी, बी.एड, पीजीडीसीए, एमसीए एवं एमकॉम कोर्स में प्रवेश दिया जाता है।
  • स्नातक पाठ्यक्रम हेतु न्यूनतम योग्यता 12 वीं परीक्षा उत्तीर्ण होना तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम हेतु स्नातक होना अनिवार्य है।
  • कोर्स व प्रवेश संबंधित जानकारी के लिये सेक्ट कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल एजुकेशन, स्कोप कैम्पस, एन.एच-12, मिसरोद के पास, होशंगाबाद रोड, भोपाल-26,
    मोबाइल नंबर : 09425600330, 9827294732 पर संपर्क कर सकते हैं।
 
 
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