आईसेक्ट यूनिवर्सिटी समाचार
रोबोट्रिस्स 2012 का दो दिवसीय आयोजन

राष्ट्रीय स्तर की रोबोटिक्स चैम्पियनशिप, रोबोट्रिस्ट 2012, के अन्तर्गत दो दिवसीय j-Robo Tricks कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन आइसेक्ट विश्वविद्यालय में ंE-cell IIT खडगपुर एवं रोबोसेपियन टेक्नॉलॉजी प्रा.लि. के सहयोग से सम्पन्न हुआ। इस कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को ऐज एवाईडिंग, लाईन फॉलोविंग और लाईट सर्चिंग रोबोट को विकसित करने के सिद्धांतों से अवगत कराया गया। यह कार्यशाला मुख्य रूप से एक फास्टेस्ट लाईन फॉलोवर रोबोट, जो कि स्वचलित हो, विकसित करने की प्रप्रिया केन्दित थी। आखिरी सत्र में एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न संस्थानों से आये हुए सभी 14 टीमों ने भाग लिया। जहां एक रोबोट को एtart बिन्दु से इग्हग्sप् बिन्दु तक निर्धारित किये गये रास्ते से ले जाने का कार्य दिया गया था। इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान ग्रुप नम्बर 10 (आर. कार्तिक, राहुल माझी, धर्मेन्द यादव, विवेक गौतम), द्वितीय स्थान गुप नम्बर 2 (कुमार गौरव, सौरव बुधोलिया, शुभम कुमार गौर, प्रशुन्न कुमार सिंह), तफतीय स्थान ग्रुप नम्बर 13 (सागर वगासिया, प्रिंस, एम.एस. राठौर, दीपक कुमार, मंगलेश कुमार, रवि रोशन कुमार) को प्राप्त हुआ।
प्रथम विजेता को आइसेक्ट विश्वविद्यालय की तरफ से एक मोमेन्टो और 1001 रूपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। प्रथम विजेता टीम जनवरी 2012 में IIT खडगपुर में होने वाले अन्तराष्ट्रीय रोबोटिक्स चैम्पियनशिप में मध्यप्रदेश का प्रतिनिघित्व करेंगे।
शैक्षिक भ्रमण

भौमिकी एक क्षेत्रीय विज्ञान है तथा क्षेत्रीय अध्ययन में शैक्षणिक पर्यटन की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। वैसे भी
पुस्तकों से पढ़े ज्ञान की अपेक्षा स्व निरीक्षण व अवलोकन से प्राप्त ज्ञान अधिक सुदफढ़ होता है क्योंकि इसमें प्राकृतिक तत्वों के साथ-साथ मानवीय क्रिया प्रतिकियाओं का भी समावेश होता है। आईसेक्ट यूनिवर्सिटी में दिनांक 3दिसंबर को इंजीनियरिंग तफतीय सेमेस्टर (जियोलॉजी ) भौमिकी विज्ञान के छात्रों को (इंजीनियर जियोलॉजिस्ट) अभियंता भौमिकी विशेषज्ञ श्री पवन जैन के निर्देशन में शैक्षिक भ्रमण हेतु साँची जिला रायसेन ले जाया गया। छात्रों ने ग्राम खरवई में स्थित 540 मिलियन वर्ष पुराने विशाल बलुआ पत्थर से बनी चट्टान के निर्मित होने की प्रक्रिया जानी, साथ ही वायु अपरदन के कारण उसमें होने वाली दरारों तथा पर्यावरण प्रदूषण से होने वाले प्राकृतिक क्षरण को भी निकट से देखा। इसके साथ ही बलुआ पत्थर की विभिन्न प्रजाति (सफेद, गुलाबी,भूरा) इसके साथ ही क्वेस्टा ज्यूलॉजी कम्पॉक्स के प्रयोग की प्रकिया जानी। प्राध्यापक श्री आर.सी. पाटिल विभागाध्यक्ष (सिविल) तथा सहा. प्राध्यापक श्री कुमार आनंद व श्री चंदशेखर गायकवाड़ ने छात्रों को साँची के 2300 वर्ष प्राचीन सम्राट अशोक द्वारा निर्मित स्तूप, जनरल डायर द्वारा साँची के पुनर्रुद्धार, वहाँ के बौद्ध धार्मिक स्थलों व राष्ट्रीय प्रतीक सिंह जो भारतीय मुदा पर अंकित हैं के बारे में विस्तफत जानकारी दी।
रिपोर्ट- डॉ लता अग्रवाल,
विभागाध्यक्ष भाषा विभाग