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इलेक्ट्रॉनिकी,
कम्प्यूटर
विज्ञान
एवं
नई
तकनीक
की
पत्रिका
अंक 180, वर्ष 21
जून 2009
सलाहकार मण्डल
श्री शरद चंद बेहार
डॉ.
वि.दि.
गर्दे
डॉ.
संध्या चतुर्वेदी
डॉ.
मनमोहन बाला
संपादक
संतोष चौबे
प्रमुख उप-संपादक
विनीता चौबे
उप-संपादक
पुष्पा असिवाल
सह-संपादक
रवि जैन
प्रसार समन्वयक
विकास श्रीवास्तव, योगेश मिश्रा, शशिकांत वर्मा, के.सी.सथुआ, राजीव चौबे, रवि चतुर्वेदी, आनंद पेरूमल, अब्दुल मसीद, ए.एच.सदिअल, राजेश शुक्ला
समन्वयक प्रचार एवं विज्ञापन
राजेश पंडा
आवरण
वंदना श्रीवास्तव
आकल्पन
मोहर सिंह चौहान
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विज्ञान
एवं तकनीकी
विषयों पर
हिंदी में
निकल रही
पत्रिका 'इलेक्ट्रॉनिकी
आपके लिए'
के 07 नवम्बर 2006 को
लोकार्पित 150 वें अंक के
साथ
पत्रिका ने
20 वर्षों का
सफर पूरा
किया है।
यह सुखद
संयोग रहा
कि पत्रिका
का 150 वां अंक और
वैज्ञानिक
डॉ. सी.वी.रमन
का
जन्मदिवस
महीने और
साल की
पगडंडी में
चलते-चलते
समय के
मोड़ में
एक साथ हो
लिए। इसे
दार्शनिक
अंद़ाज में
देखें तो
महसूस होगा
कि विज्ञान
और
कम्प्यूटर
विज्ञान
विषय पर
आधारित
पत्रिकाओं
की
फेहरिस्त
में खड़ी
चुनिंदा
पत्रिकाओं
में से एक
इलेक्ट्रॉनिकी
आपके लिए
को मानो डॉ.सी.वी.रमन
का
आशीर्वाद
प्राप्त हो
रहा हो।
पत्रिका के
लिए गर्व
और संतोष
का विषय है
कि पत्रिका
परेशानियों
के अंधेरे
को चीरते
हुए 150 वें अंक
की सीढ़ी
तक जा
पहुंची है।
पत्रिका का
भविष्य
निश्चित
तौर पर
उज्जवल है
और उसे 150 वें अंक
के समान
तमाम
सीढ़ियां
पार करते
हुए लगातार
चलते जाना
है। जरा
इसके
इतिहास पर
ऩजर डालते
हैं। इसका
इतिहास एक
शायर की दो
पंक्तियों
में मानों
समाया हुआ
है-
मैं अकेला
ही चला था
ज़ानिबे मंजिल
लोग साथ
आते गए
कारवां
बनता गया।।
पत्रिका
के संपादक
संतोष चौबे
बताते हैं
कि
इलेक्ट्रॉनिकी
के 150 वें अंक के
साथ-साथ
इसकी
प्रकाशक
संस्था
आईसेक्ट ने
भी 20 बरस पूरे
कर लिए
हैं।
उन्होंने
वर्ष 1985 में
सोसायटी
फॉर
इलेक्ट्रॉनिक्स
एंड
कम्प्यूटर
टेक्नॉलॉजी
(सेक्ट)
की स्थापना
के जरिये
स्कूलों
में
कम्प्यूटर
प्रशिक्षण
कार्यप्रम
का बीज
बोया। धीरे-धीरे
यह बीज
पौधा और
फिर पेड़
बन चला। आज
की तारीख
में 29 राज्यों
में मौजूद 4500 शाखाओं ने
कम्प्यूटर
प्रशिक्षण
का
कार्यभार
संभाल रखा
है। संतोष
चौबे इस
अलख की
शुरूआत में
ही समझ गए
थे कि
मध्यप्रदेश
के छात्रों
से हिंदी
में ही बात
करनी होगी।
इसीलिए
उन्होंने
हिंदी में
कम्प्यूटर
विषय पर
पुस्तकें
लिखना
प्रारम्भ
कीं।
कम्प्यूटर
विषय पर
हिंदी की
प्रथम
पुस्तक 'कम्प्यूटर
एक परिचय'
श्री संतोष
चौबे ने
लिखी। इस
पुस्तक को
भरपूर
प्रशंसा
मिली और
भारत सरकार
द्वारा
पुरस्कृत
हुई।
छात्रों को
कम्प्यूटर
के बारे
में
जानकारी
देने के
लिए
पत्रिका की
योजना
बनायी। इस
तरह शुरू
हुआ
पत्रिका 'इलेक्ट्रॉनिकी
आपके लिए'
का सफर सन् 1988 में।
वह
आगे बताते
हैं कि
प्रारम्भ
के दो
वर्षों तक
पत्रिका का
स्वरूप
त्रैमासिक
था।
राष्ट्रीय
विज्ञान और
प्रौद्योगिकी
संचार
परिषद् ने
शुरूआती
अंकों हेतु
सहयोग भी
दिया। उनके
सामने
सच्चाई
जल्द ही
खुलकर आ गई
कि सिर्फ
सरकारी
सहयोग के
सहारे
पत्रिका को
लगातार
प्रकाशित
नहीं किया
जा सकता।
दूसरी तरफ
विज्ञान,
कम्प्यूटर
विज्ञान
जैसे
विषयों पर
लिखने वाले
लोगों को
देश में
उंगलियों
में गिना
जा सकता
था। इनमें
से भी
अधिकतर
दिल्ली
जैसे बड़े
शहरों में
थे और बहुत
व्यस्त थे।
पत्रिका की
पूंजी यानी
लेखकों को
तलाशना भी
एक जरूरी
काम था।
बहरहाल इन
दिक्कतों
से घबराने
के बजाय
पत्रिका को
द्वैमासिक
किया गया
और उसे
छात्र
केंदित
बनाने का
संकल्प
लिया गया।
यह दौर था
वर्ष 1990 का। इस समय
पर्सनल
कम्प्यूटर्स
का भारत
में आगमन
शुरू हो
गया था और
अगला दशक
सूचना
प्रौद्योगिकी
में हाइपर
ग्रोथ का
दशक सिद्ध
होने ही
वाला था।
समय की
मांग के
चलते
कम्प्यूटर
शिक्षा की
आवश्यकता
ने सेक्ट
की शाखाओं
की संख्या
बढ़ाते हुए
उसे समृद्ध
कर दिया।
स्कूलों
में भी
कम्प्यूटर
प्रशिक्षण
कार्यप्रम
का विस्तार
हो रहा था।
इस तरह
पत्रिका को
छात्र
केंदित
बनाने की
रणनीति सफल
हो गई और
सिर्फ
छात्रों के
व्यापक
सहयोग से
ही इसे
आगामी पांच
वर्षों तक
जीवित रखा
जा सका।
सदी
के आखिरी
दशक में
सूचना
प्रौद्योगिकी
का
अभूतपूर्व
विस्तार
हुआ और 1995 के आते-आते
पत्रिका
मासिक हो
गई। पिछले
दस वर्षों
से पत्रिका
मासिक रूप
से लगातार
निकल रही
है। इस
दौरान
विज्ञान
लेखकों और
छात्रों
तथा पाठकों
का जुड़ाव
बढ़ा है और
पत्रिका ने
देश भर में
पहचान बनाई
है।
पत्रिका आज
12,000 से 15,000 प्रतियों
में
प्रतिमाह
निकल रही
है। शायद
यही
प्रकाशन
संख्या
अन्य
विज्ञान
पत्रिकाओं
की भी
होगी।
इस
बीच सेक्ट
ने देश के 29 राज्यों
में अपना
विस्तार
किया और अब
यह संस्था
ऑल इंडिया
सेक्ट यानी
आईसेक्ट के
रूप में
जानी जाती
है। संस्था
को मिले
इंडियन
इनोवेशन
अवार्ड,
नैसकॉम आई.टी.
इनोवेशन
अवार्ड तथा
मध्यप्रदेश
सरकार के
डॉ. शंकर
दयाल शर्मा
पुरस्कार
ने हौसला
बढ़ाया।
आईसेक्ट
द्वारा
प्रकाशित
पुस्तकें 'कम्प्यूटर
एक परिचय', सी और सी ++ : सिद्धांत
और शिल्प, 'जीआईएस', 'इंटरनेट', ई-गवर्नेंस,
लगभग सभी
विभागों
द्वारा
पुरस्कृत
की जा चुकी
हैं। इन
सभी
उपलब्धियों
ने पत्रिका
की
गुणवत्ता
को बढ़ाने
में भी
महती
भूमिका
निभाई है।
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