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विज्ञान समाचार
टी-शर्ट रखेगी मरीज के स्वास्थ्य पर नजर
शरीर का तापमान, दिल की धड़कन समेत मरीज के स्वास्थ्य की स्थिति बताएगी टी-शर्ट। इसके जरिए घर पर भी मरीज के स्वास्थ्य पर निगाह रखी जा सकेगी। मेड्रिड की कार्लोस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी इंटेलीजेंट टी-शर्ट बनाई है, जो मानव शरीर की देख-रेख कर सकेगी। इसके जरिए न सिर्फ शरीर का तापमान, बल्कि दिल की धड़कनें समेत मरीज की उपस्थिति भी पता लगाई जा सकेगी। इससे यह भी जाना जा सकेगा कि मरीज लेटा हुआ है या बैठा।
कैसे होगा संभव : यह टी-शर्ट ई-टेकनॉलॉजी की मदद से जानकारियां जुटाएँगी । यह भी बगैर किसी तार की मदद से। जुटाई गई जानकारियां इंफॉमेंशन मैनेजमेंट सिस्टम तक पहुंचेगी। इस तरह मरीज की स्थिति समेत उसकी जांच रिपोर्ट डॉक्टर को मिलती रहेगी। टी-शर्ट के साथ एक स्थिति का पता बताने वाला डिवाइस होगा, जो जेब में रखा रहेगा।
अन्य खूबियां : इस टी-शर्ट में इलेक्ट्रोड लगे हैं, जो बायो इलेक्ट्रिक पावर की पहचान करने में सक्षम हैं। इनसे मरीज का इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम लिया जा सकेगा। इसके साथ थर्मामीटर और एक्स्लरोमीटर भी अटैच रहेगा, जिसे जरूरत पड़ने पर हटाया जा सकता है।
अलार्म बजा कर देगी चेतावनी : टी-शर्ट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि अलग‚अलग स्थितियों में यह अलार्म के जरिए चेतावनी दे सकेगी। मसलन यदि शरीर का तापमान डॉक्टर द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक होता है या दिल की धड़कन 100 प्रति मिनट से बढ़ते ही अलार्म बज उठेगा। यही नहीं, टी-शर्ट इसके साथ ही संबंधित डॉक्टर को एसएमएस के जरिए इमरजेंसी की सूचना भी दे सकेगी।
क्या होगा फायदा : इसका फायदा अस्पताल में भर्ती मरीजों समेत घर पर इलाज कराने वालों को भी मिल सकेगा। इसके जरिए डॉक्टर प्रारंभिक इलाज के बाद दूर बैठ कर भी मरीज के स्वास्थ्य पर निगाह रख सकेंगे ।
ब्रेन ट्यूमर को रोकेगा पोलियो विषाणु
हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भारत को पोलियो मुक्त देश की श्रेणी में स्थान दिया गया है। वहीं स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क के शोध वैज्ञानिकों ने पोलियो विषाणु को पालतू बना कर उससे ब्रेन ट्यूमर पर रोक लगाने में सफलता प्राप्त की है। शोधकर्ता डॉ. मैथियास ग्रेमियर की रिपोर्ट के अनुसार शोधकर्ताओं ने पोलियो विषाणु में आनुवांशिक सुधार कर इसे इस हद तक पालतू बना लिया है कि वह उनके इशारे पर मस्तिष्क में बढ़ती गांठ यानी ब्रेन ट्यूमर पर रोक लगाने में मदद करता है।
पोलियो विषाणु के हमला करने की रणनीति काअध्ययन करने पर पाया है कि यह नन्हा मगर खतरनाक विषाणु तंत्रिका कोशिकाओं पर घुसपैठ कर रोगों को जन्म देता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए विषाणु के प्रवेश पर अध्ययन किया गया। विषाणु से नुकसान पहुंचाने वाले जीन को निकाला गया और उसे जुकाम के वायरस में पहुंचा दिया गया। इस तरह पोलियो विषाणु में रोग फैलाने की क्षमता समाप्त हो गई। परीक्षण के तौर पर इसे चूहों के मस्तिष्क की ओर भेजा गया, जो ब्रेन ट्यूमर से प्रभावित थे। असल में यह चूहे ह्मेन ग्लाओब्लास्टोमा की चपेट में थे, जो ब्रेन ट्यूमर के लिए जिम्मेदासर होते हैं। जब आनुवांशिक रूप से सुधरे विषाणुओं को इंजेक्शन द्वारा अंदर पहुंचाया गया तो वह तत्काल हरकत में आ गया और उसने ट्यूमर कोशिकाओं की वफद्धि पर रोक लगा दी। मात्र दो सप्ताह में ही चूहों में सुधार के लक्षण सामने आ गए। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस सफलता ने मानव मस्तिष्क में तेजी से फैलते ट्यूमर पर काबू पाने की आशा जगाई है। इस शोध की मानव पर सफलता की पुष्टि करते हुए हस्टन स्थित एंडरसन कैंसर सेंटर के डॉ. एरिक होलैंड कहते हैं, 'शोध फिलहाल मानव में ब्रेन ट्यूमर की सूचना देने में तो समक्ष है ही, कल उस पर काबू पाने में भी मददगार साबित होगा।`
कैंसर को धता बताता तरबूज
गर्मियों की शुरूआत होते ही मौसमी फलों का इंतजार होने लगता है। ऐसे फल जो शरीर को भरपूर रस और फाइबर के साथ ताजगी और ठंडक प्रदान करें। ऐसा ही एक फल है तरबूज। अमेरिकी कृषि विभाग द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कैंसर रोकने की तरबूज की अद्भुत क्षमता को उजागर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार तरबूज में लाइकोपिन नामक ऐसा तत्व पाया जाता है, जो कैंसर होने से रोकता है। परीक्षण में पाया गया है कि लाइकोपिन असल में एक एंटी ऑक्सीडेंट है। यह उन फ्री रेडिकल्स से दो-दो हाथ करता है, जो शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं पर चोट कर उन्हें नष्ट कर देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार हालांकि लाइकोपिन तत्व टमाटर, खरबूज और काले अंगूर में भी पाया जाता है, पर तरबूज में इसकी मात्रा अधिक होती है व इसकी गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
नया होगा वेब, फोन और गेमिंग अनुभव
इस साल पेश होने वाला फेसबुक का फीचर फोन जमीनी स्तर पर लोगों को सोशल नेटवर्किंग का अनुभव देने का काम करेगा, तो वेब में सोशल नेटवर्किंग रियल टाइम में सामने आएगी। गेमिंग के क्षेत्र में लोकप्रिय गेम्स अपने तीसरे संस्करण के रूप में अवतरित होंगे।
फीचर फोन पाटेंगे खाई : पिछले कुछ सालों में मोबाइल टेकनॉलॉजी में कई बदलाव देखने में आए हैं, लेकिन अब इनमें स्थायित्व सा आ रहा है अब विद्यमान टेक्नॉलॉजी को ही और विकसित किया जा रहा है। इस क्रम में चर्चा है कि इस साल लांच होने जा रहे आईफोन 5 में भी कई बेहद मामूली बदलाव किए गए हैं। मसलन इसका क्रीन 5 इंच का होगा। साथ ही प्रोसेसर की क्षमता भी बढ़ी हुई होगी ।
क्वाड कोर का जमाना : अगर बीता वर्ष ड्यूल प्रोसेसर का रहा तो यह साल क्वाड कोर प्रोसेसर का रहेगा। टीग्रा 3 टैबलेट में क्वाड कोर आने ही लगा है। उम्मीद है कि आने ही लगा है। उम्मीद है कि एचटीयी जेआ और सैमसंग गैलेक्सी एस3 भी क्वाड कोर प्रोसेसर से लैस होंगे ।
डंब फोन छाएंगे : स्मार्टफोन से अलग हटते हुए फीचर फोन या डंब फोन क्रेज बन कर उभरेंगे। फेसबुक मीडियाटेक के साथ गठजोड़ करके इस डिवाइस को पेश करने जा रहे हैं। फीचर फोन वास्तव में लो‚एंड डिवाइस कहते हैं। अब फेसबुक सरीखे दिग्गज डंब फोन के जरिए निचले तबकि को भी फोन पर सोशल नेटवर्किंग की सुविधा देने की कोशिश कर रहे हैं।
प्लेक्सिबल टच क्रीन : इस साल जो सबसे बड़ी टेक्नॉलॉजी करार दी जा रही है, वह है लचीले टचक्रीन। नोकिया ने नवंबर में इसका प्रदर्शन किया था, तो सैमसंग इस साल लचीले टचक्रीन वाले फोन पेश करने की घोषणा कर चुका है।
आईपैड मिनी : आईपैड टैबलेट 3 के साथ उसका एक मिली वर्जन भी पेश करेगा, जो 7 इंच का होगा। इसके जरिए एप्पल लोअर और मीडियम सैग्मेंट में भी अपनी धाक जमाना चाहेगा।
अमेजन शॉप : अमेजन ने भारत में कुछ शहरों में अपने डेवलपमेंट सेंटर खोले हुए हैं, लेकिन चर्चा है कि वह इस साल भारत में अपनी शॉप खोलेगा। इसका मतलब यह हुआ कि किंडल फायर कहीं सस्ते दामों में उपलब्ध होगी।
रियल टाइम अपडेट : वेब ट्रेड्स के बारे में खासकर उससे जुड़े चलन के बारे में कोई टिप्पणी करना आसान नहीं है। बीते वर्ष कम्प्यूटिंग का एक अलग स्वरूप मिश्र से लेकर रूस तक देखने में आया। ऐसे में इस साल इंटरनेट ट्रेड्स में आमद दर्ज होगी सोशल मीडिया के विजुअल होने से। यानी फेसबुक या ट्विटर पर अपडेट पोस्ट करने या फोटो वीडियो लोड करने का स्थान लेगा रियल टाइम अप्रगेडेशन। आप किस फिल्म को देख रहे हैं से लेकर कहां शॉपिंग कर रहे हैं सारी बातें उसके वीडियो के साथ रियल टाइम में अपलोड होंगी । हालांकि इसके साथ ही खड़ा होगा निजता का गंभीर प्रश्न।
गेमिंग में पार्ट 3 का दौर : गेमिंग कंसोल से लेकर गेम तक पार्ट 3 अवतार में होंगे। इन्हें संभव बनाने का काम करेंगे पीएस 4 और एक्सबॉक्स 7201. चर्चा है कि इनके रूप में पुराने कंसोल नए अवतार में हेंगे। रहा सवाल गेमिंग का तो यह साल ट्रायोलॉजी का रहेगा। इसमें भी प्रमुखता से नाम लिया जा रहा है ' मास इफैक्ट 3 का जिसमें जैक शैफर्ड की कहानी को अंजाम तक पहुंचते दिखाया जा सकता है।
मैक्सक पायने 3 : ओल्ड स्कूल पीसी गेमिंग के शौकीनों के लिए 'मैक्स पायने` तीसरे अवतार में होगा। लेकिन यह श्रफंखला संभवत: खत्म नहीं होगी, बस पिछले संस्करण से आगे बढ़ती नजर आएगी।
निंजा गैंडेन 3 : गेमिंग के शौकीनों में लोकप्रिय निंजा रयुहायाबूसा निंजा गेंडेन 3 के साथ अवतरित होगा। इसमें निंजा अपने क्रियाकलापों पर सोच-विचार करता नजर आएगा।
और भी है कतार में : बायोशॉक में अपनी तीसरी कड़ी के साथ पेश होगा। इसके अलावा डायब्लो 3 सीरीज भी लंच होगी । प्लेस्टेशन वीआ भी इस साल लांच होगा, जो गेमिंग को पीएस3 सरीखी गुणवत्ता देने का कम करेगा।
'ब्रह्मोस` से मिली चीन की चुनौती से निपटने की ताकत
राजस्थान के पोखरण में सेना ने 290 किलोमीटर दूरी तक मारक क्षमता वाले ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफलतम परीक्षण किया। यह दुनिया की अकेली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है।
सेना के एक प्रवक्ता ने यहां कहा कि भारतीय सेना की इकाई ने ब्रह्मोस मिसाइल का सफल परीक्षण किया और राजस्थान के रेंजों में पूर्व चयनित लक्ष्य को मिसाइल की मदद से भेदा। परीक्षण के दौरान वाइस चीफ लेप्टिनेंट जनरल श्रीकृष्णा सिंह और डीजीएमओ लेप्टिनेंट जनरल ए.के. चौधरी समेत सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। सेना ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के तीन रेजिमेंट के लिए ऑर्डर पहले ही दिया था और इस परीक्षण के साथ दो को अभियान में शामिल किया जा चुका है। रक्षा मंत्रालय ने अरूणाचल प्रदेश में चीनी सीमा पर तीसरी रेजिमेंट को शामिल करने के लिए भी सेना को मंजूरी दे दी है।
ए. विशवथानू पिल्लै की अगुवाई में भारत‚रूस के संयुक्त उपक्रम वाली कंपनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस निकट भविष्य में पनडुब्बी से प्रक्षेपित होने वाले, वायु से प्रक्षेपित होने वाले और मिसाइल के एक हाइपरसोनिक संस्करण को विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है।
सुपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण
बेहद नीची उड़ान भरते हुए ब्रह्मोस ध्वनि की गति से ढाई गुना अधिक गति से बढ़ी और अचूक वार करते हुए लक्ष्य भेदा ।
डीआरडीओ भारत तथा रूस के एनपीओ मशीनोस्त्राsएनिया के संयुक्त उपक्रम 'ब्रह्मोस` द्वारा मिसाइल का विकास किया गया।
इस उपक्रम का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र के शुरूआती और रूस की मोस्कया नदी के शुरूआती अंश को मिलाकर रखा गया ।
ब्रह्मोस की एक इकाई पूर्वोत्तर में गठित की जाएगी, ताकि चीन से पैदा होने वाले खतरों का सामना किया जा सके।
ब्रह्मोस को सुखोई में लाने तथा नौ सेना के लिए उसका परीक्षण पानी के भीतर किए जाने की तैयारियां चल रही हैं।
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