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विशेष रिपोर्ट
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वाँ विश्व पुस्तक मेला : विशेष रिपोर्ट
किताबों के
महाकुंभ में उमड़ा पुस्तक प्रेमियों का सैलाब
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मनीष श्रीवास्तव
एवं पंकज शर्मा
कई देशों की सभ्यता को पुस्तकों की शक्ल में
समेटे हुये व जन-जन तक किताबों के जरिए स्तरीय साहित्य उपलब्ध कराने के
उद्देश्य से 19 वें विश्व पुस्तक मेले का शुभारंभ 29 जनवरी को माननीय
केन्दीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री कपिल सिब्बल द्वारा किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जाने-माने इतिहासकार प्रोफेसर इरफान
हबीब के साथ अन्य गणमान्य अतिथियों में नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष व
इतिहासकार प्रोफेसर विपिन चंदा, तेक्सुला आओ (डीन, मानविकी संकाय,
शिलांग विश्वविद्यालय), नेशनल बुक ट्रस्ट की निदेशक श्रीमती नुजहत हसन,
भारतीय प्रकाशक संघ के अध्यक्ष श्री आनंद भूषण उपस्थित थे।
मानव संसाधन विकास मंत्री ने उद्घाटन अवसर पर
विश्व पुस्तक मेला को एफ्रो-एशियाई क्षेत्र का सबसे बड़ा मेला बताया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में अंग्रेजी में सालाना सौ हजार किताबें छप
रही हैं जिसमें भारत तीसरे सबसे बड़े अंग्रेजी प्रकाशक के रूप में उभर
रहा है, जो गर्व की बात है। उन्होंने इंजीनियरिंग, प्रबंधन व चिकित्सा
की तरह कला विषयों पर आधारित एक विश्वविद्यालय खोलने की बात पर भी जोर
दिया। मुख्य अतिथि प्रोफेसर इरफान हबीब ने इस अवसर पर पुस्तक मेले के
आयोजन को भारतीय सभ्यता के विकास का अहम पड़ाव बताया। उन्होंने मानव
संसाधन विकास मंत्री से आग्रह किया कि वे अनुदान में वृद्धि के साथ
विश्वविद्यालयी व अन्य शिक्षा तंत्र की गुणवत्ता कायम रखने के लिए
आवश्यक निगरानी की व्यवस्था करें।
दुनिया
भर से आए प्रकाशकों का लगा जमावड़ा
दिल्ली के प्रगति मैदान परिसर में नेशनल बुक
ट्रस्ट द्वारा आयोजित 42 हजार वर्गमीटर में फैले विश्व पुस्तक मेले में
15 अन्य देशों के 35 प्रकाशकों ने भी हिस्सा लिया। मेले में कुल 1199
प्रकाशकों ने 2400 बुक स्टॉल लगाए, जिसमें हर आयु वर्ग के लिए कुछ न
कुछ खास साहित्य उपलब्ध था। मेले में अंतर्राष्ट्रीय संगठनों जैसे
आईएलओ, डब्ल्यूएचओ और यूनेस्को जैसी संस्थाओंब्ल्यूएचओ और यूनेस्को जैसी
संस्थाओं ने भी भागीदारी की।
विख्यात लेखकों व राजनीतिज्ञों ने की शिरकत
9 दिन तक चले पुस्तक मेले के महाकुंभ में
विख्यात लेखकों व राजनीतिज्ञों ने शिरकत कर मेले की उपयोगिता को और भी
बढ़ा दिया। पहले ही दिन विवादित पुस्तक 'जिन्ना : भारत विभाजन
के आईने में' के लेखक श्री जसवंत सिंह ने मेले में पहुँचकर अपनी पुस्तक
का प्रमोशन किया तो वहीं बच्चों के चहेते व जाने-माने कहानीकार रस्किन
बांड भी मेले में पहुंचे जिनसे बच्चों ने सवाल-जवाब भी किए। युवाओं के
बीच लोकप्रिय उपन्यासकार श्री चेतन भगत भी मेले में पहुंचकर युवाओं से
रूबरू हुए। पूर्व राष्ट्रपति डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भी मेले में
शिरकत की व कई स्टालों का अवलोकन कर युवाओं में पुस्तकों के प्रति रूचि
देखकर प्रसन्नता जताई। इसके अलावा मेले में राजनीतिज्ञ श्री विजय
मल्होत्रा, केन्दीय खेल मंत्री श्री एम.एस. गिल व अन्य जाने-माने लेखकों
ने उपस्थिति दर्ज कराई।
संगोष्ठी, लोकार्पण व रंगारंग कार्यप्रमों का चला
दौर
19 वां विश्व पुस्तक मेला इस बार कुछ खास रहा।
मेले में जहाँ एक ओर पुस्तक प्रेमियों का हुजूम उमड़ता रहा वहीं दूसरी
ओर अलग से एक हाल की व्यवस्था की गई थी जहाँ पुस्तक प्रकाशन और उनका
भविष्य, उभरते तकनीकी युग में मीडिया की भूमिका जैसे विषयों पर संगोष्ठी
तथा विभिन्न पुस्तकों का लोकार्पण व बच्चों द्वारा कई नाटकों व रंगारंग
कार्यप्रमों का आयोजन किया गया। ऑन-लाइन बुक स्टोर तथा ऑन-लाइन
लाइब्रेरी का शुभारंभ भी इस वर्ष मेले में किया गया। साथ ही
राष्ट्रमंडल खेलों को ध्यान में रखते हुये थीम पैवेलियन में खेल-कूद पर
आधारित 700 से अधिक पुस्तकों की प्रदर्शनी पुस्तक मेले में विशेष
आकर्षण का केन्द रही।
प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू पर
एवं उनके द्वारा लिखित पुस्तकों की खास प्रदर्शनी का आयोजन नेशनल बुक
ट्रस्ट द्वारा किया गया। प्रदर्शनी में 400 से अधिक पुस्तकों का
प्रदर्शन किया गया, जो मेले में विशेष आकर्षण का केन्द था।
साइबर युग में भी दिखासाइबर युग में भी दिखा
पुस्तकों का जलवा
अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित पुस्तक मेले
में उमड़ी पुस्तक प्रेमियों की भीड़ ने एक बार फिर मानव जीवन में साइबर
युग में भी किताबों की अहमियत को साबित कर दिया। वर्तमान में जब बच्चे
टी.वी. या इंटरनेट में उलझ कर रह गये हैं ऐसे में किताबों के संसार में
बच्चों ने इतनी बड़ी संख्या में दस्तक देकर जता दिया कि किताबें ही
इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं और किताबों से मिला ज्ञान ही हर
उम्र में व जीवन के हर मोड़ पर काम आता है।
19 वें विश्व पुस्तक मेले में दर्जन भर
स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने "बुक मार्च'' में न सिर्फ भाग लिया बल्कि
पुस्तकों के संबंध में जानकारियाँ भी हासिल की। विद्यार्थियों ने कई
साहित्य कार्यप्रमों में भाग लिया तथा औरों को भी पुस्तकों के प्रति
प्रेरित किया। पुस्तकों के प्रति बच्चों में दिखे गहरे रूझान ने उन सभी
धारणाओं को गलत साबित कर दिया जिनके मुताबिक लगता था कि बच्चे आज किताबों
से दूर होते जा रहे हैं। बच्चों से लेकर युवाओं ने, युवाओं से लेकर
बुजुर्गों ने विश्व पुस्तक मेले में विशेष रूचि दिखाकर मेले को सफल
बनाया।
19 वाँ विश्व पुस्तक महोत्सव न सिर्फ विभिन्न
देशों के साथ व्यापार और सांस्कृतिक संबंध बढ़ाने में सहायक रहा बल्कि
मेले ने प्रकाशन उद्योग की शक्ति को भी साबित करने के लिये एक मंच का
सफलतापूर्वक कार्य किया। मेले में पुस्तक प्रेमियों की बढ़-चढ़कर ली
हिस्सेदारी से यह बात स्पष्ट हो गई कि
"भले ही लाख कोशिश कर लो तुम, कितनी ही किताबे
महंगी कर लो तुम।
छपे शब्दों को मैं छूकर पढूंगा जरूर, दूर
कागज को कितना ही कर लो तुम।।''
997
वीं इंडियन
साइंस
कांग्रेस : एक रिपोर्ट
चेन्नई में पुन मुलाकात के साथ साइंस पांग्रेस
संपन्न
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संजय वर्मा
3 जनवरी से 7 जनवरी तक तिरुअनन्तपुरम (केरल)
में 97 वें इंडियन सांइस कांग्रेस का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। इस
साइंस कांग्रेस में देश के लगभग सभी राज्यों/प्रान्तों के लगभग 8000
प्रतिनिधियों एवं लगभग 3000 स्थानीय वालेन्टियर कर्मचारियों व स्थानीय
स्कूल/कॉलेज के विद्यार्थियों ने शिरकत की। प्रतिनिधियों में मुख्य रूप
से विज्ञान विद्यार्थी, शोध छात्र, अध्यापक, विश्वविद्यालय व विभिन्न
शिक्षण/तकनीकी संस्थाओं के अध्यापन से जुड़े अध्यापक एवं प्रशिक्षणार्थी,
विज्ञान व मीडिया से जुड़े लेखक एवं अन्य विज्ञान संचारक आदि शामिल रहे।
देश के इस सबसे बड़े विज्ञान मेले 97 वें
इंडियन साइंस कांग्रेस का उद्घाटन 3 जनवरी को केरल विश्वविद्यालय में
विशेष तौर से निर्मित मुख्य पंडाल में देश के प्रधानमंत्री माननीय
डॉ.मनमोहन सिंह ने प्रात 10 बजे किया। इंडियन स्पेस रिचर्स
आर्गेनाइजेशन (इसरो) एवं केरल विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान एवं
इंडियन सांइस कांग्रेस एसोसिएशन (कोलकाता) के दिशा-निर्देश में आयोजित
उक्त कांग्रेस में माननीय डॉ. मनमोहन सिंह ने देश को और अग्रणी बनाने
एवं राष्ट्रीय विज्ञान विकास से ओत-प्रोत आयोजित इस साइंस पांग्रेस की
भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुये कहा कि उम्मीद ही नहीं पूर्ण विश्वास है
कि यह कांग्रेस देश में विज्ञान की गति को आगे बढ़ाने के लिए मील का
पत्थर साबित होगा। इस अवसर पर उनके साथ केरल के राज्यपाल माननीय श्री
आर.एस.गावई, माननीय मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन, केबिनेट सहयोगी
माननीय वी.रवि, माननीय पृथ्वीराज चौहान, माननीय शशि थरूर एवं कांग्रेस
(97 वें) के अध्यक्ष डॉ. जी. माधवन नायर सहित विज्ञान की कई अन्य
हस्तियों ने अपने-अपने विचार रखें। अंत में मुख्य अतिथि डॉ. मनमोहन
सिंह ने विज्ञान के क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिए Millenium
Plaques of Honour, Jawaharlal Nehru Birth Centenary Award,
Excellence in Science and Technology Award, Prof. R.C.Mehrotra
Memorial Life Time Achivement Award सहित कई इसका (ISCA) राष्ट्रीय
पुरस्कार प्रदान किये। 3 जनवरी को ही लंच उपरांत 2 बजे "Science and
Technology Challenges of 21st Century National Perspective" विषय पर
मुख्य पंडाल में ही वर्तमान अध्यक्ष डॉ. माधवान नायर की अध्यक्षता एवं
समन्वयक डॉ.वी.एस. हेगड़े (इसरो) की देख-रेख एवं डॉ. के. कस्तुरीरंगन,
डॉ.एम.एस. स्वामीनाथन एवं डॉ.एस.बनर्जी जैसे अनुभवी वक्ताओं (सदस्यों)
की उपस्थिति में गहमा-गहमी से चर्चा हुई। इसी दिन सायं 3:45 बजे मुख्य
पंडालइसी दिन सायं 3:45 बजे मुख्य पंडाल में ही "साइंस प्रोग्राम फॉर
दा कंट्री'' विषय पर श्री एम.ए. बेबी, शिक्षा मंत्री (केरल) की
अध्यक्षता, डॉ. के. द्विवेदी, सलाहकार (डी.एस.टी.) (समन्वयक) के
साथ-साथ श्री टी. रामास्वामी (सचिव) विज्ञान एवं तकनीकी, डॉ.के.
राधाकृष्णन (अंतरिक्ष विज्ञान) जैसे अनुभवी वक्ताओं ने अपने-अपने विचार
रखे।
4 जनवरी को मुख्य पंडाल में स्पेस सम्मिट
प्रोग्राम के तहत डॉ. के. राधाकृष्णन् (चेयरमैन-इसरो) की अध्यक्षता में
डॉ. श्रीमती डी.आर.सूथा, प्रो. यू.आर.रॉव, डॉ. जॉन सी मेथर, डॉ.लार्स,
डॉ.सी.जी. कृष्णादास नायर, डॉ. मार्क पिर्चर, श्री एस. रामकृष्णन एवं
"फुड एंड न्यूट्रीशनल सिक्यूरिटी'' विषय पर गोल्डन जुबली हॉल में
आयोजित डॉ.एम.एस.स्वामीनाथन (चेयरमैन), डॉ. वाई.वी.एन.कृष्णामूर्ति (समन्वयक)
सहित डॉ. वी. प्रकाश, डॉ.उमेश कपिल, डॉ. राकेश तुली ने अपने-अपने विचारों
से सिंचित किया। 97 वें इन्डियन साइंस कांग्रेस के दौरान पूर्व कुछ
वर्षों की भांति तृतीय विज्ञान संचारक सम्मेलन का भी वृहद आयोजन किया
गया। बायो केमेस्ट्री लाइब्रेरी हाल में आयोजित उक्त विज्ञान सम्मेलन
में देश के इसका के विभिन्न चैपटर के अनेक संचारको ने भाग लिया। उक्त
सम्मेलन में डॉ. आलोक रस्तोगी, डॉ.एस. आर.जोशी, प्रो. प्रकाश मणिथपुरे,
डॉ. अनिल कुमार, डॉ.के.गणेश राज, श्री धीरेन्द गोधा, डॉ.पुष्पेन्द पाल
सिंह (विभागाध्यक्ष-माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल)
सहित उनके विद्यार्थियों कु. संवेदना सक्सेना, वंदना कुमारी, धीरेन्द
सिंह सहित 15 संचारकों ने भाग ले अपने-अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। बायो
केमेस्ट्री लाइब्रेरी हाल में हुये इस दो दिवसीय संचारक सम्मेलन का
उद्घाटन डॉ. जी. माधवान नायर एवं स्वागत डॉ. अशोक कुमार सक्सेना (सचिव)
इसका एवं अध्यक्षता प्रो.ए. जयकृष्णन, कुलपति, केरल विश्वविद्यालय व
समन्वयक की भूमिका श्रीमती ए.एस.पद्मावती (इसरो) ने निभायी। इस अवसर पर
डॉ. मनोज कुमार पटैरिया ने पहले एवं डॉ. अनुज सिन्हा ने दूसरे सत्र की
अध्यक्षता की।
4 जनवरी को ही चिल्ड्रन्स साइंस कांग्रेस का
शुभारम्भ हुआ जिसका उद्घाटन माननीय डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (पूर्व
राष्ट्रपति) ने चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस पंडाल में नन्हें विद्यार्थियों
एवं अन्य गणमान्य नागरिकों व विभिन्न प्रान्तों से आये प्रतिनिधियों के
बीच किया। इसी प्रम में सांय मुख्य पंडाल में आयोजित एक पब्लिक लेक्चर
का भी आयोजन किया गया जिसे मुख्य रूप से डॉ. एस.के. ब्रह्मचारी (सीएसआईआर),
डॉ. ए.डी.मूर्ति एवं वक्ता के रूप में पूर्व राष्ट्रपति माननीय
डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने अंतरिक्ष विज्ञान, कृषि विज्ञान, चिकित्सा
विज्ञान, रक्षा विज्ञान, भू-विज्ञान, नैनो टैक्नॉलॉजी आदि उच्च विषयों
के सभी कारकों पर विस्तृत चर्चा कर भारतीय विकास के तुलनात्मक आकलन एवं
सफलता के आंकड़ों सहित प्रस्तुत कर उल्लेखनीय व रोचक बना दिया।
5 जनवरी को प्रात 1 बजे मुख्य पंडाल में "हेल्थ
: करेन्ट इश्यू ऑन बायोमेडिकल रिसर्च स्टडीज्'' विषय पर डॉ. आई.
जुकेर(चेयर), डॉ. टी.के.बोस (समन्वयक) सहित डॉ. एस.डेविड विल्सन,
डॉ.कृष्णा अग्रवाल, डॉ. हरीश पंत, डॉ. जी. सीक आदि अन्य कई अनुभवी
वक्ताएं ने अपने विचार रखें तो वही गोल्डन जुबली हाल में समानान्तर चल
रहे सत्र "वेदर क्लाइमेट एंड इन्वायरमेंट'' विषय पर प्रो. आर. नरसिम्हा
(चेयर), आदि एवं सायं 5:30 बजे मुख्य पंडाल के एक पब्लिक लेक्चर
कार्यप्रम में डॉ.विकास सिन्हा (समन्वयक) सहित आर.डी. बिरला अवार्ड
लेक्चर प्रो.एम.जे.के. मेनन एवं प्रो. अतुल गुरटु ने विस्तृत रूप से
अपने विचार रखे। रात्रि में एक शानदार सांस्कृतिक संध्या के भी सफल
आयोजन के साथ-साथ तीसरे विज्ञान संचारकसम्मेलन का समापन समारोह भी
संपन्न हुआ।
6 जनवरी को प्रात 9 बजे 97 वे इंडियन साइंस
कांग्रेस के लिये विशेष रूप से बनाये गये सुंदर पंडाल में "नैनो
टेक्नॉलॉजी एंड एजुकेशन''(प्लेनरी) विषय पर डॉ. जी. सुंदरम (चेयर),
डॉ.के. एन. नीनन (को-आर्डिनेटर) सहित प्रो.डी बहादुर, प्रो. शान्ति
नायर, डॉ.स्वामीनाथन एवं डॉ. जार्ज थॉमस एवं इसी सत्र के समान्तर चल रहे
गोल्डन जुबली हॉल में यूनिवर्सिटी मीट प्रोग्राम में प्रो. एस.पी.
त्यागराजन (चेयर), डॉ. बी. इकबाल (को-चेयर), प्रो. पी.आर. सुधाकरन (को-आर्डिनेटर)
सहित प्रो.कारियो रिजोलो (इटली), डॉ. वी.एन.आर. पिल्लई, डॉ.
पी.टी.मनोहरन, डॉ. बी. इकबाल, डॉ.के.राधाकृष्णन एवं बायो केमेस्ट्री
हाल में बायो टेक्नॉलॉजी विषय पर डॉ. जी.एम. नायर (चेयर), डॉ. अजय परिदा,
डॉ. कृष्णा, डॉ.ओनिम राजू, डॉ.एस.आर. रॉव, डॉ. समीर भट्टाचार्य, डॉ.
गीता बाली, प्रो. एस.पी. निरंजन ने अपने विचार से सभी को लाभान्वित किया।
इसी तरह से 7 जनवरी को मुख्य पंडाल में प्रात
9 बजे बायो डायवरसिटी एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (प्लेनरी) विषय पर डॉ.
एम.एस.स्वामीनाथन (चेयरमेन), डॉ. आर.एस.पारिदा (को-चेयर), डॉ.
पी.एल.गौतम (कनवेनर) सहित डॉ. सुजाता अरोरा, डॉ. ए.के. घोष, डॉ.
एस.नागराजन, डॉ.पी.एल. गौतम एवं गोल्डन जुबली हॉल में समानान्तर सत्र
में "एनर्जी'' विषय पर डॉ. अनिल काकोड़कर (चेयर), डॉ. एस.के. चौपड़ा
(को-आर्डिनेटर) सहित डॉ.एस.बेनर्जी, डॉ. एच.एस.ब्रह्मा, डॉ. आर.एस.
शर्मा, डॉ. पी.एस. भट्टाचार्य, डॉ.एस.के. चौपड़ा, डॉ. विजय शर्मा व
समान्तर सत्र में "इनफार्मेशन टेक्नॉलॉजी''(प्लेनरी) पर डॉ. अजय कुमार
(चेयर), श्री एस. गोपा कुमार (को-आर्डिनेटर) सहित डॉ. एस.वी.इंग्ले,
डॉ. एल.एम. पटनायक, श्री डी. विनीत कुमार वक्ताओं ने गहमा-गहमी से चर्चा
की। उक्त मुख्य लेक्चरों एवं विषयों की प्रस्तुति के बीच सेक्शनल
प्रोग्राम्स जिसके उप-विषयों में एग्रीकल्चर एंड फारेस्ट्री साइंस,
एनीमल, वेटनरी एंड फिशरीज साइंस, एन्थ्रोपॉलोजिकल एंड बिहेविअरल साइंस,
एन्वायरमेंटल साइंस, इन्फार्मेशन एंड कम्युनिकेशन साइंस एंड टेक्नॉलॉजी,
मटेरियल साइंस, मेथेमेटिकल साइंस, मेडिकल साइंस, न्यू बायोलॉजी (बायोकैमेस्ट्री,
बायो फिजिक्स एंड माल्यूक्यूलर बायोलॉजी एंड बायोटेक्नॉलॉजी सहित) एवं
प्लॉन्ट साइंस आदि शामिल हैं, के हजारों शोध-पत्र/सारांश पत्र व
पोस्टर प्रस्तुतिकरण अलग-अलग स्थानों एवं समानान्तर सत्र के रूप में
किये गये। 14 विषयों के उक्त सेक्शनल प्रोग्राम 4 जनवरी से 7 जनवरी तक
लगातार चलते रहें। उक्त में सुश्री मीनाक्षी दहाईयाँ, डॉ. डी.एस. गुप्ता,
श्री संजय वर्मा, श्री अनानास कुमार सहित सैकड़ों शोध पत्र अपने प्रभाव
छोड़ने में सफल रहे। सभी विषयों के सेक्शनल प्रेसीडेंट, लोकल सेक्शनल
सेप्रेटरी एंव सेक्शनल रिकार्डर ने काफी लगातार मशक्कत कर अपने कार्यों
एवं जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जिसकी जितनी भी तारीफ की जाए कम होगा।
यही नहीं, 97 वे इंडियन साइंस कांग्रेस की
आयोजन कमेटी जिनमें प्रमुख रूप से परिवहन समिति, आवास समिति एवं भोजन
समितियाँ आदि शामिल हैं, ने संपूर्ण कार्यप्रम में चार-चाँद लगा दिये।
कुछ खट्टी-मीठी यादों के बीच उत्तर एवं दक्षिण भारत दोनों के भोजनों एवं
नाश्तों के बीच सभी प्रतिनिधियों ने कन्याकुमारी एवं आस-पास के पर्यटन
स्थानों का खूब आनंद लिया। उक्त आयोजन ने यह दर्शाया कि अगर नियोजित
तरीके से विज्ञान विकास की बात की जाये तो देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं
है। अगले 98 वें इंडियन सांइस कांग्रेस के चेन्नई घोषणा के बाद उक्त
कांग्रेस का समापन कर दिया गया।
25, बक्शीपुर,
गोरखपुर-273001, उ.प्र.
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