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              इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए अंक 188,वर्ष 22,फरवरी 2010
 
 
इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए
परिचय
'इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए' इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्प्यूटर विज्ञान एवं नये तकनीकी विषयों में हो रहे नित-नूतन परविर्तनों से हिन्दी में लोगों विशेषकर बच्चों को अवगत कराने वाली देश की पहली हिंदी पत्रिका है। इसका प्रकाशन वर्ष 1988 से लगातार किया जा रहा हैं प्रारम्भ के दो वर्षों तक पत्रिका का स्वरूप त्रैमासिक था। फिर इसका प्रकाशन द्वैमासिक हुआ तथा वर्ष 1995 आते-आते पत्रिका मासिक रूप से निकलने लगी। पिछले बाइस वर्षों से पत्रिका सतत् रूप से प्रकाशित हो रही है। पत्रिका की 15,000 - 18,000 प्रतियां प्रतिमाह निकलती हैं। प्रसार संख्या का यह आंकड़ा संभवत: देश की अन्य प्रमुख हिंदी पत्रिकाओं की प्रसार संख्या से अधिक है।

उपलब्धियाँ
पत्रिका हिंदी राज्यों के विद्यार्थियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। पत्रिका में तकनीकी व विज्ञान आलेखों के साथ कई रोचक स्तम्भों का प्रकाशन भी किया जाता हैं रूचिकर एवं ज्ञानवर्धक 'विज्ञान समाचार', 'आई.टी.समाचार', 'नये उत्पाद' के साथ कम्प्यूटर और सामान्य ज्ञान की जानकारी को परखने हेतु 'सामान्य ज्ञान' व 'कम्प्यूटर प्रश्नोत्तरी', प्रायोगिक तौर पर विज्ञान के निकट पहुंचने हेतु 'स्वयं करके देखें' एवं 'खेल‚खेल में विज्ञान', कम्प्यूटर एवं आई.टी.क्षेत्र की जिज्ञासाओं के समाधान के लिए 'सवाल-जवाब', प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के अविष्कार एवं जीवन शैली का विस्तृत वविरण 'वैज्ञानिक प्रतिभा' स्तंभ के द्वारा प्रकाशित किये जाते हैं साथ ही स्वरोजगार स्थापना के लिए प्रेरणा तथा जानकारी देने हेतु 'लघु‚परियोजना', बच्चों के सवाल का रोचक जवाब देते राष्ट्रपति ए.पी.जे. कलाम की बानगी हेतु 'बच्चों के सवाल व राष्ट्रपति के जवाब', देश के महत्वपूर्ण व्यक्तियों के बारे में 'साक्षात्कार' जैसे स्तंभों का प्रकाशन समय‚समय पर किया जाता रहा है।

विज्ञान लेखकों का मंचelectroniki
इस बीच देश के लोकप्रिय विज्ञान लेखक इससे जुड़े हैं तथा कई युवा विज्ञान लेखकों को पत्रिका ने प्रोत्साहित भी किया है। इनमें शामिल हैं, डॉ. जयंत विष्णु नार्लिकर, डॉ. मनोज पटैरिया, कालीशंकर, अवधेश कुमार श्रीवास्तव, राकेश शुक्ला, डॉ. अरविन्द मिश्र, डॉ. डी.डी. ओझा, डॉ. पी.के. मुखर्जी, डॉ. विजय कुमार उपाध्याय, डॉ. दिनेश मणि, डॉ. डी. बालसुब्रमण्यम, शुकदेव प्रसाद, डॉ. ओमप्रकाश शर्मा, श्रीमती शशि शुक्ला, डॉ. एन.के. तिवारी, मनोहर नोतानी, राजीव रंजन उपाध्याय, श्रीमती कल्पना कुलश्रेष्ठ, श्रीमती संगीता चतुर्वेदी, ललित कोटियाल, संतोष शुक्ला, अनुराग सीठा, जी.डी. सूथा, डॉ. के.आर.के.मोहन, जे.कोनेटी रवा, सी.एल. शर्मा, आलोक हल्दर, बफजमोहन गुप्ता, जीशान हैदर ज़ैदी, हरीश गोयल, डॉ. कृष्ण कुमार, डॉ. नकुल पराशर, प्रवीण कुमार, पंकज मौर्य, यतीन चतुर्वेदी, संजीव गुप्ता, मनीष मोहन गोरे इत्यादि।

महत्वपूर्ण आलेख
पिछले अंकों में प्रकाशित हुए कुछ महत्वपूर्ण आलेख निम्न हैं :-
आइंस्टाइन - विज्ञान से शांतिवाद तक, सापेक्षता का संत, विज्ञान के प्रति घटती रुचि, क्या है वी.ओ.आई.पी., सुनामी ने खोली पोल, कम्प्यूटर में जड़े हीरे, सूचना प्रणाली ऑडिट, फिशिंग - साइबर ठगी का तरीका, आई.टी. में बढ़ा हिन्दी का महत्व, विकास के लिए विज्ञान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नवोन्मेष, हाईटेक होती हिन्दी विज्ञान पत्रकारिता, संभावनाओं का खुला आसमां, तप रही धरती, आ रहे हैं एन्ड्रोइड्स, बदलती दुनिया में हिन्दुस्तान, कैसी होंगी भविष्य की अंतरिक्ष यात्राएं, सूचना प्रौद्योगिकी का सामाजिक प्रभाव, विकिरण से भागे कैंसर, सूचना बनी शक्ति, सेल्युलर तकनीकों के मानक, खुले ब्रह्माण्ड के राज, दूरियां दूर हुईं, सूचना क्रांति का आग़ाज, कम्प्यूटर एक-रोजगार अनेक, 20 वीं शताब्दी - अद्भुत उपलब्धियां, ई‚कॉमर्स विश्व व्यापार की नई संभावनायें, खिलौनों का बदलता स्वरूप, सूचना और संचार, भारत और ब्रॉडबैंड, भूकंप के कारणों का वैज्ञानिक विवेचन, बच्चों तक पहुंची आई.टी. शिक्षा, क्लोनिंग के मसीहा हुए शर्मसार, ई‚कृषि बनाए एगमार्केट, इन्सेट का लंबा सफर, सौर ऊर्जा पर जमी निगाह, इंटरनेट के पंदह वर्ष, लिम्बिड बम का विज्ञान, विश्व की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री अनोसेह अंसारी, विज्ञान से ग्रामीण विकास, ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ता खतरा, नैनो प्रौद्योगिकी एक पहलू यह भी, टेली चिकित्सा और सूचना प्रौद्योगिकी, स्पूतनिक प्रमोचन की स्वर्ण जयंती

100 वां अंक
इलेक्ट्रॉनिकी के सफर में वर्ष 2002 में महत्वपूर्ण पड़ाव आया। इसके सौवें अंक का विमोचन देश के गणमान्य नागरिकों के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ. अनुज सिन्हा निदेशक, राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार परिषद्, भारत सरकार, श्री शरद चंद बेहार, तत्कालीन महानिदेशक, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, डॉ. ओम विकास, निदेशक, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार, विज्ञान लेखक गुणाकर मुले उपस्थित थे। देश के मशहूर विज्ञान लेखक भी इस समारोह में भागीदारी करने आए थे।

डॉ. मनमोहन बाला (नई दिल्ली), स्व. दिलीप साल्वी (नई दिल्ली), डॉ. पी. के. मुखर्जी (नई दिल्ली), डॉ. रघुवीर दत्त (नई दिल्ली), संजय वर्मा (गोरखपुर), कपिल कुमार त्रिपाठी (नई दिल्ली), डॉ. वी.डी. गर्दे (भोपाल) इत्यादि। इस अवसर पर 'हिन्दी में विज्ञान लेखन' विषय पर सेमिनार भी आयोजित किया गया। इसमें बड़ी संख्या में पत्रकार, विद्यार्थी एवं शिक्षक शामिल हुए।

150 वां अंक
इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्प्यूटर विज्ञान एवं नई तकनीक की पत्रिका 'इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए' के 150वें अंक का लोकार्पण 2006 में भोपाल के रवीन्द भवन सभागार में संस्कृति एवं खनिज संसाधन मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा के कर‚कमलों से संपन्न हुआ। इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार के सलाहकार डॉ. अनुज सिन्हा, आरजीपीव्ही के डीन डॉ. एस.एन. वर्मा एवं इंस्टीट्यूशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेली कम्प्यूनिकेशन इंजीनियर्स नई दिल्ली के डॉ. मनमोहन बाला, पत्रिका के संपादक श्री संतोष चौबे एवं प्रमुख उप‚संपादक श्रीमती विनीता चौबे सहित देशभर से आये तकनीकी लेखक उपस्थित थे। लोकार्पण समारोह के बाद तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता आरजीपीव्ही भोपाल के डीन डॉ. एस.एन. वर्मा ने की। इस अवसर पर हिन्दी ब्लाग्स के लिए माइक्रोसॉप्ट द्वारा पुरस्कृत रविशंकर श्रीवास्तव ने 'हिन्दी में कम्प्यूटिंग' विषय तथा भोपाल संचार नगिम लिमिटेड भोपाल के महाप्रबंधक राजेश गुप्ता ने 'इंटरनेट के 15 वर्ष' पर विचार व्यक्त किए। समारोह के दूसरे दिन 'हिन्दी में तकनीकी लेखन की संभावनाएं एवं चुनौतियां' विषय पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के साथ कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में लेखकों, पत्रकारों, विषय विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की।

पुरस्कार
भोपाल में स्थित और देश भर में ख्याति प्राप्त माधव राव सप्रे संग्रहालय द्वारा पत्रिका 'इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए' को ''रामेश्वर गुरू पुरस्कार'' और दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय द्वारा ''भारतेन्दु पुरस्कार'' मिल चुका है। ''इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए'' को कुशल संपादन व विज्ञान एवं तकनीक विषय पर आधारित हिन्दी में प्रकाशित होने वाली देश की प्रथम पत्रिका होने के कारण यह पुरस्कार दिया गया है।

भागीदारी
पत्रिका ने समय‚समय पर कई प्रदर्शनियों का निर्माण व पुस्तक मेलों में भागीदारी की है। कुछ प्रमुख प्रदर्शनियां हैं‚

• शिक्षा में सूचना प्रौद्योगिकी

• कम्प्यूटर की कहानी

• ग्रामीण विकास में सूचना प्रौद्योगिकी

• मनोरंजन और सूचना प्रौद्योगिकी

• दूरसंचार की कहानी

पत्रिका दिल्ली में आयोजित होने वाले विश्व पुस्तक मेले में भी भागीदारी करती है। इसके अलावा राज्य स्तरीय, जिला स्तरीय पुस्तक मेलों में भी पत्रिका भागीदारी करती हैं पुस्तक मेले के जरिये बच्चों के बीच पत्रिका विज्ञान और प्रौद्योगिकी का प्रचार प्रसार करती है। छात्रों और सामान्य जन के बीच पत्रिका कम्प्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं नई नकनीक का प्रचार बखूबी कर रही है। पत्रिका का प्रत्येक अंक संग्रहणीय होता है।

अन्य गतिविधियां
पत्रिका मासिक रूप से प्रकाशित होने के साथ कुछ अन्य गतिविधियां भी आयोजित करती हैं। उदाहरण के तौर पर विज्ञान दविस के अवसर पर स्कूलों में क्व़िज व निबंध प्रतियोगिता आयोजित करना, साइंस मॉडल प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता इत्यादि कुछ अन्य गतिविधियां भी समयज्ञ्समय पर की जाती हैं। पत्रिका के बैनर तले 'साइंस क्लब' का गठन किया गया है। इसमें 250 सदस्य हैं। इन सबके अलावा हॉबी किट्स का निर्माण किया जाता है। ये किट्स विद्यार्थियों के बीच काफी लोकप्रिय है। बच्चों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाने के आंदोलन में पत्रिका जुटी हुई है। पत्रिका का प्रत्येक अंक संग्रहणीय होता है।

 
 
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साईट का निर्माण एवं रखरखाव आईसेक्ट वेब सेन्टर द्वारा किया गया है।