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इलेक्ट्रॉनिक्स आपके लिए अंक 213, वर्ष 24,अप्रैल 2012
 
 
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सीवीआरयू  समाचार

 

टैलेन्ट सर्च प्रतियोगिता का आयोजन

छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग व डॉ सी.वी.रमन विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित टैलेन्ट सर्च प्रतियोगिता में इस बार कक्षा बारहवीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के बच्चों में उच्च शिक्षा को लेकर पढ़ने, आगे बढ़ने और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अपने आप को तैयार करने की जो ललक इस परीक्षा के माध्यम से दिखाई पड़ी वो अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है। प्रतियोगिता में बिलासपुर जिले के 6 हजार से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए।


स्कूली स्तर पर प्रतिभाओं की खोज के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग एवं डॉ.सी.वी.रमन विश्वविद्यालय द्वारा टैलेन्ट सर्च प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय में लगातार तीसरी बार आयोजित टैलेन्ट सर्च प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए शहरी और दूरस्थ ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी निकलकर सामने आए। पेन्ड्रा रोड, मरवाही, लोरमी के दूरस्थ गांवों में से बीजा, सकर्रा, खोंगसरा, अंडी, सिवनी मरवाही, धनौली, लालपुर गौरेला, खोडरी, परासी, राम्हेपुर, कोतरी, केंदा, सेमरसाल जैसे गांवों से परीक्षा देने आए बारहवीं के विद्यार्थियों का उत्साह इस परीक्षा के उद्देश्य को सफलता की ओर ले जाते हुए नजर आया। इन पहुंच विहीन गांवों से आए विद्यार्थियों ने बताया कि वे भी चाहते हैं डॉक्टर और इंजीनियर बनना और इसके लिए पीईटी, पीएमटी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करते हैं लेकिन इन परीक्षाओँ की तैयारी को लेकर उचित मार्गदर्शन नहीं मिल पाने के कारण उन्हें परीक्षा देते समय काफी कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है।


टैलेन्ट सर्च प्रतियोगिता में शामिल होने आए विद्यार्थियों ने कहा कि इस बात की जिज्ञासा तो रहेगी ही कि प्रतियोगिता में विजेता कौन‚कौन होते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि हमें इस प्रतियोगिता के माध्यम से ओएमआर सीट में उत्तर किस तरह से किन‚किन सावधानियों को ध्यान में रखकर भरना चाहिए, इसका प्रशिक्षण मिल गया है। 


उच्च शिक्षा की ओर बढ़ रहे कदम


आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र से परीक्षा देने आए सैकड़ों विद्यार्थियों ने बताया कि अब उन्हें न तो तकनीकी, व्यवसायिक पढ़ाई के लिए दूर जाने और न ही उसके लिए धन जुटाने की चिंता है। यह प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय  है, जहाँ पढ़ने के लिए अजा, अजजा, पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को समय पर समारोहपूर्वक छात्रवफत्ति दी जाती है। विश्वविद्यालय ने टैलेन्ट सर्च प्रतियोगिता का आयोजन कर हमारे अंदर प्रतियोगी व तकनीकी पढ़ाई के लिए नया रास्ता बनाया है।


भविष्य को लेकर बच्चे गंभीर : कुलसचिव


विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री शैलेष पाण्डेय ने बताया कि टैलेंट सर्च प्रतियोगिता उन विद्यार्थियों के लिए आयोजित की गई जो कक्षा बारहवीं में अध्ययनरत हैं और किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं। विश्वविद्यालय में आयोजित इस प्रतियोगिता में 6 हजार से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए हैं। इसमें कला संकाय,विज्ञान संकाय,वाणिज्य संकाय,कृषि और गणित संकाय में कक्षा बारहवीं की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रश्न पत्र तैयार किया गया था। उन्होंने आगे बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य यह था कि संकाय के अनुसार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को यह समझ में आ सके कि पीईटी, पीएमटी, पीएटी, सीपीटी, एआईट्रिपलई, रेलवे भर्ती, बैंक भर्ती की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। इन प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए ही सभी संकायों के प्रश्न पत्र विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार करवाए गए थे। श्री पाण्डेय ने आगे कहा कि आयोजन के तीसरे वर्ष जिस तरह का उत्साह इस परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों का देखने को मिला है उसे देखकर एक बात तो साफ हो गई है कि बच्चे अपने भविष्य को लेकर गंभीर हैं।

 

 

कौशल विकास एवं व्यवसायिक शिक्षा पर राष्ट्रीय सेमिनार

 

``गुलामी के दौर में मैकाले की शिक्षा पद्धति ने हिन्दुस्तान के दिमाग को हाईजैक कर लिया और हम ब्रेनड्रेन की स्थिति तक जा पहुंचे। हमारा अतीत बहुत ही गौरवशाली था आज जब ब्रेनड्रेन की स्थिति समाप्त हो गई है तो यंग इंडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती युवाओं को सही दिशा देने और सही कौशल देने की है। जब यंग इंडिया के हाथ में दोनों चीजें आ जाएंगी तो हिन्दुस्तान एक बार फिर से विश्वगुरु बन जाएगा।'' उक्त विचार आईजी श्री अरुण देव गौतम ने मुख्य अतिथि की आसंदी से डॉ सी.वी.रमन विश्वविद्यालय में `कौशल विकास एवं व्यवसायिक शिक्षा में विश्वविद्यालय की भूमिका' पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किया।श्री गौतम ने कहा कि उन्हें डॉ.सी.वी.रमन विश्वविद्यालय से बहुत उम्मीदें हैं। दो दिनों तक इस महत्वपूर्ण विषय पर चलने वाले राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार से बात निकलकर क्रियान्वयन की स्थिति तक पहुंचे तो यही इसकी सफलता होगी।


समारोह की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.ए.एस.झाड़गांवकर ने कहा कि पहले हमारे देश में रोटी, कपड़ा और मकान की मांग थी। आज की मांग मेरी दृष्टि में दो हाथों को काम मिले की है।  कौशल विकास में सबसे पहला रोल मीडिया का और अंतिम रोल विश्वविद्यालय का है क्योंकि जनसंख्या के हिसाब से सात सौ मिलियन लोगों को हमें ट्रंड करना है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित पं. सुंदर लाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. इंदु अनंत ने कहा कि हमारे देश को इस बात की चिंता है कि वर्ष 2020 में जब देश की कुल आबादी में युवाओं की आबादी 32 फीसदी से भी अधिक हो जाएगी तब उन्हें शिक्षा और कौशल के हिसाब से किस तरह से काम मिले। इसके लिए केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय सात चरणों में रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम चलाने की तैयारी कर रहा है। आज जरूरी हो गया है कि हमारे प्रदेश में वर्ष 2003 से चल रहे यूजी और वर्ष 98 से चल रहे पीजी पाठ्यक्रमों में सुधार कर उसे कौशल वाला और व्यवसायिक बना सकें। उन्होंने कहा कि डॉ.सी.वी.रमन विश्वविद्यालय आज इस दिशा में काम कर रहा है तभी यहां प्रवेश लेने वाले बच्चे अपने भविष्य को सुनिश्चित और कोर्स व्यवसाय परख पा रहे हैं।


सेमिनार में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित नई दुनिया, बिलासपुर के संपादक डॉ सुनील गुप्ता ने संबोधित करते हुए कहा कि यह पहला विश्वविद्यालय है जो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र में खुला है और यहां के विद्यार्थियों के कौशल को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। आज कुशल लोगों की बहुत कमी है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप जिस किसी भी क्षेत्र में हैं उसमें महारथ हासिल कीजिए। अगर आप अपने क्षेत्र में शिक्षित होने के साथ कुशल होंगे तो देखिएगा कि नौकरी आपके कदमों में होगी। इस बात को अपने अंदर से निकाल दें कि बेरोजगारी की कोई समस्या है।


सेमिनार के विशिष्ट अतिथि पत्रिका,बिलासपुर के संपादक श्री महेन्द्र शेखावत ने संबोधित करते हुए कहा कि लीक से हटकर चलने वाले लोग हमेशा ही इतिहास में अपना नाम दर्ज कराते हैं। सरकारी नौकरी को सबसे बेहतर मानने की सोच से हमें आज बाहर निकलना होगा। हमें आज की युवा पीढ़ी को रोजगार के लिए सही मार्गदर्शन देने की आवश्यकता है।


सेमिनार के शुभारंभ अवसर पर डॉ अविजित रायजादा ने कहा कि कुशल लोगों के अभाव के कारण ही मेडिकल क्षेत्र में बेहतर सेवा का अभाव है। आज हमने कई बीमारियों से होने वाली मौतों पर नियंत्रण सिर्फ कुशल लोगों के काम के दम पर पाया है। गंदे पानी से होने वाली बीमारियों और कुपोषण से लड़ने के लिए अगर कुशल लोगों को मैदान में उतारा जाए तो इस पर हमारी जीत ठीक उसी तरह से दर्ज की जा सकती है जैसे हमनें ओआरएस के उपयोग से हर साल 20 लाख लोगों को मौत के मुंह में जाने से बचाया है। समय पर रोगों की पहचान करने और प्राथमिक उपचार तत्काल उपलब्ध कराने वाले कुशल लोगों की फौज खड़ी कर हम बीमारियों से होने वाली मौतों पर बहुत हद तक काबू कर सकते हैं।


सेमिनार के शुभारंभ अवसर पर दैनिक भास्कर,बिलासपुर के जीएम श्री आनंद मोहन श्रीवास्तव, नवभारत बिलासपुर के संपादक श्री निशांत शर्मा,नवभारत बिलासपुर के जीएम श्री सुजीत बोस,एसईसीएल के महाप्रबंधक(कार्मिक) श्री आर.बी.पी.साही, प्रयास एड के डायरेक्टर श्री विनोद पाण्डेय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन सुश्री जयति चटर्जी ने किया।


इस अवसर पर विवि के रजिस्ट्रार शैलेष पाण्डेय ने कहा कि कौशल विकास को लेकर आज केंद्र सरकार बहुत ज्यादा चिंतित है। विश्वविद्यालय की चिंता भी इस ओर बहुत ज्यादा है। आज हमारे पास बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स है, कल‚कारखाने, अस्पताल हैं लेकिन उनके अंदर काम करने वाले कुशल लोग नहीं हैं। सरकार छोटी‚बड़ी आबादी के बीच विकास का काम तो कर रही है लेकिन वो कुशल लोगों को अकेले दम पर पैदा नहीं कर सकती। आज विश्वविद्यालय द्वारा व्यवसायिक पाठ्यक्रमों और कौशल विकास पर इसलिए जोर दिया जा रहा है कि हम मार्केट की मांग के अनुसार पूर्ति कर सकें।


कौशल विकास एवं व्यवसायिक शिक्षा में विश्वविद्यालय की भूमिका पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि सरगुजा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.सुनील वर्मा ने कहा कि आज के समय में हमें इस बात का ध्यान देना चाहिए कि जीवन का कौन सा पक्ष है जिसमें संतुलन की आवश्यकता है। ज्ञानार्जन की कतार में खड़े युवा भारत को इस सच को स्वीकार करना होगा कि उच्च शिक्षा को प्राप्त करने के साथ-साथ हमें कौशल का भी विकास करना होगा तभी हम रोजगार खोजने वालों की बजाय रोजगार उत्पन्न करने और स्वयं के अलावा कई लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने वाले बन सकेंगे।


हमें इसे समझना होगा क्योंकि हम किताबी ज्ञान तो प्राप्त कर लेते हैं लेकिन प्रायोगिक ज्ञान के अभाव में हम रोजगार के अवसर होने के बाद भी रोजगार हासिल नहीं कर पाते हैं। समापन समारोह की अध्यक्षता कर रहे सीवीआरयू के कुलपति प्रो.ए.एस.झाड़गांवकर ने कहा कि वर्ष 1976 से लेकर 1980 तक ये बात बहुत जोर से उठी थी कि इंजीनियरों को उनके क्षेत्र का पहले प्रारंभिक हस्त ज्ञान होना चाहिए। ये बात इसलिए उठी थी ताकि मैदानी काम करते समय इंजीनियर असफल ना हों। आज विद्यार्थियों में अनुभव की कमी का मुख्य कारण कौशल विकास का अभाव ही है।


समापन समारोह के विशिष्ट अतिथि छ.ग.व्यापार एवं लघु उद्योग संघ के अध्यक्ष श्री हरीश केडिया ने कहा कि आज जरूरी है कि अपने आप को पहचानें, अपने अंदर की रुचि को पहचानें और वही करें जिसमें आगे बढ़ने की ललक है। समारोह के विशिष्ट अतिथि नगर निगम, बिलासपुर के आयुक्त श्री यशवंत कुमार ने कहा कि आज जब बाजार में कुशल कामगारों की बहुत अधिक डिमांड है उसके बाद भी हमारा माइंड सेट नहीं बदला है। हम हमेशा विषय के चयन के समय उस समय की मांग को देकते हैं जबकि मन की सुनना चाहिए।


गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री एम.एस.के. खोखर ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि भारत देश में 70 फीसदी शिक्षित लोगों में मात्र 30 फीसदी ही कार्य में भी कुशल हैं। ये विषय गहन विचार का है। सीवीआरयू से बहुत उम्मीदें हैं। यहां के बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ कौशल के विकास का अवसर मिल रहा है ये बड़ी बात है।ऐसा उनके विश्वविद्यालय में भी किया जा रहा है और जब देश के सभी विश्वविद्यालय इस ओर काम करने लगेंगे तो कुशल लोगों की कमी दूर होगी।


हरिभूमि, बिलासपुर के महाप्रबंधक श्री प्रियंक परिहार ने कहा कि कौशल विकास में विश्वविद्यालय की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। ये अलग बात है कि आज इस विषय पर आयोजित सेमिनार का समापन हो रहा है लेकिन ये सही मायने में कौशल विकास की दिशा में बड़ी शुरुआत है।


समापन समारोह के अवसर पर कुलसचिव श्री शैलेषाण्डेय ने इस सेमिनार के उद्देश्य और भावी योजना पर प्रकाश डाला तो बीई के प्राचार्य डॉ.आर.पी.दुबे ने सेमिनार में आए 37 विषय विशेषज्ञों के विचार पर प्रकाश डाला।  सेमिनार में आए वक्ताओं ने खुलकर अपने विचार रखे और विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया कि आपको अपने अंदर की कला, रुचि का ज्ञान होना चाहिए और उसमें दक्षता हासिल करनी चाहिए।


पहले दिन के सेमिनार के पहले तकनीकी सत्र में चेयरपर्सन कुलपति प्रो.ए.एस.झाड़गांवकर रहे। इस सत्र को श्रीमती गुरप्रीत बग्गा ने संचालित किया। पहले तकनीकी सत्र में आईएफएस श्री आशुतोष मिश्रा, डॉ. अविजित रायजादा और श्री एस सरन ने अपने विचार व्यक्त किया। पहले दिन के दूसरे तकनीकी सत्र में बीई के प्राचार्य डॉ.आर.पी.दुबे चेयरपर्सन रहे और सत्र का संचालन श्रीमती अर्चना अग्रवाल ने किया। इस सत्र में सीएसईबी के एस.ई.श्री सी.एम.बाजपेयी, सीवीआरयू के प्राध्यापक श्री अंकु लहरे, श्री एस.आर.टंडनने व विद्यार्थियों में पारुल श्रीवास्तव, खुश्बू नथानी, तुषारकांत ने अपने विचार रखे। सेमिनार के दूसरे दिन के पहले तकनीकी सत्र में विश्वविद्यालय के कॉमर्स डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष प्रो.पी.पाण्डेय चेयरपर्सन रहे। इस सत्र का संचालन डॉ.श्वेता साव व ज्योतिबाला गुप्ता ने किया। इस सत्र में अपोलो, बिलासपुर की एच.आर.श्रीमती अराधना मुदेलियार, सनसॉप्ट साल्युशन, नागपुर के सीईओ श्री सुभाष कुलकर्णी और एनआईआईटी हेड (बिलासपुर व कोरबा) श्री राजेश पाण्डेय, सीवीआरयू के ट्रिपल‚ई ब्रांच के एचओडी श्री धर्मेंद्र सिंह ने प्रभावी तरीके से अपने विचार रखे।


दूसरे दिन के दूसरे तकनीकी सत्र में सीवीआरयू के सिविल ब्रांच के हेड प्रो.पी.के.गुप्ता चेयरपर्सन रहे और सत्र का संचालन श्रीमती यू.गांगुली और श्रीमती पूजा श्रीवास्तव ने किया। इस सत्र में सीवीआरयू के कामर्स डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो.पी.पाण्डेय, शा.इंजीनियरिंग कालेज कोनी के प्राध्यापक श्री सिंघई, सीवीआरयू के विभिन्न विभागों के प्राध्यापकगणों में श्री ए.एस.मजुमदार, श्री निकेत शुक्ला, श्री रोहित मिरी, श्री एस.आर.टंडन, श्री कपिल पटेल, रागिनी शुक्ला ने अपने अमूल्य विचार व्यक्त कर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। इसी के समानांतर चल रहे तकनीकी सत्र में चेयरपर्सन बीएड डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ.पी.के.नायक रहे और सत्र का संचालन श्री एस.आर.टंडन,श्री अभिषेक मिश्रा ने किया। इस सत्र में विद्यार्थियों में अखिलेश शर्मा, तफप्ति कश्यप, प्रज्ञा सोनी, संदीप डिक्सेना, राहूल आर्या, अमित कुमार साहू, रुपेश कुमार देवांगन, कु.शुभलक्ष्मी, टॉयसी चंदा, कु.रिया, रिचर्ड जॉन, छाया पटेल, सुमोना चटर्जी ने अपने विचार व्यक्त किए।


10.3 मिलियन अकुशल कामगार हर साल आ रहे बाजार में


सेमिनार के तकनीकी सत्र में सीवीआरयू के ट्रिपल-ई ब्रांच के एचओडी श्री धर्मेंद्र सिंह, प्राध्यापकगणों में श्री ए.एस.मजुमदार, श्री निकेत शुक्ला, श्री रोहित मिरी, श्री एस.आर.टंडन, श्री कपिल पटेल, रागिनी शुक्ला ने कौशल विकास में विश्वविद्यालय की भूमिका को प्रभावी तरीके से रखते हुए बताया कि भारत देश में व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिए मात्र 2.5 मिलियन सीटें हैं जबकि हर वर्ष भारतीय बाजार में 12.8 मिलियन कामगार आते हैं। इस तरह से देखा जाए तो हर साल 10.3 मिलियन अकुशल कामगारों को हम बाजार में पाते हैं। एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में भारत देश को 7 सौ मिलियन कुशल कामगारों की आवश्यकता पड़ेगी। वर्तमान में मांग के अनुसार कुशल कामगारों की पूर्ति और भविष्य की आवश्यकता में भारी अंतर को देखते हुए यह तो साफ तौर पर कहा जा सकता है कि भारत में वर्तमान में कार्यरत व्यवसायिक प्रशिक्षण संस्थान इतनी बड़ी मांग को किसी भी हालत में पूरा नहीं कर पाएंगे। ऐसे में अपने पास उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए विश्वविद्यालय अगर कौशल विकास के क्षेत्र में काम करते हैं तो मार्केट की मांग की पूर्ति भी की जा सकती है और विश्वविद्यालयों पर इस काम के लिए किसी प्रकार का आर्थिक बोझ भी नहीं आएगा।

प्रस्तुति ः अमित पुरोहित, बिलासपुर

 

 

 

 

 
 
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