विज्ञान


अन्तरिक्ष अन्वेषण

कालीशंकर

अन्तरिक्ष अन्वेषण की प्रक्रिया आज दिनों दिन तीव्र गति से आगे बढ़ती जा रही है और अरोज इसमें कुछ नई-नई बातें घटित हो रही हैं। अन्तरिक्ष और वैज्ञानिक जागरुकता के संदर्भ में इन परिघटनाओं के विषय में जानकारी रखना अत्यधिक महत्वपूर्ण है। प्रस्तुत लेख मेें इन्ही अन्तरिक्ष समाचारों का वर्णन किया गया है।

ड्वार्फ ग्रह सेरेस की वास्तविक संरचना का खुलासा

सेरेस हमारे सौर मंडल के क्षुद्र गह घेरे में स्थित एक बौना (ड्वार्फ) ग्रह है तथा इसका व्यास लगभग 950 कि.मी। है। पूर्व धारणा के अनुसार इसकी सतह की संरचना कार्बन की प्रचुरता से भरी हुई है। अभी हाल में नासा के खगोलशास्त्रियों के द्वारा इस ड्वार्फ ग्रह का प्रेक्षण सोफिया (इन्फ्रारेड खगोलिकी के लिए समतापमंडलीय प्रेक्षणशाला-स्ट्रैटोसफेरिक आब्जर्वेटरी फॉर इनफ्रारेड आस्ट्रोनामी) दूरबीन से किया गया तथा प्रेक्षित आंकड़ों से पता चला है कि इस ड्वार्फ ग्रह की सतह में अनेक दृव्यों की भरमार है जिनमें अन्य क्षुद्र ग्रहों से टूटे हुए टुकड़े हैं जिनमें अधिकांश चट्टानी सिलिकेट हैं। ये प्रेक्षण वर्तमान में स्वीकृत आंकड़ों से भिन्न है। ग्रहीय खगोलिकी विशेषज्ञ फ्रैन्क मार्चिस के अनुसार अपनी एयरबार्न लोकेशन एवं सूक्ष्म ग्राही फोरकास्ट उपकरणों से लैस सोफिया केवल अकेली ऐसी प्रेक्षणशाला है जो वर्तमान में कार्यरत है तथा इस तरह के प्रेक्षण कर सकती है। सोफिया एक दूरबीन है जो बोइंग 747 वायुयान के अन्दर लगाई गई है। इसमें 2.5 मीटर के परावर्तक दूरबीन का प्रयोग किया गया है। इसके प्राथमरी दर्पण का व्यास 2.7 मीटर है। इसका प्रकाशिकी तंत्र कैसीग्रेन प्रकाशिकी डिजाइन का प्रयोग करता है। सेरेस को एक क्षुद्र ग्रह और ड्वार्फ ग्रह के रूप में जाना जाता है तथा यह अपनी तरह का अकेला ड्वार्फ ग्रह है जो आन्तरिक असौर तंत्र में स्थित है।


इसरो 2017 में 3 बग्घियों (रोवर) से लैस विश्व के प्रथम राकेट का प्रमोचन 

28 दिसम्बर 2017 के आसपास जब इसरो की पोलर उपग्रह प्रमोचन वेहिकल एक्सएल (पीएसएलीव-एक्सएल) उड़ान भरती है तो टीम इन्डस की ओर से प्रथम प्राइवेट अन्तरिक्ष मिशन होगा जो एक इतिहास का सृजन करेगा। इसका एक विशिष्टकारण है। यह पहला मौका होगा-अन्तरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में जब एक राकेट तीन बग्घियों (रोवर) के साथ उड़ान भरेगा। इस प्राइवेट चन्द्र मिशन में दो रोवर जापान से हैं तथा एक टीम इन्डस कम्पनी का है। टीम इन्डस एक लाभ के लिए संगठन है जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
पीएसएलवी-एक्सएल राकेट ने 22 जून 2016 को एक साथ 20 उपग्रह प्रमोचित किये थे। लेकिन यह पहली बार है कि यही पीएसएलवी राकेट एक लैन्डर में रखकर तीन बग्घियों को अन्तरिक्ष में ले जायेगा। एक इसरो पदाधिकारी के अनुसार, पीएसएलवी राकेट के ऊपर वैश्विक विश्वास जगाने में यह मिशन एक अहम भूमिका निभायेगी। इसके अलावा फरवरी 2017 के प्रथम सप्ताह में यही शक्तिशाली राकेट 103 विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण एक साथ करेगा जो अंतरिक्ष इतिहास का एक बड़ा रिकार्ड बनेगा।
    टाइम्स ऑफ इन्डिया के अनुसार उपर्युक्त चन्द्र मिशन वैश्विक चन्द्र स्पर्धा, गूगल ल्युनर एक्स प्राइज का एक हिस्सा होगा। यह प्रतिस्पर्धा के अन्तर्गत प्रथम प्राइवेट रूप से फन्डित टीम को 30 मिलियन डॉलर का इनाम दिया जाता है जो चन्द्र सतह पर एक रोवर को लैन्ड करा सके तथा जो चन्द्र सतह पर सफलतापूर्वक गमन करे। इसके साथ-साथ यह भी शर्त है कि रोवर चन्द्र सतह के उच्च विभेदन प्रतिबिम्ब और वीडियो पृथ्वी को भेज सके। टीम इन्डस का रोर सौर पावरित इकाई है जिसकी मिशन अवधि 14 पृथ्वी दिवस है। इसमें 20 कि.ग्रा। का नीतभार होगा। जापानी टीम डुएल रोवर तंत्र भेजेगी जिसमें 2 पहिए वाला टेट्रिस रोवर तथा 4 पहिये वाला मून रेकर रोवर होगा तथा ये दोनों एक रस्सी (टीथर) से जुड़े रहेंगे।

अब वायुयान की भाँति उड़ान भरेगा राकेट

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन एयर ब्रीथिंग राकेट के परीक्षण अगले माह कर सकता है। इस तकनीक में राकेट को प्रमोचित नहीं करना पड़ेगा बल्कि यह हवाई जहाज की तर्ज पर उड़ान भरेगा। राकेट वायुमंडल में प्रवेश करते ही करीब 60 कि.मी। ऊँचाई तक हवाई जहाज की तरह उड़ेगा। विक्रम साराभाई अन्तरिक्ष केन्द्र के निदेशक के.शिवन ने बताया कि इस तकनीक का नाम एयर बीथिंग है इसे इसरो ने विकसित कर लिया है। इसके तहत अन्तरिक्ष में मौजूद ऑक्सीजन का इंजन में प्रयोग होता है। उन्होंने बताया कि अभी इसरो जो राकेट प्रमोचित करता है उनमें ऑक्सीजन तरल रूप में ले जाई जाती है। ये इंजन वायुमंडल की ऑक्सीजन का प्रयोग नहीं करते हैं जबकि 60 कि.मी। की ऊँचाई तक आक्सीजन उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि इसरो भविष्य में स्क्रैमजेट इंजन का प्रयोग राकेटों मंे करेगा। 
    निदेशक शिवन के अनुसार इसकी तैयारियाँ चल रही हैं। पुनः प्रयोज्यीय प्रमोचन वेहिकल में इसका प्रथम परीक्षण इसी वर्ष होगा। यह राकेट एयरपोर्ट से उपग्रह को लेकर उड़ान भरेगा। बिना पायलट के वायुयान की तरह 60 कि.मी। तक वायुमंडल में परम्परागत ईंधन और हवा में मौजूद ऑक्सीजन से उड़ान भरेगा। यही राकेट जब उपग्रह को अन्तरिक्ष में छोड़कर वापस आयेगा तो वायुमंडल में घुसते ही स्क्रैमजेट इंजन फिर चालू हो जायेगा। इसरो के अनुसार इस तकनीक के प्रयोग से राकेट के प्रमोचन की लागत कम हो जायेगी। राकेट में ईंधन के लिए टैंकों का आकार छोटा हो जायेगा। इसका लाभ यह होगा कि उपग्रह का भार बढ़ाया जा सकेगा। पाठकों की जानकारी के लिए यह आवश्यक है कि प्रयोज्यीय राकेट उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करके वापस पृथ्वी पर लौट आता है।

चाँद पर जाने वाले आखिरी अन्तरिक्ष यात्री यूगेन कर्नन का निधन

चांद पर जाने वाले आखिरी व्यक्ति और अमरीका के पूर्व अन्तरिक्ष यात्री यूगेन कर्नन का 82 वर्ष की उम्र में 16 जनवरी 2017 को टेक्सास के ह्यूस्न में देहान्त हो गया। वह सभी मानव जाति के लिए शान्ति और आाशा के संदेश के साथ चांद से पृथ्वी पर वापस लौटे थे। कर्नन की परिवार प्रवक्ता मोलिसा रेन असोसियेटेड प्रेस को बताया कि पूर्व अन्तरिक्ष यात्री की तबीयत खराब चल रही थी और ह्यूस्टन के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया। निधन के समय कर्नन अपने रिश्तेदारों के साथ थे। उनके परिवार ने कहा कि चांद के अन्वेषण के प्रति उनका प्रेम कभी कम नहीं हुआ। 
    वे अन्तरिक्ष में तीन बार गये। जून 1966 में जेमिनी 9ए के पायलट के रूप में, मई 1969 में अपोलो-10 मिशन के चन्द्र माड्यूल पायलट के रूप में तथा दिसम्बर 1972 में अपोलो-12 मिशन के कमान्डर के रूप में जो अपोलो चन्द्र लैंडिंग का आखिरी मिशन था। चन्द्र सतह पर गमन करने वाले वे 11 वें व्यक्ति और हालिया व्यक्ति थे। हालिया व्यक्ति होने का कारण यह था कि अपोलो-17 मिशन में तीसरी और आखिरी स्पेस वॉक के बाद चन्द्र माड्यूल मंे पुनः प्रवेश करने वाले यूगेन कर्नन आखिरी चन्द्र यात्री थे। इसके अलावा कर्नन जैमिनी-12, अपोलो-7 औरअपोलो-14 अन्तरिक्ष मिशनों के बैकअप अन्तरिक्ष यात्री भी थे। अपनी 3 अन्तरिक्ष उड़ानों के द्वारा उन्होंने अंतरिक्ष में कुल 23 दिन 14 घंटे का समय गुजारा। उन्होंने 24 घंटे 11 मिनट की 4 स्पेस वाकें की।

मंगलयान की कक्षा में बदलाव

इसरो चेयरमैन ए.एस.किरण कुमार ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने मंगल ग्रह में भेजे अपने उपग्रह मंगलयान की कक्षा में सफलतापूर्वक बदलाव किया जिससे लम्बी अवधि के ग्रहण का इस पर प्रभाव न पड़े। गुजरात विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह में संवाददाताओं से बातचीत में इसरो चेयरमैन ने बताया, ग्रहण की अवधि इतनी लम्बी थी कि सूर्य किरण के अभाव के कारण मंगलयान की बैटरी की क्षमता लगभग समाप्त हो जाती लेकिन समुचित कदम उठाने के कारण मंगलयान पर ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उन्होंने कहा, 17 जनवरी 2017 की शाम को हमने मंगयान की कक्षा में बदलाव किया और ग्रहण की अवधि में कमी कर दी तथा प्रयोग सफल रहा। अन्तरिक्ष यान के पास अब भी 30 कि.ग्रा। ईंधन है तथा कक्षा में बदलाव के बाद हमें आशा है कि यह लम्बे समय तक काम करेगा। इसरो चेयरमैन ने यह भी कहा कि महत्वाकांक्षी दक्षिण एशिया उपग्रह परियोजना पर काम शुरू हो गया है।

रोबोट पत्रकार का पहला समाचार लेख प्रकाशित

चीन के एक अखबार में पहली बार एक रोबोट पत्रकार का 300 शब्दों का एक लेख छपा जिसे उसने मात्र एक सेकन्ड में लिखा था। वैज्ञानिकों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि गुआंगझोऊ के सदर्न मेट्रोपोलिस डेली में प्रकाशित हुआ लेख बसंत उत्सव के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ से संबंधित है। इस तरह के रोबोट का अध्ययन एवं विकास करने वाली टीम के नेतृत्वकर्ता और पीकिंग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वान शियाओजुन ने बताया कि रोबोट शियाओं नान ने एक सेकन्ड में ही खबर लिख दी और वह छोटी खबर एवं लम्बी खबर दोनों लिख सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘सहयोगी संवाददाताओं से तुलना की जाये तो शियाओं नान की आंकडे विश्लेषण की क्षमता बेहतर है और वह तेजी से खबर लिखता है।’’ 
    चाइना डेली अखबार के अनुसार शियाओजुन ने कहा, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि बुद्धिमान रोबोट जल्द ही संवाददाताओं की पूरी तरह जगह ले लेंगे। इस तरह के प्रयोगों से सरकारी मीडिया संगठनों के कर्मचारियों में बेचैनी का माहौल है क्योंकि उन्हें डर है कि भविष्य में वह अपनी नौकरियाँ गंवा सकते हैं। प्रोफेसर ने कहा कि इस समय रोबोट व्यक्तिगत साक्षात्कार नहीं ले सकते बाद के सवालों का सोच समझकर जवाब नहीं दे सकते और किसी साक्षात्कार या बातचीत में खबर का कोण नहीं पकड़ सकते। उन्होंने कहा, लेकिन रोबोट अखबारों एवं संबंधित मीडिया और साथ ही सम्पादकों एवं संवाददाताओं की मदद कर अतिरिक्त सहायकों के रूप में काम कर पायेंगे।

प्लूटो का चन्द्रमा ही उसकी रक्षा करता है

एक नये अध्ययन के अनुसार प्लूटो का चन्द्रमा केरन इसके वातावरण की रक्षा करने में काफी मददगार है। इस अध्ययन में बताया गया है कि केरन इस छोटे बर्फीले ड्वार्फ ग्रह के लिए शील्ड की तरह काम करता है और ज्यादातर सौर पवन को ड्वार्फ ग्रह से दूर कर देता है। वैसे भी हमारे सौर तंत्र में प्लूटो का अपने चन्द्रमा केरन के साथ आकार और दूरी के कारण बिलकुल अलग तरह का रिश्ता है। यह प्लूटो से लगभग डेढ़ गुना बड़ा है और इनके बीच केवल 19,312 कि.मी। की दूरी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि हम पृथ्वी के चन्द्रमा से तुलना करें तो केरन केरन चाँद के मुकाबले अपने ड्वार्फ ग्रह से तीन गुना ज्यादा नजदीक है और मंगल के बराबर आकार का है। अमरीका की जार्ज इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी के शोधार्थियों के अध्ययन में गहराई से यह बात सामने आई है कि किस तरह केरन प्लूटो के वातावरण को सौर पवन से बचाता है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि जब केरन सूरज और प्लूटो के बीच होता है तो वातावरण के नुकसान को काफी कम करता है। जार्जा टेक की सहायक प्रोफेसर कैरल पैटी ने कहा, केरन के पास अपना वातावरण नहीं है लेकिन यह प्लूटो के वातावरण की रक्षा करता है और प्लूटो के वातावरण को भारी मात्रा में नुकसानदेह सौर पवन से बचाता है।

मंगल ग्रह पर पहँुचा आबामा का हस्ताक्षर, नासा को कहा शुक्रिया

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 20 जनवरी 2017 को अपना कार्यकाल समाप्त किया लेकिन उनका हस्ताक्षर मंगल ग्रह पर इस बात की गवाही देगा कि कभी वे अमरीका का सर्वोच्च पद संभालते थे। ओबामा ने इस बारे में कहा, यह दुनिया से बाहर की चीज है, धन्यवाद। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने मंगल ग्रह में भेजे अपने उपग्रह मंगलयान की कक्षा में सफलतापूर्वक बदलाव किया जिससे लम्बी अवधि के ग्रहण का इस पर प्रभाव न पड़े। गुजरात विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह में संवाददाताओं से बातचीत में इसरो चेयरमैन ने बताया, ग्रहण की अवधि इतनी लम्बी थी कि सूर्य किरण के अभाव के कारण मंगलयान की बैटरी की क्षमता लगभग समाप्त हो जाती लेकिन समुचित कदम उठाने के कारण मंगलयान पर ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उन्होंने कहा, 17 जनवरी 2017 की शाम को हमने मंगलयान की कक्षा में बदलाव किया और ग्रहण की अवधि में कमी कर दी तथा प्रयोग सफल रहा। अन्तरिक्ष यान के पास अब भी 30 कि.ग्रा। ईंधन है तथा कक्षा में बदलाव के बाद हमें आशा है कि यह लम्बे समय तक काम करेगा। 

अन्तरिक्ष में सुनीता विलियम्स की बराबरी करेगी अमरीकी महिला

अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन के तीन अन्तरिक्ष यात्री अगले माह अन्तरिक्ष में दो स्पेस वॉक करने की तैयारी में हैं। इनमें एक महिला अन्तरिक्ष यात्री भी है। वह भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स के सबसे ज्यादा बार अन्तरिक्ष में 7 बार स्पेस वॉक करने के रिकार्ड की बराबरी करेंगी। अन्तरिक्ष यात्री दल-50 के कमान्डर शेन किम्बो और फ्लाईट इंजीनियर पेग्गी हिव्टसन पहली बार 6 जनवरी 2017 को अन्तरिक्ष यान से निकलकर स्पेस वॉक करेंगे। इसके साथ ही वह नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स के रिकार्ड की बराबरी कर लेंगी। महिला अन्तरिक्ष यात्री के तौर पर सुनीता के नाम सबसे अधिक बार अन्तरिक्ष में स्पेस वॉक करने का रिकार्ड दर्ज है। शेन और पेग्गी ह्विटसन अंतक्षिक स्टेशन के दायीं और काम करने के दौरान एडाप्टर प्लेट्स लगायेंगे और 6 मई लीथियम आयन बैटरियों के लिए बिजली कनेक्शन देंगे। इस बार शेन और यूरोपीय अन्तरिक्ष संस्था के थॉमस पेसक्यूट इस काम को अंजाम देंगे। अन्तरिक्ष स्टेशन के असेम्बली और मरम्मत के लिए यह 196वीं और 197वीं स्पेस वॉक होगी।

ब्राजील के विद्यार्थियों द्वारा निर्मित उपग्रह का अंतरिक्ष में प्रमोचन

16 जनवरी 2017 को ब्राजील के मिडिल कक्षा के विद्यार्थियों के द्वारा निर्मित एक उपग्रह का प्रमोचन अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन अल्फा से किया गया। टैनक्रेडो-1 नामक इस उपग्रह का विकास उबातुबा शहर के टैनक्रेडो डे अलमीडा नेवस म्यूनिसिपल स्कूल के विद्यार्थियों के द्वारा किया गया। इस उपग्रह का व्यास 13 सें.मी। और भार 700 ग्राम है। इस उपग्रह को पृथ्वी से 400 कि.मी। की दूरी की कक्षा में स्थापित किया गया। यह इस बात का अध्ययन करेगा कि वायुमंडल में प्लाज्मा का निर्माण कैसे होता है। परियोजना के टीचर-इन चार्ज कैनडिडो मूरा ने बताया कि यह बात उनके विचार में तब आई जब उन्होंने एक विज्ञान पत्रिका में यह पढ़ा कि एक अमरीकी कम्पनी अन्तरिक्ष में उपग्रहों को प्रमोचन करने की अपनी सेवायें देने को तैयार है।
    मूरा और उनके विद्यार्थियों ने 2013 तक उपग्रह के निर्माण का काम पूरा कर लिया। लेकिन जिस कम्पनी से मूरा ने उपग्रह के प्रमोचन के लिए संपर्क किया उसने यह कहकर मना कर दिया कि वह अभी प्रमोचन के लिए तैयार नहीं है। इसके बाद मूरा ने ब्राजील की अन्तरिक्ष संस्था से संपर्क किया जो उनकी इस महत्वाकांक्षी परियोजना से बहुत प्रभावित हुई। मूरा के अनुसार, पूरे उपग्रह को हम नये सिरे से फिर निर्मित करना पड़ा क्योंकि अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन जिसने उपग्रह के प्रमोचन को स्वीकृत दी में अन्य कैरियर प्रमोचन राकेटों की तुलना में अधिक सख्त सुरक्षा मानक होते हैं। मूरा के अनुसार सम्पूर्ण प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की गई। पहले एक कैरियर रॉकेट स्टेशन के लिए प्रमोचित किया गया जिसके प्रमोचन में कुल 5 मिनट तथा यह दिन स्टेशन से जुड़ा रहा। उसके बाद ही उपग्रह प्रमोचित किया गया। टैनक्रेडो-1 उपग्रह अन्तरिक्ष की कक्षा में 4 महीने रहेगा।

खगोल वैज्ञानिकों का दावा, ब्रह्मांड में हैं 2000 अरब तारामंडल

हमारे ब्रह्मांड में तारामंडलों की संख्या अब तक सोची जाती रही संख्या के 10 गुना से भी ज्यादा है। एक नये अध्ययन में यह दावा किया गया है कि ब्रह्मांड में तारामंडलों की संख्या दो हजार अरब है। खगोल विज्ञानियों ने लम्बे समय पहले यह जानने की कोशिश की थी कि ऑकलन योगय ब्रह्मांड में तारामंडलों की संख्या कितनी है। यह ब्रह्मांड का वह हिस्सा है जहाँ सुदूर पिंडों से प्रकाश को हम तक आने का समय मिलता है। पिछले 20 वर्षों में वैज्ञानिकों ने हब्बल अंतरिक्ष दूरबीन से मिली तस्वीरों का इस्तेमाल करके यह ऑकलन किया कि जिस ब्रह्मांड को हम देख सकते, उसमें लगभग 100 से 200 अरब तारामंडल हैं। ब्रिटेन के नाटिंघम विश्वविद्यालय के क्रिस्टोफर कंसोलिस के नेतृत्व में काम करने वाले शोधकर्ताओं ने कहा कि मौजूदा प्रौद्योगिकी के माध्यम से हम इन तारामंडलों के सिर्फ 10 प्रतिशत का ही अध्ययन कर सकते हैं। बड़े और बेहतर दूरदर्शी विकसित कर लिए जाने पर ही शेष 90 प्रतिशत हिस्से को देखा जा सकता है। कंसेलिस ने कहा, हम तारामंडलों के बड़े हिस्से को देख नहीं पाते क्योंकि वे बहुत हल्के और दूर हैं। ब्रह्मांड में तारामंडलों की संख्या खगोलविज्ञान का एक मूलभूत सवाल है और यह दिमाग को चकराकर रख देती है कि 90 प्रतिशत तारामंडलों का अध्ययन किया जाना अब भी बाकी है। यह शोध, दि एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

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