|
जहाँ संवरता है देश का भविष्य
स्कोप पब्लिक हायर सेकंडरी स्कूल स्कूल की शिक्षा अनिवार्य क्यों है?
वर्तमान वैज्ञानिक युग या कम्प्यूटर और इंटरनेट के युग को लक्ष्य करते हुए हम कह
सकते हैं कि आज बच्चों के लिए स्कूली शिक्षा अत्यंत अनिवार्य है। स्कूल ही एक ऐसा
माध्यम है जहां बालक विभिन्न गतिविधियों से जुड़ता है और बाह्य और आंतरिक ज्ञान
अर्जित करता है तथा उठने-बैठने के तौर-तरीके एवं शिष्टाचार सीखता है। स्कूल में
शिक्षा ग्रहण करके ही बालक विनम्र और अनुशासन में रहना सीखता है, साथ ही स्कूल में
अन्य बालकों से मिलकर वह उनसे भी बहुत कुछ सीखता है। उनकी भाषा, बोली, खान-पान,
वेशभूजाा आदि से परिचित होता है। इस प्रकार बिना मेहनत के वह बहुत कुछ सीख लेता है
इसलिए आज के दौर में प्रत्येक बालक को स्कूल भेजना अनिवार्य है।
किसी विद्वान ने सत्य ही कहा है कि बालक जितना ताउम्र सीखता है उससे कहीं ज्यादा
केवल दस वर्ष की स्कूल शिक्षा में सीख लेता है। बचपन में उसका दिमाग कच्ची मिट्टी
की तरह होता है, स्कूल जाकर वह जो कुछ देखता है उसे बहुत जल्दी सीखता है। जिस
प्रकार कुम्हार कच्ची मिट्टी को आकार देकर सुन्दर बर्तन बनाता है उसी प्रकार एक
शिक्षक भी कच्ची बुद्धि वाले नन्हें-मुन्ने बच्चों के
भविष्य की नींव रखता है। इसलिए
स्कूली शिक्षा अत्यंत अनिवार्य है।
स्कूली शिक्षा जीविकोपार्जन का भी एक सशक्त माध्यम है। शिक्षा प्राप्त करने के बाद
जीविका के इतने
स्त्रोत हैं कि मनुष्य कभी बेरोजगार नहीं रह सकता। स्कूली शिक्षा के
बाद उच्च शिक्षा प्राप्त कर अच्छी से अच्छी नौकरी पा सकता है और दुनिया के साथ कदम
से कदम मिलाकर चल सकता है।
स्कूली शिक्षा से बच्चों में समूह में रहने की भावना जागफत होती है। समूह में खेलने,
साथियों के साथ बैठकर खाना खाने, कक्षा में साथ बैठ कर पढ़ने से बच्चे खेल-खेल में
एक दूसरे की मदद करना सीखते हैं। होड़-होड़ में एक दूसरे से आगे निकल जाने के लिए
उद्यत रहते हैं इसलिए इस उद्देश्य से भी स्कूली शिक्षा अनिवार्य है।
घर में बच्चों का दायरा बहुत छोटा होता है। अपेक्षाकफढत स्कूल की अपेक्षा बच्चा घर
में केवल दैनिक कार्यों को देखता है, इससे उसका संपूर्ण विकास नहीं होता है। स्कूल
में उसे विस्तफत क्षेत्र मिलता है जहां उसका नैतिक, मानसिक और शारीरिक विकास होता
है। स्कूल में शिक्षक उसे जीवन को कारगर बनाने वाली जानकारियां देते हैं जिससे वह
जीवन में आने वाली मुसीबतों से लड़ने की ताकत जुटाता है और बालक पर एक प्रकार का
मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है इसलिए स्कूली शिक्षा अनिवार्य है। आज जहां आदमी चांद
पर पहुंच रहा है तब यदि गरीब बच्चे स्कूली शिक्षा से भी वंचित रह जाएं तो ये उनके
साथ अन्याय होगा।
स्कोप पब्लिक हा.से. स्कूल आईसेक्ट संस्था की सबसे छोटी इकाई है। यह स्कूल बिल्कुल
अपने नाम के अनुरूप है। यहां दाखिला लेने के बाद बच्चा स्कूली शिक्षा के बाद
कम्प्यूटर का संपूर्ण ज्ञान प्राप्त कर सकता है। स्कूल बिल्कुल खुले वातावरण में
स्थित है। यहां बच्चों के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, साथ ही खेलने को बड़ा सा
मैदान, वफहद पुस्तकालय, सुसज्जित कम्प्यूटर लैब आदि भी हैं। स्कोप स्कूल के छात्रों
ने कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं जिनमें आरती प्रसाद 10 वीं, अनुपम गंगारे, 8वीं,
अभिषेक मस्के 9 वीं ने राज्य स्तरीय थ्रो बॉल प्रतियोगिता में चयनित होकर विद्यालय
का नाम रोशन किया है। स्कोप स्कूल सम्पूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का उत्कफढष्ट
केन्द्र है। किसी विद्वान ने सही कहा है-
''स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान सर्वत्र पूज्येते' |